Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in | 07 March 2026, 09:30 pm IST
Taj News National Desk
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नई दिल्ली (New Delhi): राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान देश की राजनीति में एक बहुत बड़ा और भारी मुद्दा बन गया है। दरअसल, पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं। ताज न्यूज़ (Taj News) की नेशनल डेस्क के अनुसार, पीएम मोदी इस घटना पर बहुत बुरी तरह भड़क गए हैं। इसके परिणामस्वरूप, उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर अपना तीखा और कड़ा प्रहार किया है। अतः, ममता बनर्जी राष्ट्रपति के स्वागत के लिए एयरपोर्ट पर बिल्कुल नहीं पहुंची थीं। इसलिए, प्रधानमंत्री ने इसे देश की गरिमा के खिलाफ एक बहुत बड़ी और गहरी साजिश बताया है। अंततः, देश भर में इस शर्मनाक घटना की बहुत ही भारी आलोचना लगातार हो रही है。
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान देश की जनता को पहुंचा रहा है भारी दुख
मुख्य रूप से, पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी भारी नाराजगी जताई है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि देश की जनता के मन में बहुत ही गहरा और भारी दुख है। दूसरी ओर, स्वयं आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति जी ने अपनी गहरी पीड़ा साफ व्यक्त की है। अतः, पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने प्रोटोकॉल की अपनी सारी हदें पूरी तरह पार कर दी हैं। इसलिए, प्रशासन इस भारी और शर्मनाक लापरवाही के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार है। अंततः, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान किसी भी कीमत पर बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा。
पश्चिम बंगाल सरकार संथाल संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय को ले रही है बहुत हल्के में
दरअसल, प्रधानमंत्री ने टीएमसी सरकार की खराब और गंदी नीयत पर अपना बड़ा सवाल उठाया है। इसके परिणामस्वरूप, उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार संथाल संस्कृति को बहुत लापरवाही से ले रही है। साथ ही, यह रवैया हमारे देश और समाज के लिए बहुत ही ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण है। अतः, राष्ट्रपति का सबसे बड़ा पद देश की राजनीति से हमेशा ऊपर होता है। इसलिए, इस सर्वोच्च पद की गरिमा का सम्मान हर हाल में पूरी तरह होना चाहिए। अंततः, ममता सरकार ने इस गरिमा को बहुत ही गहरी और भारी ठेस पहुंचाई है。
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान करने के लिए प्रशासन ने जानबूझकर बदला अपना कार्यक्रम
मुख्य रूप से, राष्ट्रपति मुर्मू दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी में एक बड़े सम्मेलन में सीधा पहुंची थीं। इसके अलावा, उन्होंने बिधाननगर में नौवें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन का शानदार उद्घाटन किया। दूसरी ओर, पहले यह बड़ा कार्यक्रम किसी और बड़ी जगह पर पूरी तरह तय था। अतः, प्रशासन ने बाद में सम्मेलन के इस तय स्थान में अपना अचानक और भारी बदलाव कर दिया। इसलिए, राष्ट्रपति ने प्रशासन के इस गलत कदम पर अपनी बहुत गहरी नाराजगी जाहिर की है। अंततः, यह बदलाव राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान करने की एक सोची-समझी साजिश लग रहा है。
सम्मेलन के लिए प्रशासन ने चुनी एक बहुत ही ज्यादा दूर और छोटी जगह
दरअसल, राष्ट्रपति ने अपने कड़े भाषण में प्रशासन को बहुत ही बुरी तरह से लताड़ा है। इसके परिणामस्वरूप, उन्होंने कहा कि पहले से तय स्थान पर यह आयोजन बहुत बेहतर होता। साथ ही, वह पुरानी जगह काफी बड़ी थी जिससे ज्यादा लोग वहां आसानी से पहुंच पाते। अतः, प्रशासन ने एक बहुत ही अजीब और छोटी जगह को इस सम्मेलन के लिए चुना। इसलिए, राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे नहीं पता प्रशासन के मन में आखिर क्या गंदा चल रहा था। अंततः, ऐसी दूर जगह पर गरीब संथाल लोग बिल्कुल भी नहीं जा सकते थे。
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान देखकर लोगों में फैल गया बहुत भारी और गहरा रोष
मुख्य रूप से, राष्ट्रपति ने इस पूरी घटना पर अपना बहुत ही गहरा दुख सीधे व्यक्त किया। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि मुझे बहुत भारी दुख है कि लोग यहां बिल्कुल नहीं पहुंच पाए। दूसरी ओर, यह आयोजन शहर से बहुत दूर एक सुनसान इलाके में जानबूझकर किया गया था। अतः, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान देश के हर सच्चे नागरिक को अंदर तक रुला रहा है। इसलिए, शायद प्रशासन को उम्मीद थी कि यहां कोई भी आदिवासी बिल्कुल नहीं आ पाएगा। अंततः, वे चाहते थे कि राष्ट्रपति बिना किसी से मिले वहां से खाली हाथ वापस चली जाएं。
ममता बनर्जी एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति को रिसीव करने के लिए बिल्कुल नहीं पहुंचीं
दरअसल, राष्ट्रपति ने प्रोटोकॉल टूटने पर अपना बहुत ही सीधा और कड़ा दर्द साफ बयां किया। इसके परिणामस्वरूप, उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रपति आती हैं तो मुख्यमंत्री को जरूर आना चाहिए। साथ ही, राज्य के मंत्रियों को भी प्रोटोकॉल के तहत वहां पूरी तरह मौजूद रहना चाहिए। अतः, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति के स्वागत में बिल्कुल नहीं आईं। इसलिए, यह एक बहुत ही बड़ा और सीधा राजनीतिक बहिष्कार पूरी तरह माना जा रहा है। अंततः, प्रशासन ने भी इस मामले में अपनी बहुत ही भारी और अजीब चुप्पी साध ली है。
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान करने वाली ममता बनर्जी को राष्ट्रपति ने बताया छोटी बहन
मुख्य रूप से, राष्ट्रपति ने अपने बड़े और साफ दिल का एक बहुत ही शानदार परिचय दिया। इसके अलावा, उन्होंने भरे मंच से कहा कि मैं भी बंगाल की एक सच्ची और अच्छी बेटी हूं। दूसरी ओर, उन्होंने ममता बनर्जी को अपनी एक प्यारी और छोटी बहन बताया। अतः, उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि वह मुझसे आखिर क्यों इतनी ज्यादा नाराज थीं। इसलिए, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान ममता बनर्जी की बहुत ही छोटी सोच को साफ दर्शाता है। अंततः, देश की राजनीति में यह दिन एक बहुत ही काले पन्ने के रूप में हमेशा दर्ज रहेगा。
आदिवासी समाज के अपमान पर भारतीय जनता पार्टी ने शुरू किया अपना बहुत भारी विरोध
दरअसल, इस शर्मनाक घटना के बाद पूरी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना भारी मोर्चा खोल दिया है। इसके परिणामस्वरूप, भाजपा के नेता टीएमसी सरकार पर बहुत ही जोरदार और कड़ा हमला बोल रहे हैं। साथ ही, वे इसे पूरे आदिवासी समाज का एक बहुत बड़ा और सीधा अपमान बता रहे हैं। अतः, आदिवासी समुदाय के लोग भी ममता सरकार से बहुत ही ज्यादा और बुरी तरह खफा हैं। इसलिए, आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में बहुत भारी उबाल आसानी से देखने को मिलेगा। अंततः, टीएमसी को इस भारी गलती की एक बहुत बड़ी और कड़ी कीमत जरूर चुकानी पड़ेगी。
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान भारत के लोकतांत्रिक ढांचे पर है बहुत बड़ा प्रहार
मुख्य रूप से, राष्ट्रपति भारत के लोकतांत्रिक ढांचे का सबसे ऊंचा और बड़ा प्रतीक होती हैं। इसके अलावा, उनका अपमान करना सीधे भारत के शानदार संविधान का भारी अपमान करना है। दूसरी ओर, टीएमसी सरकार अपनी भारी राजनीतिक दुश्मनी में सभी मर्यादाएं बहुत आसानी से भूल गई है। अतः, देश के कानून और संविधान के जानकारों ने भी इस घटना की बहुत कड़ी निंदा की है। इसलिए, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान देश के संघीय ढांचे के लिए एक बहुत भारी खतरा है। अंततः, केंद्र सरकार इस मामले में राज्य सरकार से अपना एक कड़ा और सीधा जवाब जरूर मांगेगी。
ताज न्यूज़ की अपील: राजनीति से हमेशा ऊपर रखें देश के सर्वोच्च और बड़े पदों की गरिमा
दरअसल, ताज न्यूज़ सभी राजनीतिक दलों से अपनी एक बहुत ही खास और अहम अपील करता है। इसके परिणामस्वरूप, हमें अपने देश के सर्वोच्च पदों की गरिमा हमेशा और पूरी तरह बनाकर रखनी चाहिए। साथ ही, राजनीतिक दुश्मनी कभी भी देश के शानदार प्रोटोकॉल से बिल्कुल बड़ी नहीं हो सकती है। अतः, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान जैसे शर्मनाक वाकये भविष्य में बिल्कुल भी नहीं होने चाहिए। इसलिए, सभी नागरिकों को अपने राष्ट्रपति का हमेशा पूरा और सच्चा सम्मान जरूर करना चाहिए। अंततः, एक मजबूत लोकतंत्र हमेशा अपने कड़े और अच्छे संस्कारों से ही महान बनता है。
Thakur Pawan Singh
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