Agra News Desk, tajnews.in | 📍आगरा, उत्तर प्रदेश | Saturday, April 4, 2026, 07:35:10 PM IST

आगरा: ताजनगरी आगरा के चिकित्सा इतिहास में आज एक बहुत ही नया और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (SNMC) ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा और चमत्कारिक मुकाम हासिल किया है। दरअसल, कॉलेज के सीटीवीएस (CTVS) विभाग ने पहली बार सफलतापूर्वक ओपन हार्ट सर्जरी करके एक 13 वर्षीय किशोर की जान बचाई है। गौरतलब है कि, यह बहुत ही जटिल और उच्च जोखिम वाला ऑपरेशन आगरा के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ है। इसलिए, मेडिकल कॉलेज के पूरे स्टाफ और आगरा वासियों में भारी खुशी और गर्व का माहौल छा गया है। चूंकि सरकारी अस्पतालों में अमूमन ऐसी महंगी और जटिल सर्जरी की सुविधा बिल्कुल नहीं होती है। नतीजतन, गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों को मजबूरी में दिल्ली या जयपुर के महंगे कॉर्पोरेट अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। हालांकि, एस.एन. मेडिकल कॉलेज की इस अभूतपूर्व सफलता ने अब शहरवासियों के लिए एक बहुत बड़ी और नई उम्मीद जगा दी है।
- ऐतिहासिक सफलता: एस.एन. मेडिकल कॉलेज (SNMC) आगरा में पहली बार एक 13 वर्षीय किशोर की सफल ओपन हार्ट सर्जरी की गई है।
- जटिल और जानलेवा बीमारी: किशोर ‘कांस्ट्रिक्टिव पेरिकार्डिटिस’ से पीड़ित था, जिसमें हार्ट के ऊपर मवाद की बहुत सख्त परत जम गई थी।
- प्रिंसिपल ने दी बधाई: डॉ. प्रशांत गुप्ता ने सीटीवीएस (CTVS) टीम की पीठ थपथपाते हुए इसे संसाधनों और भारी संकल्प की जीत बताया।
- विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम: डॉ. अतुल कुमार गुप्ता के नेतृत्व में एनेस्थीसिया और सर्जिकल टीम ने इस 50% जोखिम वाले ऑपरेशन को सफल बनाया।

एस.एन. मेडिकल कॉलेज का यह एक बड़ा ऐतिहासिक कदम
आगरा का सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज दशकों से ब्रज क्षेत्र के मरीजों की बहुत भारी सेवा कर रहा है। मुख्य रूप से, इस कॉलेज ने हमेशा अपनी बेहतरीन चिकित्सा सुविधाओं से आम जनता का भरोसा जीता है। लेकिन, ओपन हार्ट सर्जरी जैसी अत्यंत जटिल सुविधा का यहाँ हमेशा से ही भारी अभाव रहा था। इसके परिणामस्वरूप, हृदय से जुड़ी गंभीर बीमारियों के मरीजों को मजबूरी में दूसरे बड़े महानगरों का रुख करना पड़ता था।
चूंकि अब मेडिकल कॉलेज के सीटीवीएस (कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी) विभाग ने इस बड़ी कमी को पूरी तरह से दूर कर दिया है। विशेष रूप से, डॉक्टरों की पूरी टीम ने 13 साल के एक मासूम बच्चे का दिल खोलकर उसकी यह जटिल सर्जरी की। नतीजतन, इस सर्जरी की भारी सफलता ने पूरे उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के सामने एक बहुत बड़ी और बेहतरीन मिसाल पेश की है। अंततः, गरीब मरीजों को अब लाखों रुपये खर्च करके निजी अस्पतालों के चक्कर बिल्कुल नहीं काटने पड़ेंगे।
जटिल बीमारी और सर्जरी का बहुत भारी जानलेवा जोखिम
इस मासूम किशोर की बीमारी और उसकी सर्जरी की प्रक्रिया दोनों ही बहुत ज्यादा जटिल और जानलेवा थीं। दरअसल, यह किशोर ‘कांस्ट्रिक्टिव पेरिकार्डिटिस’ (Constrictive Pericarditis) नाम की एक बहुत ही गंभीर और दुर्लभ बीमारी से पीड़ित था। गौरतलब है कि, इस बीमारी में मरीज के हृदय के ऊपर मवाद की एक बहुत ही सख्त और मोटी परत जम जाती है। इसलिए, दिल को धड़कने और खून पंप करने के लिए पर्याप्त जगह बिल्कुल नहीं मिल पाती है।
सीटीवीएस विभाग के प्रोफेसर एवं हेड डॉ. अतुल कुमार गुप्ता ने इस पूरी सर्जरी की तकनीकी चुनौतियों का विस्तार से खुलासा किया। उन्होंने बताया कि धड़कते हुए दिल (Beating Heart) से उस सख्त मवाद की परत को सुरक्षित अलग करना तकनीकी रूप से अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। चूंकि इस प्रक्रिया के दौरान दिल की दीवार फटने का बहुत भारी खतरा बना रहता है। नतीजतन, इस पूरी सर्जरी में मरीज की जान जाने का 50% तक सीधा जोखिम मौजूद था। इसके बावजूद, कॉलेज की साहसी टीम ने इस चुनौती को सफलतापूर्वक पार किया।
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अनुभवी डॉक्टरों और मेडिकल टीम ने किया भारी चमत्कार
इस ऐतिहासिक और जटिल सर्जरी की भारी सफलता के पीछे कई विशेषज्ञ डॉक्टरों की अथक मेहनत पूरी तरह से शामिल है। मुख्य रूप से, डॉ. अतुल कुमार गुप्ता ने इस हाई-रिस्क सर्जिकल टीम का बहुत ही शानदार और सुरक्षित नेतृत्व किया। इसके अलावा, एनेस्थीसिया (बेहोशी) टीम की भूमिका भी इस ऑपरेशन में बहुत ज्यादा नाजुक और अहम थी। डॉ. दीपक और डॉ. मिहिर के विशेष और सतर्क सहयोग से ही इतनी लंबी सर्जरी को सुरक्षित अंजाम दिया गया।
सर्जिकल और ओटी (OT) टीम में डॉ. शिव, डॉ. शुभांशु, डॉ. सुलभ और डॉ. आरती ने मुख्य सर्जन का बहुत ही बेहतरीन तरीके से साथ दिया। इसी बीच, तकनीशियन सचिन और मोनू ने भी ऑपरेशन थिएटर की मशीनों को पूरी तरह से संभाले रखा। हालांकि, सर्जरी के बाद मरीज की जान बचाना एक और भी बड़ी चुनौती होती है। इसलिए, पोस्ट-ऑपरेटिव केयर के दौरान सुपरस्पेशलिटी आईसीयू (ICU) में डॉ. आकांक्षा और डॉ. सौम्या गुप्ता ने लगातार अपनी कड़ी निगरानी रखी। उन्होंने बच्चे को ‘हाई रिस्क’ जोन से बहुत ही सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला।
प्रिंसिपल डॉ. प्रशांत गुप्ता ने दी खास और बड़ी बधाई
मेडिकल कॉलेज की इस अभूतपूर्व उपलब्धि पर पूरे अस्पताल प्रशासन ने भारी जश्न मनाया है। दरअसल, प्रिंसिपल एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने सीटीवीएस टीम को उनकी इस ऐतिहासिक और भारी सफलता पर अपनी खास बधाई दी। गौरतलब है कि, उन्होंने इस जटिल सर्जरी को ‘संसाधनों और मजबूत संकल्प की जीत’ करार दिया है। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि यह एस.एन. मेडिकल कॉलेज के लिए एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव है।
डॉ. प्रशांत गुप्ता ने अपनी बात को विस्तार से बताते हुए कहा कि आज हमारे संस्थान ने वह मुकाम हासिल कर लिया है, जो अब तक केवल बड़े मेट्रो शहरों के कॉर्पोरेट अस्पतालों तक ही सीमित था। चूंकि एक 13 साल के छोटे बच्चे की जान बचाना हमारे डॉक्टरों की भारी काबिलियत का एक सीधा प्रमाण है। नतीजतन, उन्होंने उन सभी मेडिकल स्टाफ और कर्मचारियों की जमकर तारीफ की जिन्होंने दिन-रात एक करके इस ऑपरेशन को सफल बनाया।
सुपर-स्पेशलिटी सेवाओं का नया और बड़ा केंद्र बना आगरा
आगरा का एस.एन. मेडिकल कॉलेज अब खुद को एक पूर्ण और आधुनिक सुपर-स्पेशलिटी केंद्र के रूप में तेजी से विकसित कर रहा है। मुख्य रूप से, प्रिंसिपल डॉ. प्रशांत गुप्ता ने भविष्य की अपनी बड़ी योजनाओं का भी पूरा खुलासा किया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य कॉलेज को सुपर-स्पेशलिटी सेवाओं का एक ऐसा केंद्र बनाना है, जहाँ हर बीमारी का इलाज हो सके।
ताकि आगरा और आसपास के जिलों के किसी भी गरीब मरीज को इलाज के अभाव में दिल्ली या जयपुर की तरफ कभी न भागना पड़े। इसके अलावा, उन्होंने टीम को यह भारी और पक्का आश्वासन भी दिया है। प्रशासन की ओर से सीटीवीएस विभाग को अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और हर संभव ‘अनकंडीशनल सपोर्ट’ लगातार मिलता रहेगा। अंततः, यह पहली ओपन हार्ट सर्जरी आगरा के चिकित्सा जगत के लिए एक बहुत बड़ी और नई उम्मीद की सुनहरी किरण लेकर आई है।
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Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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