Agra Desk, tajnews.in | Tuesday, April 21, 2026, 09:45:30 PM IST

आगरा: ताजनगरी आगरा में दो अलग-अलग विचारधाराओं और प्रतीकों के टकराव ने एक हंसते-खेलते परिवार को गहरे मातम में धकेल दिया है। 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती के अवसर पर आवास विकास कॉलोनी स्थित ‘परशुराम चौक’ पर जूते-चप्पल पहनकर चढ़ने और वहां नीला झंडा लगाने के मामले ने अब एक बेहद दुखद और खौफनाक मोड़ ले लिया है। इस मामले में पुलिस की कड़ी कार्रवाई और घर पर हुई दबिश की दहशत से एक 16 वर्षीय नामजद किशोर की मां की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। मृतक महिला के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पुलिस ने घर में घुसकर बेटे को सामने लाने का भारी दबाव बनाया था, जिससे महिला गहरे सदमे में चली गई और अंततः सोमवार शाम को हार्ट अटैक (हृदयाघात) से उसकी जान चली गई। इस घटना के बाद से भीम नगर और जगदीशपुरा इलाके में भारी तनाव और आक्रोश का माहौल है। वहीं, पुलिस प्रशासन ने परिजनों के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि पुलिस केवल वायरल वीडियो के आधार पर रूटीन पूछताछ के लिए गई थी और किसी भी प्रकार का कोई अनुचित दबाव नहीं बनाया गया था। इस एक घटना ने शहर की कानून व्यवस्था, सामाजिक ताने-बाने और पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
14 अप्रैल का वो घटनाक्रम: जब परशुराम चौक पर हुआ था टकराव
इस पूरे विवाद की जड़ 14 अप्रैल 2026 के उस घटनाक्रम में छिपी है, जब पूरे देश में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही थी। आगरा की आवास विकास कॉलोनी में जयंती के जुलूस के दौरान कुछ अति-उत्साहित युवक ‘परशुराम चौक’ पर जूते-चप्पल पहनकर चढ़ गए। इतना ही नहीं, उन्होंने वहां भगवान परशुराम की प्रतिमा के पास अपना ‘नीला झंडा’ (Blue Flag) भी लगा दिया। इस कृत्य का एक वीडियो किसी ने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो गया।
इस घटना और वायरल वीडियो ने शहर के ब्राह्मण संगठनों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया। संगठनों ने इसे अपनी धार्मिक भावनाओं का सीधा अपमान बताते हुए सड़कों पर उतरकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। शहर के बिगड़ते सांप्रदायिक और जातीय सौहार्द को देखते हुए थाना सिकंदरा पुलिस ने तुरंत संज्ञान लिया और अज्ञात युवकों के खिलाफ अपनी ओर से गंभीर धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली। पुलिस के आला अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया था कि शहर का माहौल बिगाड़ने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस का कड़ा एक्शन: चार गिरफ्तार, वीडियो से हुई पहचान
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने वायरल वीडियो का तकनीकी विश्लेषण शुरू किया। साइबर सेल और लोकल इंटेलिजेंस (Local Intelligence) की मदद से वीडियो में नजर आ रहे युवकों की पहचान की गई। पुलिस ने शनिवार को ताबड़तोड़ दबिश देते हुए जगदीशपुरा इलाके के रहने वाले चार मुख्य आरोपियों— दक्ष कर्दम, प्रशांत निगम, शिवम और पुष्पेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। इन सभी आरोपियों को एसीपी कोर्ट में पेश करने के बाद सीधे जेल भेज दिया गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन चार आरोपियों से जब पुलिस रिमांड के दौरान कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उन्होंने घटना में शामिल अपने कई अन्य साथियों के नाम भी उगल दिए। इन्हीं नामों में से एक नाम उस 16 वर्षीय किशोर का भी सामने आया, जो वायरल वीडियो में परशुराम चौक के पास संदिग्ध रूप से दिखाई दे रहा था। इस किशोर का नाम सामने आते ही पुलिस की एक विशेष टीम उसकी गिरफ्तारी या उससे पूछताछ के लिए सक्रिय हो गई। यहीं से इस मामले ने एक नया और दुखद मोड़ लेना शुरू किया, जिसने एक मां की जिंदगी छीन ली।
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17 अप्रैल की वो पुलिस दबिश: जब घर में छा गई दहशत
मृतक महिला दुर्गेश के पिता विशंभर (निवासी जगदीशपुरा) ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उनकी बेटी दुर्गेश अपने परिवार के साथ भीम नगर इलाके में किराए के मकान में रह रही थी। 17 अप्रैल को थाना सिकंदरा पुलिस की एक टीम उनके घर दबिश देने पहुंची। पुलिसकर्मियों ने दुर्गेश को बताया कि उसके 16 वर्षीय बेटे का नाम परशुराम चौक विवाद में सामने आया है। जिस समय पुलिस घर पहुंची, वह किशोर घर पर मौजूद नहीं था।
परिजनों का आरोप है कि पुलिस लगभग 2 घंटे तक घर में डेरा डाले रही और किशोर के आने का इंतजार करती रही। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने दुर्गेश और परिवार के अन्य सदस्यों पर बेटे को तुरंत सामने लाने और पुलिस के हवाले करने का भारी मानसिक दबाव बनाया। अचानक घर में पुलिस की भारी मौजूदगी, पुलिस की सख्त भाषा और अपने 16 साल के नाबालिग बेटे के जेल जाने की बात सुनकर दुर्गेश पूरी तरह से दहशत में आ गई। एक आम और गरीब परिवार के लिए पुलिस का घर पर आना ही किसी बड़े सदमे (Psychological Shock) से कम नहीं होता। जब पुलिस को किशोर नहीं मिला, तो वे हिदायत देकर वहां से लौट गए, लेकिन पीछे छोड़ गए एक ऐसा खौफ जिसने दुर्गेश को अंदर तक तोड़ दिया।
खौफ ने ली जान: अन्न-जल त्यागने के बाद हार्ट अटैक से मौत
पुलिस के जाने के बाद दुर्गेश की हालत बिगड़ने लगी। मोहल्ले के ही चार अन्य युवकों (दक्ष, प्रशांत, शिवम और पुष्पेंद्र) की गिरफ्तारी और उन्हें जेल भेजे जाने की खबर ने उसके खौफ को और भी पुख्ता कर दिया था। उसे यह डर सताने लगा कि पुलिस उसके बेटे को भी पकड़ लेगी और उसका भविष्य बर्बाद हो जाएगा। इस अनजाने खौफ और मानसिक तनाव (Mental Stress) के चलते दुर्गेश ने खाना-पीना पूरी तरह से छोड़ दिया। उसकी गिरती सेहत को देखकर परिजन उसे एक स्थानीय अस्पताल लेकर गए, जहां चिकित्सकों ने उसे प्राथमिक उपचार देकर घर भेज दिया, लेकिन उसके दिलो-दिमाग से पुलिस का डर नहीं निकला।
तीन दिन तक भूखे-प्यासे और लगातार खौफ में रहने के कारण सोमवार दोपहर को दुर्गेश की हालत अचानक बेहद गंभीर हो गई। बदहवास परिजन उसे लेकर तुरंत नजदीकी अस्पताल दौड़े, लेकिन उसकी बिगड़ती नब्ज को देखते हुए वहां के डॉक्टरों ने उसे मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। जब परिजन उसे लेकर एसएन मेडिकल कॉलेज (SN Medical College) की इमरजेंसी में पहुंचे, तो जांच के बाद वरिष्ठ चिकित्सकों ने दुर्गेश को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने बताया कि अत्यधिक तनाव के कारण उसे एक गंभीर हार्ट अटैक (Cardiac Arrest) आया था। दुर्गेश की मौत की खबर सुनते ही परिजनों और मोहल्ले के लोगों में भारी चीख-पुकार मच गई। पिता विशंभर ने रोते हुए आरोप लगाया कि अगर पुलिस ने उनके निर्दोष नाती के लिए इतना दबाव नहीं बनाया होता, तो आज उनकी बेटी जिंदा होती। इस मौत ने इलाके में व्याप्त तनाव को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है।
पुलिस का स्पष्टीकरण: “दबाव का आरोप पूरी तरह से निराधार”
महिला की मौत के बाद जब पुलिस प्रशासन पर उंगलियां उठने लगीं और इलाके का माहौल गरमाने लगा, तो आगरा पुलिस कमिश्नरेट के आला अधिकारियों को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। आगरा सिटी के पुलिस उपायुक्त (DCP City) सय्यद अली अब्बास ने पुलिस का पक्ष मजबूती से रखते हुए परिजनों के सभी आरोपों का खंडन किया है।
डीसीपी सय्यद अली अब्बास ने स्पष्ट किया कि, “पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला की मृत्यु का कारण स्पष्ट रूप से ‘हार्ट अटैक’ आया है। जेल भेजे गए आरोपियों से पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ में इस महिला के बेटे का नाम सामने आया था और वह उस वायरल वीडियो में भी नजर आ रहा था। इसी पुख्ता आधार पर पुलिस की टीम केवल सामान्य पूछताछ के लिए उनके घर पहुंची थी। जब लड़का घर पर नहीं मिला, तो पुलिस की टीम बिना किसी को परेशान किए वापस लौट आई थी। परिजनों द्वारा लगाया गया किसी भी तरह का मानसिक या शारीरिक दबाव बनाने का आरोप पूरी तरह से गलत और निराधार है।” पुलिस का कहना है कि वे केवल कानून के दायरे में रहकर अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि पुलिस की कार्यप्रणाली और दबिश का तरीका आम नागरिकों के लिए कितना डरावना हो सकता है, विशेषकर उन परिवारों के लिए जिनका पहले कभी पुलिस से वास्ता न पड़ा हो। फिलहाल इलाके में एहतियातन पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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