ब्रोशर के भरोसे फंसी 5142 करोड़ की ग्रेटर आगरा योजना: न कैंप ऑफिस, न जिम्मेदार कर्मचारी; साइट पर मूलभूत सुविधाओं के अभाव में भटक रहे आवदेक

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Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Friday, 3 July 2026, 12:15:20 PM IST

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आगरा: आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) की अत्यंत महत्वाकांक्षी 5,142 करोड़ रुपये की ‘ग्रेटर आगरा आवासीय योजना’ इस समय प्रशासनिक उदासीनता और लचर व्यवस्था की शिकार बनती दिखाई दे रही है। प्राधिकरण ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बड़े-बड़े दावों के साथ योजना का ऑनलाइन पंजीकरण तो शुरू कर दिया है, लेकिन धरातल पर यानी वास्तविक योजना स्थल पर बुनियादी सुविधाओं और सूचना केंद्रों का घोर अभाव है। करोड़ों रुपये की जीवनभर की पूंजी निवेश करने की इच्छा रखने वाले सैकड़ों आवेदक केवल एक डिजिटल ब्रोशर के भरोसे रहने को मजबूर हैं। योजना स्थल पर न तो कोई कैंप ऑफिस बनाया गया है, न ही कोई साइट कार्यालय मौजूद है। यहाँ तक कि वहां कोई एक भी ऐसा जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारी या सुपरवाइजर तैनात नहीं है, जो मौके पर पहुंचने वाले निवेशकों को भूखंडों की सही स्थिति, नक्शे और दिशा की सटीक जानकारी दे सके।

HIGHLIGHTS
  1. बड़ा निवेश, अधूरी तैयारी: 5,142 करोड़ रुपये की भव्य ग्रेटर आगरा आवासीय योजना में धरातल पर सूचना तंत्र पूरी तरह ठप।
  2. कागजों में टाउनशिप: गंगापुरम और नर्मदापुरम टाउनशिप के तहत 1,629 आवासीय भूखंडों के लिए 29 जून से पंजीकरण प्रक्रिया शुरू।
  3. भटक रहे निवेशक: मौके पर न मॉडल उपलब्ध है और न ही कोई नक्शा, 33 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से बिक रहे हैं प्लॉट।
  4. अधिकारियों का मौन: अव्यवस्थाओं के संदर्भ में एडीए उपाध्यक्ष एम अरुनमौली के कार्यालय से संपर्क साधने का प्रयास रहा विफल।

ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, अटलपुरम के बाद आगरा विकास प्राधिकरण ने इस बेहद चर्चित और विशाल परियोजना को गति देने के लिए बीती 7 अप्रैल को सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इसका डिजिटल भूमिपूजन करवाया था। भूमिपूजन के बाद से ही इस योजना को लेकर रियल एस्टेट बाजार और आम जनता में भारी उत्साह देखा जा रहा था। एडीए प्रशासन ने भी आनंद-फानन में कागजी औपचारिकताएं पूरी करते हुए प्रथम चरण के अंतर्गत गंगापुरम और नर्मदापुरम टाउनशिप के लिए 29 जून से विधिवत रूप से ऑनलाइन पंजीकरण खोल दिया। इन दोनों अत्याधुनिक टाउनशिप में एडीए द्वारा कुल 1,629 आवासीय भूखंड विभिन्न आर्थिक श्रेणियों जैसे एलआईजी (LIG), एमआईजी (MIG) और एचआईजी (HIG) के अंतर्गत जनता के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। इन भूखंडों की आधार दर 33,000 रुपये प्रति वर्गमीटर निर्धारित की गई है, जो कि एक बड़ी धनराशि है।

इतने बड़े पैमाने पर शुरू हुई आवासीय योजना के बावजूद, एडीए प्रशासन धरातल पर व्यवस्था दुरुस्त करना पूरी तरह भूल गया। पंजीकरण प्रक्रिया शुरू होने के कई दिन बीत जाने के बाद भी वास्तविक साइट पर सूचना का एक भी बोर्ड नहीं लगाया गया है। दूर-दराज से और आगरा शहर के विभिन्न कोनों से अपनी जमापूंजी का निवेश करने के इरादे से जब लोग परिवार सहित इन प्रस्तावित टाउनशिप की भूमि को देखने पहुंच रहे हैं, तो उन्हें चारों तरफ केवल सन्नाटा और खाली मैदान दिखाई दे रहा है। बिना तैयारी के शुरू की गई इस प्रक्रिया के कारण मौके पर कोई गाइड या मानचित्र उपलब्ध नहीं है, जिससे यह पता चल सके कि कौन सा ब्लॉक किस दिशा में है, सड़कों की चौड़ाई कितनी होगी, और पार्क, स्कूल, चिकित्सा केंद्र अथवा व्यावसायिक क्षेत्र कहां-कहां प्रस्तावित किए गए हैं।

योजना स्थल पर भटक रहे एक गंभीर आवेदक ने अपना नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि वे अपनी गाढ़ी कमाई के लाखों-करोड़ों रुपये एडीए की इस योजना में लगाने के लिए तैयार हैं। परंतु जब वे साइट पर आए, तो यह बताने वाला भी कोई नहीं मिला कि टाउनशिप का वास्तविक मास्टर प्लान क्या है। इतनी बड़ी आवासीय योजना के अंदर अपने मनपसंद साइज, जैसे कि 100 वर्गमीटर का प्लॉट खोजना और उसकी दिशा का अंदाजा लगाना एक आम नागरिक के लिए अंधेरे में तीर चलाने जैसा है। आवेदकों का कहना है कि अगर एडीए ने साइट पर एक छोटा सा अस्थायी कैंप ऑफिस बनाकर वहां एक मॉडल (प्रतिकृति) और नक्शा रखा होता, तो लोग पूरी पारदर्शिता के साथ अपनी पसंद का भूखंड चुन सकते थे। वर्तमान में उन्हें केवल पीडीएफ ब्रोशर में बने रंग-बिरंगे चित्रों के भरोसे ही लाखों रुपये का दांव खेलने पर मजबूर किया जा रहा है।

इस अव्यवस्था के कारण एडीए के मुख्य प्रशासनिक कार्यालय में भी प्रतिदिन सूचना प्राप्त करने के लिए आवेदकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। वहां भी पटल बाबू और संबंधित लिपिक आवेदकों को संतुष्ट करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। निवेशकों का सीधा सवाल है कि जब करोड़ों की योजना के लिए अरबों रुपये का राजस्व वसूला जा रहा है, तो धरातल पर एक हेल्पडेस्क स्थापित करने में इतनी ढिलाई क्यों बरती गई? जनता के मन में यह संशय लगातार गहरा रहा है कि बिना किसी स्थलीय सत्यापन और स्पष्ट डिमार्केशन के वे किस प्रकार ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें। इस पूरे मामले पर जब एडीए के शीर्ष नेतृत्व यानी उपाध्यक्ष एम अरुनमौली से उनके आधिकारिक कार्यालय के माध्यम से संपर्क साधने और प्राधिकरण का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो वहां से कोई भी संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी और न ही संपर्क स्थापित हो पाया।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

Thakur Pawan Singh

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