सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक की सोफिया मार्केट चेस्ट में हड़कंप; ₹4.36 लाख के मिलान से शुरू हुई पड़ताल ₹17 करोड़ के फर्जी नोटों तक पहुंची, डीआईजी-डीएम-एसएसपी ने संभाला मोर्चा
Uttar Pradesh Desk, 🌐 tajnews.in | मंगलवार, 1 सितंबर 2026, 06:15:10 AM IST

tajnews.in | सहारनपुर: पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट में करीब 17 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने से बैंकिंग व्यवस्था में हड़कंप मच गया है। मामला महज 4.36 लाख रुपये की नकदी में कमी की जांच के दौरान खुला। शुरुआती जांच में जहां 7.40 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने की बात सामने आई थी, वहीं नोटों की पड़ताल आगे बढ़ने के साथ संदिग्ध जाली करेंसी की रकम बढ़कर करीब 17 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। हालांकि नोटों की अंतिम संख्या और कुल रकम की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर दिया है। बैंक प्रबंधन ने शुरुआती जांच में भूमिका संदिग्ध मिलने पर तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है, जबकि करेंसी चेस्ट में नोटों की गड्डियां व्यवस्थित करने वाले पार्ट टाइम हाउसकीपर को भी हटा दिया गया है।
11.50 करोड़ की नकदी भेजी गई, 4.36 लाख की कमी ने खोली बड़ी गड़बड़ी
मामले का खुलासा तब हुआ, जब सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट से भेजी गई नकदी के मिलान में 4.36 लाख रुपये की कमी पाई गई। करेंसी चेस्ट से करीब 11.50 करोड़ रुपये की नकदी भेजे जाने के बाद रकम में अंतर सामने आया था।
इसके बाद बैंक मुख्यालय की टीम सहारनपुर पहुंची और विस्तृत जांच शुरू की गई। नोटों की एक-एक कर पड़ताल के दौरान करोड़ों रुपये के संदिग्ध जाली नोट मिलने का मामला सामने आया।
कुछ लाख रुपये की कमी की जांच करते-करते मामला अब देश की बैंकिंग व्यवस्था के सामने एक बड़े सवाल के रूप में खड़ा हो गया है—करेंसी चेस्ट तक करोड़ों रुपये के जाली नोट पहुंचे कैसे?
पहले 7.40 करोड़, जांच बढ़ी तो रकम पहुंची करीब 17 करोड़
जांच के शुरुआती चरण में 500 रुपये के नोटों के 148 बंडल संदिग्ध जाली पाए गए थे। प्रत्येक बंडल में एक हजार नोट होने के कारण इनकी कुल कीमत 7.40 करोड़ रुपये आंकी गई।
इसके बाद जब जांच टीम ने करेंसी चेस्ट में जमा नोटों की विस्तृत पड़ताल शुरू की तो संदिग्ध जाली नोटों की संख्या लगातार बढ़ती गई। जांच आगे बढ़ने के साथ इनकी कुल रकम करीब 17 करोड़ रुपये तक पहुंचने کی बात सामने आई है।
हालांकि नोटों की जांच और गिनती अभी जारी है। ऐसे में अंतिम आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
असली नोट निकालकर जाली नोट रखने की आशंका की जांच
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट करेंसी चेस्ट तक पहुंचे कैसे।
इस आशंका की भी जांच की जा रही है कि कहीं असली नोटों को निकालकर उनकी जगह जाली नोट तो नहीं रखे गए। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित हेराफेरी एक बार में की गई या अलग-अलग समय पर नकदी जमा और निकासी की प्रक्रिया के दौरान धीरे-धीरे जाली नोट बैंकिंग सिस्टम में शामिल किए गए।
इस पूरे नेटवर्क और संभावित तरीके की जांच अभी जारी है।
तीन बैंक अधिकारी निलंबित, हाउसकीपर भी हटाया गया
पीएनबी के नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे की शिकायत पर कोतवाली सदर बाजार में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
मामले में जिन तीन बैंक अधिकारियों को निलंबित किया गया है, उनमें—
- मंडल कार्यालय के वरिष्ठ प्रबंधक रवि कुमार कांसे
- सोफिया मार्केट करेंसी चेस्ट के प्रबंधक सुशील शर्मा
- खेरा बाजार, जगाधरी स्थित करेंसी चेस्ट के प्रबंधक अमित कुमार
शामिल हैं।
इसके अलावा करेंसी चेस्ट में नोटों की गड्डियां व्यवस्थित करने वाले पार्ट टाइम हाउसकीपर को भी हटा दिया गया है।
सीसीटीवी फुटेज और बैंक रिकॉर्ड की हो रही जांच
पुलिस और बैंक की जांच टीम करेंसी चेस्ट के अंदर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। नकदी के आने-जाने से जुड़े रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेज और कैश मूवमेंट की पूरी प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि संदिग्ध नोट कब और किन माध्यमों से करेंसी चेस्ट तक पहुंचे। इसके साथ ही उन लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिनकी जिम्मेदारी नकदी की गिनती, रखरखाव और आवाजाही से जुड़ी थी।
डीआईजी, डीएम और एसएसपी ने पहुंचकर जांचा रिकॉर्ड
मामले की गंभीरता को देखते हुए सोमवार को डीआईजी अभिषेक सिंह, डीएम अरविंद कुमार चौहान और एसएसपी अभिनंदन सिंह भी सोफिया मार्केट स्थित पीएनबी करेंसी चेस्ट पहुंचे।
वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर बैंक रिकॉर्ड और जांच की प्रगति की समीक्षा کی। बैंक मुख्यालय की टीम भी नोटों और संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत पड़ताल कर रही है।
हरियाणा, उत्तराखंड और आसपास के इलाकों में तलाश
पुलिस नामजद आरोपियों और मामले से जुड़े अन्य संभावित लोगों की तलाश में हरियाणा, उत्तराखंड और आसपास के जिलों में दबिश दे रही है।
जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि जाली नोट किसी एक स्रोत से आए या अलग-अलग समय पर जमा की गई नकदी के जरिए धीरे-धीरे बैंकिंग सिस्टम में शामिल किए गए।
जांच आगे बढ़ने पर अन्य बैंक अधिकारियों, शाखा प्रबंधकों या नकदी के संचालन से जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
जांच पूरी होने तक करेंसी चेस्ट पर कड़ी निगरानी
मामले के खुलासे के बाद बैंक की आंतरिक जांच और सुरक्षा व्यवस्था भी जांच के दायरे में आ गई है। इतनी बड़ी मात्रा में संदिग्ध जाली नोटों का करेंसी चेस्ट तक पहुंचना केवल नकदी की गिनती या एक स्तर की लापरवाही का सवाल नहीं, बल्कि पूरी निगरानी और सत्यापन व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
अब एसआईटी और बैंक की जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि जाली नोट बैंकिंग सिस्टम में किस स्तर पर शामिल हुए, उन्हें करेंसी चेस्ट तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका रही और क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था।
करीब 17 करोड़ रुपये का आंकड़ा फिलहाल जांच के दौरान सामने आया अनुमानित आंकड़ा है। नोटों की अंतिम जांच और गिनती पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि करेंसी चेस्ट में वास्तव में कितनी रकम के जाली नोट मौजूद थे और इस पूरे मामले के लिए जिम्मेदार कौन है।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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