फतेहपुर सीकरी का ऐतिहासिक तेरह मोरी बांध जिसे पुनः जल संचय योग्य बनाने की मांग उठी

तेरह मोरी बांध को जल संचय योग्य बनाना समय की जरूरत, फतेहपुर सीकरी में पानी संकट पर सिविल सोसाइटी की रिपोर्ट

आगरा समाचार

Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in | 9 March 2026, 04:05 PM IST

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Agra News Desk

आगरा जनपद के फतेहपुर सीकरी क्षेत्र में बढ़ती जल किल्लत के बीच ऐतिहासिक तेरह मोरी बांध को पुनः जल संचय योग्य बनाने की मांग तेज हो गई है। सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा की टीम ने हाल ही में क्षेत्र का अध्ययन किया और पाया कि यदि इस ऐतिहासिक बांध की मरम्मत कर इसे फिर से कार्यशील बनाया जाए तो न केवल फतेहपुर सीकरी बल्कि आसपास के कई गांवों को पानी की समस्या से राहत मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अकबर कालीन यह जल संरचना आज भी क्षेत्र के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।

HIGHLIGHTS
  1. फतेहपुर सीकरी का ऐतिहासिक तेरह मोरी बांध पिछले 40 वर्षों से निष्प्रयोज्य
  2. सिंचाई विभाग ने गेटों की मरम्मत के लिए अब तक कोई कार्ययोजना नहीं बनाई
  3. बांध चालू होने पर भूजल स्तर सुधरने और किसानों को राहत मिलने की उम्मीद
  4. सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा की टीम ने क्षेत्र का अध्ययन कर उठाई मांग

40 साल से निष्प्रयोज्य पड़ा है ऐतिहासिक बांध

फतेहपुर सीकरी क्षेत्र में स्थित तेरह मोरी बांध कभी इस इलाके की महत्वपूर्ण जल संरचना हुआ करता था। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के प्रबंधन वाला यह बांध जनपद में जल संचय क्षमता के लिहाज से सबसे बड़े बांधों में से एक माना जाता है। लेकिन उपेक्षा और रखरखाव के अभाव में यह पिछले लगभग चार दशकों से निष्प्रयोज्य स्थिति में पड़ा हुआ है।

स्थानीय लोगों के अनुसार बांध के सुलूस गेट (Sluice Gate) क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और उनके ढांचे में भी काफी नुकसान हुआ है। यदि इन गेटों की मरम्मत कर दी जाए तो मानसून के दौरान आने वाले पानी को रोका जा सकता है और बाद में किसानों की जरूरत के अनुसार नियंत्रित रूप से छोड़ा जा सकता है।

सिंचाई विभाग ने नहीं बनाई कोई कार्ययोजना

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सिंचाई विभाग ने अब तक बांध की मरम्मत के लिए कोई ठोस कार्ययोजना तक तैयार नहीं की है। बताया जाता है कि वर्ष 1972 में ओवरफ्लो के दबाव के कारण बांध की दो मोरियां बंद हो गई थीं। इसके बाद उन्हें ठीक करने के बजाय धीरे-धीरे इस जल संरचना को उपेक्षित छोड़ दिया गया।

जब कोई कार्ययोजना ही तैयार नहीं की गई है तो शासन से धन स्वीकृति या मरम्मत कार्य शुरू होने का सवाल ही नहीं उठता। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन इस दिशा में पहल करे तो यह बांध फिर से क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी संरचना बन सकता है।

भूजल स्तर सुधारने में मिल सकती है मदद

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेरह मोरी बांध को फिर से जल संचय योग्य बना दिया जाए तो इससे पूरे क्षेत्र के भूजल स्तर में सुधार आ सकता है। मानसून के दौरान बड़ी मात्रा में पानी इस बांध तक पहुंचता है, लेकिन गेट खराब होने के कारण पानी रुक नहीं पाता और बहकर निकल जाता है।

यदि इस पानी को रोका जाए तो आसपास के गांवों के कुओं और ट्यूबवेल का जलस्तर भी सुधर सकता है। इसके साथ ही गर्मियों के दौरान राजस्थान की ओर से आने वाली धूल भरी हवाओं के प्रभाव को भी कम किया जा सकता है।

टीटीजेड क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण

तेरह मोरी बांध का सूखा रहना ताज ट्रिपेजियम जोन (TTZ) के पर्यावरण के लिए भी चिंता का विषय है। जब बांध सूखा रहता है तो राजस्थान की ओर से आने वाली हवाएं बड़ी मात्रा में धूल और सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (SPM) लेकर आती हैं।

इनमें PM10 और PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण होते हैं जो वातावरण को प्रदूषित करते हैं और स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। यदि बांध में पानी भरा रहे तो इससे स्थानीय जलवायु संतुलन में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

स्थानीय नागरिकों की मांग

क्षेत्र के निवासी और किसान अमरनाथ पाराशर का कहना है कि फतेहपुर सीकरी की स्थलाकृति ढलान वाली है, जिसके कारण शहर का अधिकांश वर्षा जल स्वाभाविक रूप से तेरह मोरी बांध में पहुंचता है। इसके अलावा आसपास की पहाड़ियों से आने वाली जलधाराएं भी इसी बांध में मिलती हैं।

पत्रकार महावीर वर्मा के अनुसार यदि इस बांध को फिर से कार्यशील बना दिया जाए तो इससे न केवल भूजल रिचार्ज होगा बल्कि खारी नदी में भी पानी का प्रवाह बढ़ेगा, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा।

अकबर कालीन जल संरचना का ऐतिहासिक महत्व

तेरह मोरी बांध का इतिहास मुगल सम्राट अकबर के समय से जुड़ा हुआ है। उस दौर में इसे एक विशाल कृत्रिम झील और जल नियंत्रण प्रणाली के रूप में विकसित किया गया था। यह झील लगभग 32 किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई थी और फतेहपुर सीकरी शहर के लिए मुख्य जल स्रोत का काम करती थी।

इतिहासकारों के अनुसार इस झील का उपयोग न केवल पानी की आपूर्ति के लिए बल्कि किले की सुरक्षा के लिए भी किया जाता था। झील की प्राकृतिक स्थिति के कारण किले की उत्तरी दिशा में दीवार बनाने की आवश्यकता भी नहीं पड़ी थी।

सिविल सोसाइटी की टीम ने किया अध्ययन

सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा की टीम ने हाल ही में फतेहपुर सीकरी क्षेत्र का दौरा कर तेरह मोरी बांध की स्थिति का अध्ययन किया। इस टीम में अनिल शर्मा, राजीव सक्सेना, राजेंद्र शुक्ला और असलम सलीमी शामिल थे।

टीम का मानना है कि यदि सरकार और सिंचाई विभाग मिलकर इस ऐतिहासिक जल संरचना के पुनर्जीवन की दिशा में कदम उठाएं तो इससे फतेहपुर सीकरी क्षेत्र में जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Thakur Pawan Singh

Editor in Chief, Taj News

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