राम मंदिर ट्रस्ट की महाबैठक में बड़ा फैसला: चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार, आगामी 22 जुलाई को फिर होगी बैठक

खबर शेयर कीजिए

uttar pradesh desk, 🌐 tajnews.in | Monday, 06 July, 2026, 11:10:45 PM IST.

Taj News Logo
Taj News
uttar pradesh desk

tajnews.in | अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को हुई अति महत्वपूर्ण और अभूतपूर्व महाबैठक में प्रशासनिक स्तर पर अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। रामधन (चढ़ावा) चोरी के बहुचर्चित विवाद के बीच आहूत की गई इस तीन घंटे लंबी बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और वरिष्ठ सदस्य अनिल मिश्रा द्वारा विधिक व नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए दिए गए इस्तीफों को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया है। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में परिसर के भीतर हुई इस ऐतिहासिक बैठक के बाद कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज ने एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि ट्रस्ट आगामी 22 जुलाई 2026 को एक बार फिर बड़ी बैठक करने जा रहा है। इस आगामी बैठक में विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम और विस्तृत रिपोर्ट पर गहन विधिक मंथन किया जाएगा और मंदिर के रिक्त पड़े सांगठनिक पदों को भरने के लिए अतिरिक्त ट्रस्टियों की अधिकारिक नियुक्ति पर अंतिम मोहर लगाई जाएगी।

HIGHLIGHTS
  1. इस्तीफे स्वीकार: महाघोटाले के साए में घिरे महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का त्यागपत्र आधिकारिक रूप से मंजूर।
  2. अंतरिम कमान: ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य कृष्ण मोहन को अतिरिक्त दायित्व सौंपते हुए अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया।
  3. अगली तारीख तय: विशेष जांच दल की अंतिम रिपोर्ट पर विधिक विचार-विमर्श और नए ट्रस्टियों की नियुक्ति के लिए 22 जुलाई को बुलाई गई महाबैठक।
  4. चढ़ावा रिकॉर्ड सुरक्षित: कोषाध्यक्ष ने गायब आभूषणों के दावों को खारिज करते हुए 2800 मूल्यवान वस्तुओं के रजिस्टर और कुछ नमूनों को सार्वजनिक तौर पर दिखाया।

अयोध्या राम Janmabhoomi परिसर के प्रशासनिक भवन में सोमवार दोपहर ठीक 3:15 बजे शुरू हुई इस हाई-प्रोफाइल बैठक में ट्रस्ट के कुल 14 सदस्यों में से अधिकांश प्रत्यक्ष और कुछ डिजिटल माध्यम से सम्मिलित हुए। बैठक के विधिक निष्कर्षों की जानकारी देते हुए स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज ने स्पष्ट किया कि जब किसी पदाधिकारी द्वारा स्वयं अपनी इच्छा से इस्तीफा सौंप दिया जाता है, तो ट्रस्ट के संविधान के नियमों के अनुसार उसे स्वीकार करने के अतिरिक्त कोई विधिक विकल्प शेष नहीं रह जाता। चंपत राय द्वारा राम मंदिर आंदोलन के शुरुआती दिनों से लेकर अब तक दी गई अभूतपूर्व और त्यागपूर्ण सेवाओं की ट्रस्ट ने भूरि-भूरि प्रशंसा की। उनके इस साहसिक निर्णय का सम्मान करते हुए विधिक रूप से उनका इस्तीफा मंजूर किया गया और प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए वरिष्ठ सदस्य कृष्ण मोहन को अग्रिम आदेशों तक अंतरिम महासचिव का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया है। चंपत राय और अनिल मिश्रा स्वयं इस सांगठनिक बैठक में उपस्थित नहीं हुए थे।

कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने रामलला के दरबार में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए स्वर्ण आभूषणों और बहुमूल्य उपहारों के गायब होने के विपक्ष और सोशल मीडिया के सभी दावों को पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन करार दिया। उन्होंने मीडिया के कैमरों के सामने वह मुख्य रजिस्टर प्रस्तुत किया, जिसमें मंदिर के खजाने में मौजूद कुल 2800 मूल्यवान वस्तुओं का एक-एक बिंदुवार लिखित ब्योरा विधिक रूप से दर्ज है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आभूषण कोठरी की सभी संपत्तियां पूरी तरह से अक्षुण्ण और सुरक्षित हैं। चर्चा के केंद्र में रही पांच विशिष्ट मूल्यवान उपहार वस्तुओं को वे स्वयं साक्ष्य और नमूने के रूप में बैठक में प्रदर्शित करने के लिए लेकर आए थे। उन्होंने रामभक्तों को आश्वस्त किया कि भविष्य में दान और गणना प्रबंधन की प्रणालियों को इतना अभेद्य, पारदर्शी और डिजिटल बनाया जा रहा है कि कोई भी अराजक तत्व व्यवस्था में रत्ती भर भी खोट या लूपहोल नहीं ढूंढ पाएगा।

ट्रस्ट ने इस रपट के माध्यम से कानून व्यवस्था और राज्य सरकार की एजेंसियों के प्रति अपनी अटूट विधा प्रदर्शित की है। स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज ने बेहद कड़े लहजे में कहा कि ‘चोरी तो चोरी है’, चाहे वह लघु स्तर पर हुई हो या विशाल स्तर पर, इसे किसी भी विधिक समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता। ट्रस्ट प्रशासनिक अधिकारियों और राज्य पुलिस द्वारा गठित की गई विशेष जांच दल (SIT) की विधिक कार्रवाई का पूरी तरह समर्थन करता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस महाघोटाले के पर्दे के पीछे छिपे जितने भी मुख्य अपराधी, सह-अपराधी या मास्टरमाइंड अभी तक कानून की गिरफ्त से बाहर हैं, उन्हें सर्विलांस और साक्ष्यों के आधार पर अविलंब गिरफ्तार कर न्यायालय के माध्यम से कठोरतम वैधानिक दंड दिलाया जाए।

आगामी विधिक रोडमैप का खुलासा करते हुए ट्रस्ट ने बताया कि 22 जुलाई 2026 को होने वाली अगली महाबैठक बेहद निर्णायक सिद्ध होगी। जांच कर रही एसआईटी (SIT) को शासन द्वारा जो समय विस्तार दिया गया था, उसके अनुसार 22 तारीख तक उनकी अंतिम और संपूर्ण फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी जाएगी। इसी रिपोर्ट के विधिक निष्कर्षों के आधार पर मंदिर के भविष्य के स्थाई प्रबंधन, एक स्वतंत्र मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की तैनाती और उपाध्यक्ष व रिक्त सांगठनिक पदों पर अतिरिक्त योग्य ट्रस्टियों की नियुक्ति के विधिक प्रस्तावों को हरी झंडी दी जाएगी। बहरहाल, आज के इन बड़े प्रशासनिक फैसलों ने यह साफ कर दिया है कि राम मंदिर की साख और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए प्रबंधन अब किसी भी स्तर पर विधिक समझौता करने के मूड में नहीं है।

यह भी पढ़ें

इतिहास का वो अद्भुत स्वाद: कैसे चाट, गोल गप्पे बने भारत की सबसे लोकतांत्रिक डिश | बृज खंडेलवाल पासपोर्ट है, नागरिकता नहीं! भारतीय पहचान का नया गणित | वरिष्ठ पत्रकार बृज खंडेलवाल का प्रहार काफी हुआ है, बहुत बाकी है! चमकते एक्सप्रेसवे, जर्जर इंसाफ़: क्या सिर्फ़ सड़कें विकसित होने से देश विकसित होता है? | बृज खंडेलवाल सुप्रीम कोर्ट ने पैदल चलने को मौलिक अधिकार बनाया, अब परीक्षा आगरा की है | बृज खंडेलवाल का विशेष विश्लेषण “जनता मालिक, प्रतिनिधि सेवक: लोकतंत्र में वास्तविक VIP कौन?” | डॉ प्रमोद कुमार का विशेष विश्लेषण
Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

Thakur Pawan Singh

Chief Editor, Taj News


खबर शेयर कीजिए

Leave a Comment