कपड़ों से कारों तक, गहनों से गैजेट्स तक छूट की बहार, आसान किस्तों का सहारा और छोटे शहरों से उठती खरीदारी की लहर
Article Desk, Taj News | Thursday, October 15, 2026, 08:15:00 AM IST.


त्यौहारी धमाका! बाजारों में रौनक, खरीदारी के नए रिकॉर्ड की आस
जरा दिल्ली, मुंबई के किसी बड़े बाजार का नजारा देखिए। शाम ढलते ही दुकानों की जगमगाती रोशनी आंखों को चौंधिया रही है। कपड़ों के शोरूम में रंग-बिरंगी साड़ियों, डिजाइनर लहंगों और चमचमाते सूटों की बहार है। गहनों की दुकानों में सोना-चांदी दमक रहे हैं। कहीं हीरे की अंगूठियां ग्राहकों को लुभा रही हैं, तो कहीं सोने की चेन पर नजरें टिक गई हैं।
उधर, सड़क के दूसरी ओर कारों के शोरूम सजे हैं। चमचमाती नई गाड़ियां ऐसे खड़ी हैं, मानो ग्राहकों को अपने साथ घर चलने का न्योता दे रही हों। मोटरसाइकिलों के शोरूम में भी भीड़ कम नहीं है। मोबाइल, टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन और दूसरे घरेलू सामानों की दुकानों पर छूट के बड़े-बड़े बोर्ड टंगे हैं। मिठाइयों की खुशबू, दुकानदारों की आवाजें और ग्राहकों की चहल-पहल मिलकर ऐसा समां बांध रहे हैं कि मंदी की चर्चा कुछ देर के लिए तो कोने में दुबक जाती है।
अखबारों के फुल पेज विज्ञापन देखकर लग रहा है कि इस त्यौहारी सीजन में खरीदारी के नए रिकॉर्ड बनेंगे। बाजारों के चेहरे पर चमक देखकर तो यही लगता है।
व्यापारियों के संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का अनुमान है कि नवरात्र से दिवाली तक देश में कारोबार सात लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच सकता है। पिछले साल यह आंकड़ा लगभग 6.05 लाख करोड़ रुपये था। इस बार 15 से 18 प्रतिशत बढ़ोतरी की उम्मीद है।
मगर सवाल यह है कि इस संभावित उछाल के पीछे कौन से पांच कारक काम कर रहे हैं?
महंगाई और खर्चों की मार के बीच भी त्योहारों का आकर्षण कम नहीं हुआ है। कई ग्राहक, जिन्होंने पहले कपड़े, घरेलू सामान या गाड़ी खरीदने का इरादा टाल दिया था, अब खरीदारी के लिए तैयार दिख रहे हैं।
कुछ सर्वेक्षणों के अनुसार, लगभग आधे खरीदार पिछले साल के मुकाबले कम से कम 10 प्रतिशत अधिक खर्च करने की योजना बना रहे हैं। यानी इस बार जेब कुछ ज्यादा ढीली हो सकती है।
कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक सामान, गाड़ियां और जीवनशैली से जुड़ी चीजें खरीदने की मांग बढ़ने की उम्मीद है। दुकानदारों को आस है कि त्योहारों का उत्साह उनके गल्लों में भी बरकत लाएगा।
हालांकि, खरीदने की इच्छा और खरीदने की ताकत में फर्क होता है। बाजार की असली परीक्षा तभी होगी, जब ग्राहक सामान पसंद करने के बाद बिल चुकाने को भी तैयार हों।
इस बार त्योहारों की रौनक लंबे समय तक बाजारों को गुलजार रख सकती है। ओणम से छठ तक फैला त्योहारों का सिलसिला लगभग 80 दिनों का बताया जा रहा है, जबकि पिछले साल यह अवधि करीब 52 दिन थी।
ओणम, गणेश चतुर्थी और नवरात्र के दौरान मिले शुरुआती संकेतों ने कारोबारियों की उम्मीदें बढ़ाई हैं। ऑनलाइन खरीदारी के मंचों पर भी ग्राहकों की आवाजाही बढ़ने की खबरें हैं।
अमेजन के ग्रेट इंडियन फेस्टिवल जैसे बिक्री अभियानों ने भी बाजार में उत्साह बढ़ाया है। शुरुआती आंकड़ों में पिछले साल की तुलना में कुछ श्रेणियों में ऑर्डर दोगुने से अधिक होने की खबरें सामने आई हैं।
लंबा त्योहारों का मौसम दुकानदारों को बिक्री के ज्यादा मौके देता है। ग्राहकों को भी खरीदारी के लिए अधिक समय मिलता है। लेकिन लंबा मौसम अपने आप में ज्यादा बिक्री की गारंटी नहीं है। आखिरकार फैसला ग्राहक की जेब ही करेगी।
कीमतों में राहत मिले तो ग्राहक का दिल भी खरीदारी के लिए मचलने लगता है। जीएसटी में हालिया कटौती और दरों के युक्तिकरण से कुछ श्रेणियों में सामान सस्ता हुआ है। इनमें वाहन और कई उपभोक्ता वस्तुएं शामिल हैं।
इसके साथ ही आसान किस्तों, बैंक ऑफरों और पुराने सामान के बदले नई चीज खरीदने की योजनाओं ने भी ग्राहकों को आकर्षित किया है।
अब नई कार खरीदने के लिए पूरी रकम एक साथ जुटाना जरूरी नहीं। मोबाइल, टीवी और फ्रिज भी किस्तों पर घर लाए जा सकते हैं। खरीदारी के लिए अभी पैसा कम पड़ रहा हो तो कुछ योजनाएं भुगतान को आगे टालने का विकल्प भी देती हैं।
खरीदारी का नक्शा तेजी से बदल रहा है। अब बाजार की धड़कन केवल दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और दूसरे महानगरों में नहीं सुनाई देती। छोटे शहरों और कस्बों में भी ग्राहकों के अरमान कुलांचे भर रहे हैं।
टियर-दो और टियर-तीन शहरों से ऑनलाइन खरीदारी में बड़ी हिस्सेदारी आने की खबरें हैं। कुछ बाजारों में इस कारोबार की बढ़ोतरी 50 प्रतिशत से अधिक बताई गई है। कई रिपोर्टों के अनुसार, त्योहारों के दौरान ऑनलाइन ऑर्डर का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा छोटे शहरों से आ रहा है।
इन शहरों के ग्राहक भी अब महंगे स्मार्टफोन, आधुनिक घरेलू उपकरण, स्मार्ट घड़ियां और आकर्षक घरेलू सजावट का सामान खरीदना चाहते हैं। छोटे शहरों में बड़े ब्रांडों की पहुंच बढ़ी है और ऑनलाइन खरीदारी ने दूरियों को काफी हद तक मिटा दिया है।
क्विक कॉमर्स यानी कुछ ही मिनटों में सामान पहुंचाने वाली सेवाएं भी इस रौनक में अपना हिस्सा जोड़ रही हैं। मिठाई, फल, सजावट का सामान या कोई जरूरी चीज चाहिए, तो मोबाइल पर उंगली घुमाइए और इंतजार कीजिए।
कुछ जरूरी वस्तुओं की महंगाई में नरमी, शहरों में रोजगार और आमदनी के रुझान तथा घरेलू खर्च की बदलती प्राथमिकताएं भी त्योहारों की खरीदारी को सहारा दे सकती हैं।
कुछ परिवार महंगी यात्राओं पर खर्च घटाकर घर की सजावट, नए कपड़ों, घरेलू उपकरणों और पारिवारिक समारोहों पर पैसा लगाना पसंद कर सकते हैं। हवाई किराये, ईंधन की लागत और अनिश्चितता के बीच घर पर त्योहार मनाना कुछ लोगों को बेहतर विकल्प लग सकता है।
हालांकि, ग्रामीण बाजारों की तस्वीर हर जगह एक जैसी नहीं है। कहीं मांग अच्छी है, तो कहीं मानसून के असर और आमदनी की स्थिति ने खरीदारी को प्रभावित किया है। इसलिए पूरे देश में एक जैसी तेजी की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।
त्योहारों की अच्छी बिक्री का असर केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रहता। ज्यादा खरीदारी से परिवहन, गोदामों, पैकेजिंग, होटल, रेस्तरां, पर्यटन, सजावट और ऑनलाइन सामान पहुंचाने वाली सेवाओं को भी काम मिलता है।
जब कंपनियों की बिक्री बढ़ने की उम्मीद मजबूत होती है, तो उनके मुनाफे को लेकर भी बाजार में आशावाद पैदा हो सकता है। इससे शेयर बाजार की धारणा को सहारा मिल सकता है। हालांकि, शेयर बाजार की चाल पर कई दूसरे आर्थिक और वैश्विक कारक भी असर डालते हैं।
कुल मिलाकर, इस दिवाली बाजार में उत्साह की पांच धाराएं मिलकर बह रही हैं। ग्राहकों का भरोसा, लंबे त्योहार, करों में राहत, आसान किस्तें और छोटे शहरों की बढ़ती ताकत कारोबार को नई ऊंचाई दे सकती हैं।
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