अमेरिका का बड़ा प्रहार: ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई पर एक करोड़ डॉलर का इनाम घोषित

Edited by: Pawan Singh | tajnews.in | Agra | 14 Mar 2026, 12:45 AM IST

मुख्य बिंदु

  • अमेरिका ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई पर एक करोड़ डॉलर के बड़े इनाम की घोषणा की है।
  • अमेरिकी विदेश विभाग के ‘रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस’ कार्यक्रम के तहत कई शीर्ष ईरानी कमांडरों को वांटेड घोषित किया गया।
  • यह आक्रामक कदम ईरान की सैन्य और सुरक्षा संरचना (IRGC) के विशाल नेटवर्क को कुचलने के लिए उठाया गया है।
  • मुखबिरों को सुरक्षित संपर्क के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और डार्क वेब ‘टोर’ नेटवर्क की विशेष सुविधा दी गई है।

ताज न्यूज़ (Taj News) की रपट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने का कोई नाम नहीं ले रहा है। बल्कि यह टकराव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुँच चुका है। इसी कड़ी में अमेरिका ने एक बहुत बड़ा और आक्रामक कदम उठाया है। अमेरिका ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। अमेरिकी प्रशासन ने मोजतबा खामेनेई और उनसे जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारियों के बारे में सटीक जानकारी मांगी है। इसके लिए अमेरिका ने अधिकतम एक करोड़ डॉलर (लगभग 83 करोड़ रुपये) तक का भारी इनाम देने की आधिकारिक घोषणा की है। यह घोषणा अमेरिकी विदेश विभाग के चर्चित ‘रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस’ कार्यक्रम के तहत की गई है। पूरी दुनिया इस कदम को ईरान की सैन्य और सुरक्षा संरचना पर भारी दबाव बढ़ाने की एक स्पष्ट कोशिश के रूप में देख रही है।

अमेरिकी विदेश विभाग की ‘डिप्लोमैटिक सिक्योरिटी सर्विस’ ने हाल ही में एक नया बैनर जारी किया है। इस बैनर के माध्यम से उन्होंने उन सभी लोगों की एक लंबी सूची सार्वजनिक की है, जिनके बारे में अमेरिका को खुफिया जानकारी चाहिए। इस वांटेड सूची में मोजतबा खामेनेई का नाम सबसे ऊपर है। इसके अलावा उनके पिता के पूर्व डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ अली असगर हेजाजी का नाम भी इसमें शामिल है। ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी को भी अमेरिका ने इस सूची में जगह दी है। अमेरिका का यह साफ कहना है कि ये सभी लोग ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) से सीधे जुड़े हुए हैं। वे इस खूंखार संगठन के अहम फैसलों और वैश्विक गतिविधियों में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। अमेरिका इन सभी नेताओं को मध्य-पूर्व की अशांति का मुख्य कारण मानता है।

अमेरिका की ओर से जारी इस नई सूची में कई और वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी प्रमुखता से शामिल हैं। इनमें ईरान के सर्वोच्च नेता के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार याह्या रहीम सफावी का नाम है। इसके साथ ही ईरान के मौजूदा गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी भी रडार पर हैं। ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब का नाम भी इस वांटेड सूची में विशेष रूप से बताया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का इस मामले में बहुत कड़ा रुख है। उनका कहना है कि इन सभी लोगों का सीधा संबंध उन खतरनाक नेटवर्क से है, जो आईआरजीसी (IRGC) की आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े माने जाते हैं। अमेरिका का लक्ष्य इस पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंकना है। इसलिए वह इन अधिकारियों के हर छोटे-बड़े कदम की पुख्ता जानकारी जुटाना चाहता है।

अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी बैनर में चार अहम पदों का भी स्पष्ट उल्लेख किया गया है। हालांकि सुरक्षा कारणों से इन पदों पर बैठे लोगों के असली नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इनमें पहला पद ‘सुप्रीम डिफेंस काउंसिल’ के सचिव का है। दूसरा पद सर्वोच्च नेता के ‘सैन्य कार्यालय’ के प्रमुख का शामिल है। तीसरा पद ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) के नए कमांडर-इन-चीफ का है। और चौथा पद ईरान के सर्वोच्च नेता के एक वरिष्ठ सलाहकार का है। अमेरिका का पक्का मानना है कि ये सभी पद भी आईआरजीसी की गैर-कानूनी गतिविधियों से सीधे जुड़े हुए हैं। इसलिए इन पदों पर बैठे अज्ञात अधिकारियों के बारे में भी अमेरिका को पूरी जानकारी चाहिए। अमेरिका इसके लिए कोई भी कीमत चुकाने को पूरी तरह तैयार है।

आखिर अमेरिका ने इन शीर्ष लोगों पर क्या गंभीर आरोप लगाए हैं? अमेरिका का सबसे बड़ा आरोप यह है कि सूची में शामिल ये सभी लोग आईआरजीसी के अलग-अलग हिस्सों को कड़े निर्देश देते हैं। वे दुनिया भर में इसके संचालन में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का यह भी कहना है कि आईआरजीसी दुनिया के कई हिस्सों में गुप्त अभियानों की योजना बनाने में शामिल रहा है। यह संगठन इन हिंसक अभियानों को संगठित करने और उन्हें अंजाम देने में सबसे आगे रहा है। इसी कारण अमेरिका अब इन अधिकारियों और उनके फैले हुए नेटवर्क के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका चाहता है कि वह इनकी वैश्विक फंडिंग और हथियारों की सप्लाई लाइन को पूरी तरह से नष्ट कर दे।

अब सवाल उठता है कि जानकारी देने वाले मुखबिर अमेरिका से सुरक्षित संपर्क कैसे कर सकते हैं? ‘रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस’ कार्यक्रम के अनुसार इसके लिए बहुत सख्त और सुरक्षित इंतज़ाम किए गए हैं। जिन लोगों के पास इन अधिकारियों या आईआरजीसी के वरिष्ठ कमांडरों के बारे में कोई भी खुफिया जानकारी है, वे आगे आ सकते हैं। वे बेहद सुरक्षित माध्यमों से अमेरिकी एजेंसियों से सीधा संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए अमेरिका ने एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का एक विशेष सिस्टम तैयार किया है। इसके अलावा टोर (Tor) नेटवर्क आधारित डार्क वेब संचार प्रणाली का इस्तेमाल करने की सुविधा भी दी गई है। इससे मुखबिर की पहचान पूरी तरह गुप्त रहती है। कार्यक्रम के अनुसार यदि दी गई खुफिया जानकारी सही और उपयोगी साबित होती है, तो सूचना देने वाले को तुरंत अधिकतम एक करोड़ डॉलर तक का भारी इनाम दिया जाएगा। अमेरिका उन्हें पूरी सुरक्षा देने का वादा भी कर रहा है।

यह पूरा मामला एक बहुत बड़ी भू-राजनीतिक उथल-पुथल का सीधा परिणाम है। फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर संयुक्त रूप से बड़े हमले किए थे। उस ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दौरान ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ने सत्ता की कमान अपने हाथों में ले ली। मोजतबा खामेनेई को हमेशा से पर्दे के पीछे काम करने वाला एक बेहद शक्तिशाली रणनीतिकार माना जाता रहा है। वे आईआरजीसी के बहुत करीब हैं। उनके सर्वोच्च नेता बनने के बाद अमेरिका को यह लगने लगा है कि ईरान की नीतियां अब और भी ज्यादा आक्रामक हो सकती हैं। इसलिए अमेरिका ने सत्ता में आते ही मोजतबा खामेनेई को घेरने की यह नई योजना बनाई है। अमेरिका उन्हें आर्थिक और कूटनीतिक रूप से पूरी तरह पंगु कर देना चाहता है।

इस इनाम की घोषणा का समय भी बहुत महत्वपूर्ण है। अमेरिका यह अच्छी तरह जानता है कि ईरान के अंदर भी व्यवस्था के खिलाफ कई विद्रोही गुट मौजूद हैं। अमेरिका इस भारी इनाम के लालच से ईरान के अंदरूनी ढांचे में फूट डालना चाहता है। वह उम्मीद कर रहा है कि सत्ता के लालच या पैसे के लिए कोई करीबी अधिकारी ही मोजतबा खामेनेई के खिलाफ गवाही दे सकता है। यह ‘रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस’ कार्यक्रम पहले भी अल-कायदा और आईएसआईएस के खिलाफ बहुत सफल रहा है। अमेरिका ने इसी कार्यक्रम के ज़रिए दुनिया के कई बड़े आतंकियों का सफलतापूर्वक खात्मा किया है। अब अमेरिका ने इस आज़माए हुए हथियार का इस्तेमाल एक संप्रभु राष्ट्र के सर्वोच्च नेता के खिलाफ किया है। यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बहुत ही आक्रामक और दुर्लभ कदम है।

ईरान ने अमेरिका के इस कदम पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन यह तय है कि इससे तेहरान और वॉशिंगटन के बीच दुश्मनी की आग और भड़केगी। ईरान हमेशा से अमेरिका के ऐसे कदमों को अपने आंतरिक मामलों में सीधा दखल मानता आया है। मध्य-पूर्व के हालात पहले से ही बहुत तनावपूर्ण हैं। गाज़ा में युद्ध जारी है और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाज़ों पर खतरा मंडरा रहा है। इस नई अमेरिकी घोषणा से खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता और भी ज्यादा बढ़ने की पूरी आशंका है। दुनिया भर के राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि ट्रम्प प्रशासन अब ईरान के साथ कोई भी समझौता करने के मूड में नहीं है। उनका एकमात्र लक्ष्य ईरान में सत्ता परिवर्तन करना है। मोजतबा खामेनेई पर यह भारी इनाम इसी बड़े लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में उठाया गया पहला ठोस कदम है। आने वाले दिनों में यह देखना बहुत दिलचस्प होगा कि इस ‘इनामी जंग’ का दुनिया पर क्या व्यापक असर पड़ता है।

Pawan Singh

Pawan Singh

Chief Editor, Taj News

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