Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Tuesday, 26 May 2026, 12:15:10 PM IST

Agra Nagar Nigam Torrent Power Protest के अंतर्गत ताजनगरी के मलिन और उपेक्षित क्षेत्रों के नागरिकों ने स्थानीय नगर निगम प्रशासन और निजी बिजली कंपनी टोरेंट पावर की सांठगांठ के खिलाफ सोमवार को एक बेहद उग्र मोर्चा खोल दिया। क्षेत्र के काजीपाड़ा और कोटली बगीची इलाके के सैकड़ों आक्रोशित निवासी हाथों में प्रशासनिक जनविरोधी नीतियों के खिलाफ लिखी तख्तियां लेकर नगर निगम मुख्यालय पहुंचे और मुख्य द्वार का पूरी तरह घेराव कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नगर निगम द्वारा टोरेंट पावर के 431 करोड़ रुपये के कड़े बकाये और विधिक दावों को एक झटके में पूरी तरह माफ कर दिया गया, जबकि स्थानीय बस्तियों में बुनियादी सड़कों, सीवर और शुद्ध पेयजल की विधाओं को धरातल पर उतारने के लिए बजट का लगातार रोना रोया जा रहा है। प्रदर्शन की उग्रता को देखते हुए सुरक्षा ग्रिड को कड़ा किया गया और गेट पर भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रही डॉ. आंबेडकर अनुयायी एकता फाउंडेशन ने प्रशासन को विधिक चेतावनी दी है कि यदि बुधवार तक उनकी मांगों पर धरातलीय कार्रवाई शुरू नहीं हुई, तो वे मुख्यालय के मुख्य द्वार पर ही अनिश्चितकालीन अनशन और धरने पर बैठने के लिए पूरी तरह बाध्य होंगे।
टोरेंट पर करोड़ों की वित्तीय मेहरबानी और बस्तियों में उफनता सीवर, जन आक्रोश से दहला निगम मुख्यालय
विस्तृत धरातलीय विवरण के अनुसार, आगरा के थाना जगदीशपुरा और लोहामंडी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले काजीपाड़ा और कोटली बगीची क्षेत्र की स्थिति पिछले लंबे समय से पूरी तरह से नारकीय बनी हुई है। इन बस्तियों के नागरिकों का धैर्य सोमवार सुबह उस समय पूरी तरह टूट गया, जब उन्हें सूचना मिली कि एक ओर नगर निगम ने निजी विद्युत प्रदाता कंपनी टोरेंट पावर को 431 करोड़ रुपये की अभूतपूर्व और संदेहास्पद वित्तीय छूट प्रदान कर दी है, वहीं दूसरी ओर उनके टैक्स के पैसों के बावजूद उनके क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण बजट के अभाव में लटका पड़ा है। इसी कड़वे आक्रोश के चलते सैकड़ों महिलाएं और पुरुष अपने हाथों में “टोरेंट पर मेहरबानी, बस्तियों में नरक पानी” जैसे तीखे स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर नगर निगम कार्यालय परिसर पहुंचे।
प्रदर्शनकारियों ने जैसे ही नगर निगम के मुख्य प्रशासनिक गेट के भीतर प्रवेश करने का प्रयास किया, वहां तैनात सुरक्षा गार्डों और पुलिस अमले ने उन्हें कड़ाई से बाहर ही रोक दिया। इसके बाद जनता का आक्रोश चरम पर पहुंच गया और वे गेट के सामने ही पक्की सड़क पर धरने पर बैठ गए। आंदोलनकारियों ने आगरा की मेयर हेमलता दिवाकर के खिलाफ तीखी नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों का कड़ा तर्क था कि जो नगर निगम टैक्स न चुकाने पर आम गरीब नागरिकों की संपत्तियों को कुर्क करने की विधिक विधा अपनाता है, वही निगम प्रशासन एक बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी पर आखिर किस विधिक आधार पर इतना दयावान बना हुआ है।
तीन वर्षों से मिल रहा केवल कोरा आश्वासन, बुनियादी एस्टीमेट तैयार न होने से नागरिकों में कड़ा रोष परिलक्षित
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉ. आंबेडकर अनुयायी एकता फाउंडेशन के वरिष्ठ पदाधिकारी आशीष प्रिंस ने कलेक्ट्रेट और प्रशासनिक सर्किल को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि काजीपाड़ा और माहौर समाज की बगीची के लोग पिछले तीन वर्षों से जलभराव और जर्जर सड़कों की मार झेल रहे हैं। इस अवधि में स्थानीय पार्षदों से लेकर नगर आयुक्त तक को दर्जनों बार लिखित विधिक शिकायतें प्रेषित की गईं, किंतु हर बार जनता को केवल कोरा और खोखला आश्वासन ही प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि मंगलवार तक यदि संबंधित अभियंता और जोनल अधिकारियों द्वारा क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर बुनियादी सड़कों का पक्का वित्तीय एस्टीमेट तैयार नहीं किया गया, तो बुधवार से यह शांत आंदोलन एक उग्र धरने में तब्दील हो जाएगा।
फाउंडेशन के मुख्य प्रवक्ता राहुल वरुण ने अपने संबोधन में कहा कि कोटली बगीची में घरों के ठीक सामने सड़कें पूरी तरह टूट चुकी हैं और सीवर का गंदा पानी चौबीसों घंटे भरा रहता है। इस दूषित वातावरण के कारण क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों का प्रकोप कड़े स्तर पर पैर पसार रहा है, जिससे छोटे बच्चों और बुजुर्गों का जीवन पूरी तरह खतरे में पड़ गया है। जगदीशपुरा और लोहामंडी के अन्य हिस्सों से आए नागरिकों ने भी इस विधिक लापरवाही पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि निगम की इस वित्तीय मेहरबानी की उच्च स्तरीय जांच की जानी बेहद अनिवार्य है।
आंदोलनकारियों ने घेरा प्रशासनिक सुरक्षा ग्रिड, अगली विधिक रणनीति पर प्रबुद्ध नागरिकों की पैनी नजर
प्रदर्शन के दौरान नगर निगम परिसर का प्रशासनिक सुरक्षा ग्रिड पूरी तरह से हिल गया। घंटों चले इस कड़े हंगामे के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर आकर प्रदर्शनकारियों से मांग पत्र लिया और त्वरित कार्रवाई का विधिक आश्वासन दिया। हालांकि, नागरिक इस बार किसी भी खोखले आश्वासन पर शांत होने के मूड में परिलक्षित नहीं हुए। इस ऐतिहासिक घेराव प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से विवेक बौद्ध, नितिन सोनी, रोहित सोनी, नरेंद्र बौद्ध, बलदेव सिंह, शाकिर अली, जयंती देवी, माया देवी, रोहन माथुर और चंद्रा देवी सहित सैकड़ों की संख्या में स्थानीय गणमान्य नागरिक और महिलाएं पूरी कड़वाहट के साथ उपस्थित रहीं।
पिन्हाट और बाह क्षेत्र के विधिक जानकारों का मानना है कि टोरेंट पावर के 431 करोड़ रुपये के दावे को माफ करने का यह प्रशासनिक निर्णय आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति का मुख्य केंद्र बिंदु बनेगा। आम जनता अब इस बात को लेकर कड़ाई से लामबंद हो रही है कि उनके बुनियादी अधिकारों की अनदेखी कर कॉर्पोरेट घरानों को किस विधा के तहत लाभ पहुंचाया जा रहा है। ताज न्यूज़ की खोजी विंग इस पूरे वित्तीय प्रकरण, नगर निगम की आंतरिक फाइलों और बुधवार को होने वाले संभावित धरने की प्रत्येक बारीक सांगठनिक गतिविधि पर अपनी पैनी खोजी नजर बनाए हुए है।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, [tajnews.in](https://tajnews.in)
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