National Desk, tajnews.in | Thursday, April 16, 2026, 03:35:15 PM IST

बेंगलुरु: मां और बेटे का रिश्ता इस दुनिया में सबसे पवित्र, निस्वार्थ और अटूट माना जाता है। एक मां अपनी औलाद की खुशी के लिए हंसते-हंसते हर दर्द सह लेती है। लेकिन, जब वही औलाद अपनी जन्म देने वाली मां के खून की प्यासी हो जाए, तो इसे घोर कलयुग और इंसानियत का सबसे बड़ा पतन ही कहा जाएगा। भारत की ‘सिलिकॉन वैली’ कहे जाने वाले शहर बेंगलुरु से एक ऐसा ही रूह कंपा देने वाला और बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। शहर के पॉश इलाके बीईएमएल लेआउट (आरआर नगर) में एक 42 वर्षीय उच्च शिक्षित सेल्स एग्जीक्यूटिव ने अपनी 75 वर्षीय लकवाग्रस्त और पूरी तरह से बेबस मां को चार मंजिला इमारत की छत से नीचे फेंक दिया। ऊंचाई से गिरने के कारण उस बुजुर्ग और लाचार महिला की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। गिरफ्तारी के बाद आरोपी बेटे ने पुलिस के सामने जो खौफनाक दलील दी, वह और भी ज्यादा विचलित करने वाली है। उसका कहना है कि वह अपनी मां को रोज-रोज बिस्तर पर तड़पते हुए नहीं देख पा रहा था, इसलिए उसने उन्हें ‘मुक्ति’ देने के लिए यह खौफनाक कदम उठाया। हालांकि, पुलिस इस अमानवीय हत्या के पीछे छिपे संपत्ति और अन्य पारिवारिक विवादों की भी बहुत गहराई से जांच कर रही है।
बुढ़ापा, बीमारी और अपनों का जानलेवा तिरस्कार
बेंगलुरु का राजराजेश्वरी नगर (RR Nagar) इलाका शहर के सबसे शांत और रिहायशी क्षेत्रों में गिना जाता है। लेकिन, बुधवार की मनहूस शाम इस इलाके में एक ऐसी चीख गूंजी, जिसने वहां के निवासियों की रूह कंपा दी। 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला पिछले काफी समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। कुछ समय पहले उन्हें लकवा (Paralysis) मार गया था, जिसके कारण वह पूरी तरह से बिस्तर पर आ गई थीं। उनका शरीर बिल्कुल असहाय हो चुका था और वे अपनी दैनिक दिनचर्या के लिए भी दूसरों पर पूरी तरह से निर्भर थीं। घर में उनका 42 वर्षीय बेटा उनके साथ रहता था, जो पेशे से एक मल्टीनेशनल कंपनी में सेल्स एग्जीक्यूटिव है।
आमतौर पर ऐसी गंभीर बीमारी में एक मां को अपने बेटे से सबसे ज्यादा प्यार, देखभाल और सहारे की जरूरत होती है। लेकिन, कॉर्पोरेट जीवन की अंधी दौड़ और भौतिकवादी सोच ने इस बेटे की इंसानियत को पूरी तरह से खत्म कर दिया था। पड़ोसियों से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मां की लंबी बीमारी और उनके इलाज के भारी खर्च को लेकर घर में अक्सर तनाव का माहौल रहता था। लकवाग्रस्त होने के कारण बुजुर्ग महिला अपनी तकलीफ बयां भी नहीं कर पाती थीं। लेकिन किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि एक पढ़ा-लिखा बेटा अपनी इस झुंझलाहट को एक खौफनाक हत्याकांड में बदल देगा।
चौथी मंजिल का वह खौफनाक मंजर और मौत की छलांग
पुलिस की शुरुआती तफ्तीश और घटनास्थल के मुआयने से जो खौफनाक कहानी सामने आई है, वह किसी भी आम इंसान का दिल दहलाने के लिए काफी है। चूंकि बुजुर्ग महिला लकवे के कारण खुद चलने-फिरने में बिल्कुल असमर्थ थीं, इसलिए यह स्पष्ट है कि आरोपी बेटा ही किसी बहाने से या जबरन उन्हें चार मंजिला इमारत की छत (Terrace) तक लेकर गया होगा। एक बेबस मां, जो अपने बेटे के सहारे छत पर गई होगी, उसे क्या पता था कि वही हाथ उसे हमेशा के लिए मौत की गहरी खाई में धकेलने वाले हैं।
छत पर ले जाने के बाद, उस पत्थरदिल बेटे ने बिना किसी दया या पछतावे के अपनी मां को नीचे फेंक दिया। चौथी मंजिल की भारी ऊंचाई से कंक्रीट की सड़क पर गिरने के कारण बुजुर्ग महिला के शरीर के चिथड़े उड़ गए। उनके सिर और शरीर में गंभीर चोटें आईं और उन्होंने कुछ ही पलों में तड़पकर अपना दम तोड़ दिया। जब जोर की आवाज सुनकर आसपास के लोग और पड़ोसी घरों से बाहर निकले, तो सड़क पर खून से लथपथ बुजुर्ग महिला का शव देखकर उनके होश उड़ गए। लोगों ने तुरंत पुलिस नियंत्रण कक्ष (Police Control Room) को इस खौफनाक घटना की सूचना दी, जिसके बाद पुलिस टीम भारी दलबल के साथ मौके पर पहुंच गई।
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‘मुक्ति या हत्या?’ आरोपी की दलील और पुलिस की सख्ती
घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर तुरंत पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इसके बाद पुलिस ने हत्यारे बेटे को बिना कोई मौका दिए उसके फ्लैट से ही गिरफ्तार कर लिया। जब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने थाने में उससे कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। लेकिन, उसने इस नृशंस हत्या को सही ठहराने के लिए जो तर्क दिया, वह भारतीय समाज और कानून की नजर में बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।
आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसकी मां लकवे के कारण बहुत ज्यादा तकलीफ में थी। वह बिस्तर पर पड़ी रहती थी और उसे अपनी मां का यह भयानक दर्द और बेबसी बर्दाश्त नहीं हो रही थी। उसने दावा किया कि अपनी मां को इस असहनीय शारीरिक कष्ट से हमेशा के लिए ‘मुक्ति’ (Mercy Killing/Euthanasia) दिलाने के लिए उसने यह कदम उठाया। लेकिन, कानून की नजर में चौथी मंजिल से किसी को धक्का देना कोई ‘मुक्ति’ नहीं, बल्कि एक बेहद क्रूर और सोची-समझी हत्या (Cold-Blooded Murder) है। पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि भारत में इच्छामृत्यु के कानून बेहद सख्त हैं और इस तरह छत से फेंककर किसी की जान लेना सिर्फ और सिर्फ अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रॉपर्टी का खेल या केयरगिवर बर्नआउट? जांच में जुटी पुलिस
बेंगलुरु पुलिस आरोपी की इस ‘भावनात्क’ दलील पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं कर रही है। पुलिस अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की कई अलग-अलग एंगल्स (Angles) से बहुत ही बारीकी से जांच कर रही है। सबसे पहला शक संपत्ति (Property) और बीमा (Insurance) से जुड़ा हुआ है। पुलिस यह खंगालने में जुटी है कि कहीं बुजुर्ग मां के नाम पर कोई बड़ी पैतृक संपत्ति, बैंक बैलेंस या कोई जीवन बीमा पॉलिसी तो नहीं थी, जिसे हड़पने के लालच में इस हत्या को अंजाम दिया गया हो।
इसके अलावा, पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस जघन्य हत्याकांड में बेटे के साथ घर का कोई अन्य सदस्य, पत्नी या कोई बाहरी व्यक्ति भी शामिल था। एक लकवाग्रस्त महिला को चौथी मंजिल तक अकेले ले जाना आसान नहीं है। समाजशास्त्रियों का मानना है कि आधुनिक समाज में बुजुर्गों की देखभाल करना (Caregiver Burnout) युवा पीढ़ी के लिए एक बोझ बनता जा रहा है, जिसके कारण वे ऐसे हिंसक और आपराधिक कदम उठा रहे हैं। फिलहाल, आरोपी बेटे को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर ले लिया गया है। इस घटना ने एक बार फिर से इस कड़वे सच को उजागर कर दिया है कि आज के दौर में बुढ़ापा किसी भी इंसान के लिए सबसे बड़ा अभिशाप बनता जा रहा है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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