National Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Saturday, 30 May 2026, 09:12:15 PM IST
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के वीआईपी और पॉश रिहायशी इलाकों में शुमार दक्षिण दिल्ली के साकेत क्षेत्र से शनिवार देर शाम एक बेहद भयावह और रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा सामने आया है। यहाँ एक रिहायशी मकान अचानक ताश के पत्तों की तरह भरभराकर जमींदोज हो गया। मकान के अचानक गिरने से समूचे साकेत इलाके में भयंकर अफरा-तफरी, चीख-पुकार और दहशत का माहौल पैदा हो गया है। स्थानीय चश्मदीदों के अनुसार, जब यह बहुमंजिला ढांचा गिरा तो तेज धमाके के साथ चारों तरफ धूल का विशाल गुबार छा गया। इस भीषण मलबे के भीतर कई परिवारों के तमाम निर्दोष लोगों और घरेलू सहायकों के मलबे में दबे होने की गंभीर आशंका जताई जा रही है। घटना की भयावहता को देखते हुए दिल्ली अग्निशमन सेवा, स्थानीय जिला पुलिस, आपदा प्रबंधन की टीमें और एम्बुलेंस राहत व बचाव कार्य के लिए मौके पर पहुँच चुकी हैं और मलबे को हटाने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है।
कंट्रोल रूम से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दिल्ली अग्निशमन सेवा (दिल्ली फायर सर्विस) को शनिवार शाम करीब 07:44 बजे साकेत के जे-ब्लॉक स्थित इस आवासीय भवन के गिरने की पहली आपातकालीन सूचना प्राप्त हुई थी। कॉल मिलते ही दमकल मुख्यालय ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तत्काल अत्याधुनिक उपकरणों से लैस चार बड़ी दमकल गाड़ियों और वरिष्ठ रेस्क्यू कमांडरों को घटना स्थल के लिए रवाना कर दिया। शनिवार की छुट्टी होने के कारण और शाम के समय स्थानीय बाजारों व गलियों में चहल-पहल होने की वजह से शुरुआत में राहत कर्मियों को तंग रास्तों से गुजरने में हल्की कठिनाई का सामना करना पड़ा। परंतु स्थानीय पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए घटना स्थल की ओर जाने वाले सभी मुख्य मार्गों पर बैरिकेडिंग कर ग्रीन कॉरिडोर तैयार कराया, जिससे बचाव दल समय रहते मलबे के पास पहुँचने में कामयाब रहा।
घटना स्थल पर मौजूद हमारे विशेष संवाददाता ने बताया कि कंक्रीट और लोहे के भारी सरियों का मलबा इतना विशाल है कि बिना भारी मशीनों के उसे हटाना पूरी तरह असंभव है। दमकल कर्मियों के साथ-साथ स्थानीय आपदा प्रबंधन बल और नागरिक सुरक्षा की टीमें गैस कटर, हाइड्रोलिक जैक और खोजी कैमरों की मदद से लेंटर के भारी हिस्सों को काटकर भीतर फंसे जीवन को तलाशने का अथक प्रयास कर रही हैं। स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि रिहायशी इलाकों में लगातार हो रहे अवैध निर्माण या पुरानी जर्जर इमारतों की समय पर मरम्मत न होने के कारण ऐसे जानलेवा हादसे राजधानी में लगातार आम होते जा रहे हैं।
दिल्ली अग्निशमन सेवा के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने मीडिया को ब्रीफिंग देते हुए बताया कि चूंकि यह घटना शनिवार की देर शाम घटित हुई है, जब अधिकांश लोग अपने घरों में मौजूद रहते हैं, इसलिए मलबे के भीतर फंसे लोगों की सही संख्या का सटीक अनुमान लगाना अभी जल्दबाजी होगी। फिलहाल प्रशासन और दिल्ली पुलिस का संपूर्ण ध्यान राजनीति या अन्य तकनीकी जांच को पीछे छोड़कर केवल और केवल मलबे के नीचे दबी बेशकीमती मानव जिंदगियों को सुरक्षित और जीवित बाहर निकालने पर केंद्रित है। मलबे के नीचे से कुछ दबी हुई आवाजें और हलचल महसूस होने के बाद रेस्क्यू टीमों ने कंक्रीट तोड़ने वाली कटर मशीनों की गति बढ़ा दी है। डॉक्टरों की एक विशेष टीम कई एम्बुलेंस लाइफ सपोर्ट सिस्टम के साथ मौके पर तैनात है, ताकि जैसे ही किसी को बाहर निकाला जाए, उसे तुरंत प्राथमिक उपचार देकर साकेत स्थित मैक्स अस्पताल या पास के एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया जा सके।
इस भयानक ढहाव की खबर मिलते ही आस-पास के सैकड़ों स्थानीय नागरिकों और पीड़ित परिवारों के सगे-संबंधियों की भारी भीड़ घटना स्थल पर एकत्र हो गई है, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन को सुचारू रूप से चलाने में सुरक्षा बलों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त जवानों और अर्धसैनिक बलों की एक टुकड़ी को भीड़ नियंत्रित करने और साकेत की कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात किया गया है। दक्षिण जिला प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा इलाका बेहद संवेदनशील है और मलबे को पूरी तरह से साफ करने और रेस्क्यू ऑपरेशन को तार्किक अंजाम तक पहुँचाने में कम से कम पूरी रात का समय लग सकता है। बचाव अभियान पूरी तरह समाप्त होने और विशेषज्ञों की तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद ही इस हादसे के असली कारणों, कुल विधिक नुकसान और हताहतों की सही और प्रामाणिक जानकारी आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक की जा सकेगी।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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