Uttar Pradesh Desk, tajnews.in | Monday, April 13, 2026, 03:15:30 PM IST

नोएडा: देश की राजधानी दिल्ली से सटे हाईटेक और औद्योगिक शहर नोएडा (Noida) की सड़कें सोमवार दोपहर अचानक युद्ध के मैदान में तब्दील हो गईं। वेतन वृद्धि (Salary Hike) और काम के घंटों को लेकर पिछले कई दिनों से सुलग रहा श्रमिकों का गुस्सा आज ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा। शहर के प्रमुख औद्योगिक इलाकों में शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ मजदूरों का प्रदर्शन देखते ही देखते एक भयंकर और बेकाबू हिंसा में बदल गया। हजारों की संख्या में सड़कों पर उतरे उग्र श्रमिकों ने भारी बवाल काटते हुए जमकर पत्थरबाजी की और दर्जनों निजी व कंपनी के वाहनों को आग के हवाले कर दिया। आसमान में उठते काले धुएं के गुबार और चारों तरफ मची चीख-पुकार ने पूरे दिल्ली-एनसीआर में भारी दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। उपद्रवियों की इस भीड़ को तितर-बितर करने और हालात पर काबू पाने के लिए नोएडा पुलिस को भारी लाठीचार्ज करना पड़ा और दर्जनों आंसू गैस के गोले दागने पड़े। इस भीषण बवाल के कारण नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे सहित शहर की कई प्रमुख सड़कों पर कई किलोमीटर लंबा और भयंकर ट्रैफिक जाम लग गया है। पीएसी (PAC) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है और धारा 144 लागू कर दी गई है।
शांतिपूर्ण मांग से लेकर खौफनाक आगजनी तक: कैसे बिगड़े हालात?
नोएडा का फेस-2 (Phase-2) और सेक्टर 58, 63 का इलाका देश के सबसे बड़े औद्योगिक हब (Industrial Hub) के रूप में जाना जाता है। यहां हजारों छोटी-बड़ी फैक्टरियां और एक्सपोर्ट कंपनियां स्थित हैं, जहां लाखों की संख्या में मजदूर काम करते हैं। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, बढ़ती महंगाई और पिछले कई सालों से वेतन में कोई वृद्धि न होने के कारण इन मजदूरों के बीच भारी असंतोष पनप रहा था। मजदूर यूनियनों का आरोप है कि फैक्ट्री मालिकों और प्रबंधन द्वारा उनका लगातार आर्थिक शोषण किया जा रहा है। इसी मांग को लेकर सोमवार सुबह हजारों मजदूर अपनी-अपनी फैक्टरियों से बाहर निकल आए और सड़कों पर इकट्ठा होकर प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
शुरुआत में यह प्रदर्शन बिल्कुल शांतिपूर्ण था, लेकिन जैसे ही दोपहर हुई और फैक्ट्री प्रबंधन की तरफ से कोई भी अधिकारी उनसे बात करने या उनकी मांगों पर विचार करने के लिए बाहर नहीं आया, मजदूरों के सब्र का बांध टूट गया। इसी बीच भीड़ में मौजूद कुछ असामाजिक तत्वों ने फैक्टरी के शीशों पर पत्थर मारना शुरू कर दिया। एक पत्थर से शुरू हुई यह घटना कुछ ही मिनटों में एक बेलगाम और खौफनाक दंगे (Riots) में तब्दील हो गई। आक्रोशित भीड़ ने आस-पास खड़ी कंपनी की बसों, अधिकारियों की लग्जरी कारों और कर्मचारियों की मोटरसाइकिलों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। डंडों और सरियों से गाड़ियों के शीशे तोड़े गए और उनमें सरेआम आग लगा दी गई। देखते ही देखते पूरा औद्योगिक इलाका काले धुएं के भयंकर गुबार से ढक गया।
पुलिस टीम पर पथराव, आंसू गैस और लाठीचार्ज से हुआ पलटवार
हिंसा और आगजनी की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन हजारों की उग्र भीड़ के सामने चंद पुलिसकर्मियों की संख्या बिल्कुल नाकाफी साबित हुई। उपद्रवियों ने पुलिस की गाड़ियों को भी अपना निशाना बनाया और उन पर जमकर पथराव किया। भीड़ के इस आक्रामक और हिंसक रूप को देखते हुए पुलिस कमिश्नरेट ने तुरंत अतिरिक्त फोर्स की मांग की। कुछ ही देर में पुलिस लाइन से भारी संख्या में पीएसी (PAC) के जवान, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और कई थानों की फोर्स को दंगा नियंत्रण उपकरणों (Riot Control Gear) के साथ मौके पर उतार दिया गया।
पुलिस ने सबसे पहले लाउडस्पीकर से भीड़ को तितर-बितर होने की चेतावनी दी, लेकिन जब उपद्रवी नहीं माने और आगजनी जारी रखी, तो पुलिस को कड़ा रुख अख्तियार करना पड़ा। पुलिस ने उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए भारी लाठीचार्ज किया और आंसू गैस (Tear Gas) के कई गोले दागे। आंसू गैस के धुएं और पुलिस की लाठियों के डर से भीड़ गलियों और आसपास के सेक्टरों की तरफ भागने लगी। इसी बीच फायर ब्रिगेड (Fire Brigade) की कई दर्जन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और जलते हुए वाहनों की आग बुझाने का काम शुरू किया गया। हालांकि, तब तक करोड़ों रुपये की संपत्ति जलकर राख हो चुकी थी। इस पूरे बवाल में कई पुलिसकर्मियों और मजदूरों को गंभीर चोटें आई हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
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एक्सप्रेसवे पर भयंकर जाम, IT कंपनियों और ऑफिसों में दहशत
नोएडा के औद्योगिक सेक्टरों में हुई इस भारी आगजनी और बवाल का सीधा असर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था और आम जनजीवन पर पड़ा है। जान बचाकर भाग रहे उपद्रवियों और पुलिस की भारी बैरिकेडिंग के कारण नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे (Noida-Greater Noida Expressway) और डीएनडी (DND Flyway) सहित शहर के सभी प्रमुख मार्गों पर कई किलोमीटर लंबा भयंकर जाम लग गया। दोपहर के समय अपने कार्यालयों और कंपनियों में काम कर रहे आईटी (IT) प्रोफेशनल्स और कॉरपोरेट कर्मचारियों में भारी दहशत फैल गई। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) ने एहतियात के तौर पर अपने कार्यालयों के मुख्य द्वार अंदर से बंद कर लिए और कर्मचारियों को जल्दी घर जाने या ‘वर्क फ्रॉम होम’ (Work from Home) करने के निर्देश जारी कर दिए।
सड़कों पर फंसे लोग सोशल मीडिया पर लगातार धू-धू कर जलते वाहनों और पुलिस के लाठीचार्ज के खौफनाक वीडियो साझा कर रहे हैं। जिस नोएडा शहर को अपनी बेहतरीन कानून व्यवस्था और हाईटेक कॉरपोरेट कल्चर के लिए जाना जाता है, वहां दिनदहाड़े इस तरह की संगठित हिंसा ने प्रशासनिक खुफिया तंत्र (Intelligence Failure) की एक बहुत बड़ी नाकामी को भी उजागर कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि जब श्रमिकों का यह असंतोष पिछले कई दिनों से उबल रहा था, तो पुलिस और श्रम विभाग (Labour Department) ने समय रहते इसे शांत करने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया?
प्रशासन का सख्त एक्शन: CCTV से हो रही पहचान, रासुका लगाने की तैयारी
नोएडा के पुलिस कमिश्नर ने हालात का जायजा लेने के बाद मीडिया को बताया कि स्थिति अब पूरी तरह से पुलिस के नियंत्रण में है, लेकिन पूरे औद्योगिक इलाके में भारी तनाव बना हुआ है। किसी भी तरह की अफवाहों और आगे की हिंसा को रोकने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में धारा 144 सख्ती से लागू कर दी गई है। पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसकी आड़ में सरकारी और निजी संपत्ति को जलाना एक गंभीर आपराधिक कृत्य है जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिस की कई टीमें अब फैक्टरियों और सड़कों पर लगे सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को खंगालने में जुट गई हैं। जिन असामाजिक तत्वों ने भीड़ को उकसाया और आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिया, उनके चेहरों की पहचान की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने सख्त चेतावनी दी है कि ऐसे उपद्रवियों के खिलाफ सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) जैसी कठोर धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए जाएंगे और नुकसान की पूरी भरपाई उन्हीं की संपत्तियों को कुर्क करके की जाएगी। इसके साथ ही, जिला प्रशासन ने श्रम विभाग के अधिकारियों और फैक्ट्री मालिकों को तुरंत वार्ता की मेज पर आने का निर्देश दिया है, ताकि मजदूरों की जायज मांगों पर बातचीत कर इस औद्योगिक विवाद को हमेशा के लिए सुलझाया जा सके। फिलहाल, नोएडा की सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है और चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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