National Desk, tajnews.in | Monday, April 20, 2026, 09:30:30 AM IST

जैसलमेर/मोहनगढ़: भारतीय समाज में दादा-दादी और पोते-पोतियों का रिश्ता दुनिया के सबसे पवित्र, निस्वार्थ और प्यार भरे रिश्तों में गिना जाता है। बुजुर्गों के लिए उनके नाती-पोते बुढ़ापे की लाठी और आंखों का तारा होते हैं। लेकिन, राजस्थान के सीमावर्ती और शांत जिले जैसलमेर (Jaisalmer) से एक ऐसी हृदयविदारक और रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने इस पवित्र रिश्ते को खून से लहूलुहान कर दिया है। जिले के मोहनगढ़ (Mohangarh) कस्बे में चंद रुपयों और जेवरातों के लालच में अंधे होकर एक कलयुगी पोते ने अपने ही बुजुर्ग और असहाय दादा-दादी की गला दबाकर निर्मम हत्या कर दी। इस जघन्य दोहरे हत्याकांड (Double Murder) ने पूरे जैसलमेर को सन्न कर दिया है। हत्यारे ने लूटपाट की इस खौफनाक साजिश को अपने एक अन्य साथी के साथ मिलकर अंजाम दिया, ताकि पुलिस को गुमराह कर इसे डकैती का रूप दिया जा सके। लेकिन, स्थानीय पुलिस की मुस्तैदी और वैज्ञानिक जांच ने कातिल के मंसूबों पर पानी फेर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की विशेष टीमों ने घेराबंदी की और मात्र कुछ ही घंटों की सघन तफ्तीश के बाद आरोपी पोते और उसके साथी को गिरफ्तार कर लिया। इस घटना ने समाज में तेजी से गिरते नैतिक मूल्यों और पैसों की अंधी दौड़ के खौफनाक अंजाम को एक बार फिर हमारे सामने लाकर खड़ा कर दिया है।
सोमवार की सुबह: शांत कस्बे में बिछीं दो लाशें और मची चीख-पुकार
जैसलमेर का मोहनगढ़ इलाका आमतौर पर अपनी शांति और सादगी भरे ग्रामीण जीवन के लिए जाना जाता है। सोमवार, 20 अप्रैल 2026 की सुबह इस कस्बे के लिए एक काला अध्याय लेकर आई। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, जब सुबह काफी देर तक बुजुर्ग दंपती के घर का दरवाजा नहीं खुला और अंदर से कोई आहट नहीं आई, तो पड़ोसियों को किसी अनहोनी की आशंका हुई। बुजुर्गों की उम्र और उनके अकेलेपन को देखते हुए कुछ पड़ोसियों ने दीवार फांद कर या खिड़की से घर के अंदर झांकने की कोशिश की। अंदर का नजारा इतना खौफनाक था कि देखने वालों के होश उड़ गए और उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
घर के मुख्य कमरे में फर्श पर बुजुर्ग दादा और दादी के बेजान शव पड़े हुए थे। घर का सारा सामान, कपड़े, अलमारियां और संदूक बुरी तरह से बिखरे हुए थे, जो चीख-चीख कर यह गवाही दे रहे थे कि रात के अंधेरे में वहां लूटपाट का एक भयानक तांडव हुआ है। घबराए हुए पड़ोसियों ने तुरंत गांव के सरपंच और स्थानीय मोहनगढ़ थाना पुलिस को इस दोहरे हत्याकांड की सूचना दी। दो बुजुर्गों की इस तरह से निर्मम हत्या की खबर पूरे कस्बे में जंगल की आग की तरह फैल गई। कुछ ही देर में पीड़ित परिवार के घर के बाहर सैकड़ों ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था और पूरा माहौल चीख-पुकार से गूंज उठा।
गला घोंटकर ली गई जान, डकैती का रचा गया था नाटक
दोहरे हत्याकांड की संगीन सूचना मिलते ही जैसलमेर के पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देश पर मोहनगढ़ थाने की पुलिस फोर्स, स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और डॉग स्क्वॉड (Dog Squad) की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गईं। पुलिस ने भीड़ को हटाकर पूरे घर को पीले टेप से सील कर दिया ताकि कातिलों द्वारा छोड़े गए सुरागों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके। फोरेंसिक विशेषज्ञों (Forensic Experts) की टीम ने घटनास्थल का बहुत बारीकी से मुआयना किया। पुलिस की प्रारंभिक जांच और शवों की स्थिति को देखकर यह स्पष्ट हो गया कि दोनों बुजुर्गों की हत्या गला दबाकर (Strangulation) की गई है। बुजुर्ग होने के कारण वे हत्यारों का ज्यादा विरोध नहीं कर सके और चंद मिनटों में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
पुलिस अधिकारियों ने देखा कि घर की अलमारियों के ताले टूटे हुए थे और सारा कीमती सामान व जेवरात गायब थे। पहली नजर में यह मामला किसी पेशेवर गिरोह द्वारा की गई लूटपाट और डकैती का लग रहा था। लेकिन पुलिस की पैनी नजरों से कुछ ऐसे सुराग भी नहीं बचे, जो इस बात की ओर इशारा कर रहे थे कि घर में दाखिल होने के लिए किसी बाहरी दरवाजे या खिड़की को नहीं तोड़ा गया था। इसका सीधा मतलब था कि हत्यारा घर के रास्तों से भली-भांति वाकिफ था और उसे बुजुर्ग दंपती ने खुद दरवाजा खोलकर अंदर आने दिया होगा, या फिर वह घर का ही कोई सदस्य था। इसी ‘इनसाइडर थ्योरी’ (Insider Theory) ने पुलिस की जांच की दिशा को पूरी तरह से बदल दिया।
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कुछ ही घंटों में पुलिस का खुलासा: ऐसे पकड़ा गया कलयुगी पोता
पुलिस ने अपनी जांच को घर के सदस्यों और रिश्तेदारों पर केंद्रित कर दिया। पुलिस ने परिवार के सभी सदस्यों से अलग-अलग पूछताछ शुरू की। इसी दौरान पुलिस को मृत बुजुर्गों के एक पोते की गतिविधियों और उसके बयानों में भारी विरोधाभास नजर आया। वह घटना के समय अपनी लोकेशन को लेकर बार-बार पुलिस को गुमराह करने की कोशिश कर रहा था और उसके चेहरे पर एक अजीब सी घबराहट साफ दिखाई दे रही थी। इसके अलावा, पुलिस ने जब आसपास के कुछ गुप्त सीसीटीवी कैमरों (CCTV Cameras) की फुटेज खंगाली और मोबाइल की कॉल डिटेल (Call Detail Records – CDR) निकाली, तो उस पोते की रात के समय घर के आसपास मौजूदगी पूरी तरह से पुख्ता हो गई।
सबूतों के आधार पर पुलिस ने पोते को हिरासत में ले लिया और जब उससे मनोवैज्ञानिक तरीके (Psychological Interrogation) से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो वह ज्यादा देर तक अपना राज नहीं छिपा सका और टूट गया। उसने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि उसे पैसों की सख्त जरूरत थी और वह जानता था कि उसके दादा-दादी के पास घर में अच्छी खासी नकदी और पुश्तैनी जेवरात रखे हुए हैं। जब उसने सीधे पैसे मांगे और बुजुर्गों ने मना कर दिया, तो उसने अपने एक बाहरी दोस्त (Accomplice) के साथ मिलकर इस खौफनाक साजिश को अंजाम दिया। रात के सन्नाटे में वे दोनों घर में घुसे, बुजुर्गों की बेरहमी से गला दबाकर हत्या की, सारा कीमती सामान समेटा और पुलिस को चकमा देने के लिए घर का सारा सामान अस्त-व्यस्त कर वहां से फरार हो गए। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हत्या में शामिल उस दूसरे आरोपी दोस्त को भी गिरफ्तार कर लिया है और उनके पास से लूटा गया माल भी बरामद कर लिया है।
लालच और गिरते नैतिक मूल्यों की डरावनी तस्वीर
मोहनगढ़ का यह दोहरा हत्याकांड कोई साधारण अपराध नहीं है; यह हमारे समाज की उस गहरी और काली सच्चाई को उजागर करता है जहां पैसों की हवस (Greed for Money) खून के रिश्तों से कहीं ज्यादा बड़ी हो गई है। एक पोता, जिसे अपने दादा-दादी की सेवा और देखभाल करनी चाहिए थी, वह चंद रुपयों और भौतिक सुख-सुविधाओं की खातिर उसी गोद को खून से रंग देता है जिसने उसे बचपन में पाला-पोसा था। यह घटना तेजी से बदलते पारिवारिक ढांचे, युवाओं में बढ़ती नशे की लत, सट्टेबाजी और ‘शॉर्टकट’ से अमीर बनने की उस खतरनाक मानसिकता का परिणाम है, जो युवाओं को हैवान बना रही है।
आज के दौर में जब बुजुर्ग अपने ही घरों में अपने ही खून से सुरक्षित नहीं हैं, तो यह समाज के बुद्धिजीवियों और कानून निर्माताओं के लिए एक बहुत बड़ा चिंता का विषय है। पुलिस ने महज कुछ ही घंटों में हत्यारों को गिरफ्तार कर अपनी काबिलियत का बेहतरीन सुबूत तो दे दिया है, लेकिन मोहनगढ़ के लोगों के दिलों में जो डर और अविश्वास की भावना पैदा हुई है, उसे मिटने में सालों लग जाएंगे। अब स्थानीय नागरिक और पीड़ित परिवार के अन्य सदस्य प्रशासन से यह मांग कर रहे हैं कि इस कलयुगी पोते और उसके साथी को फास्ट-ट्रैक कोर्ट (Fast-Track Court) के जरिए जल्द से जल्द फांसी की सजा दिलाई जाए, ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए और भविष्य में कोई भी अपने जन्मदाताओं के साथ ऐसा क्रूर और अमानवीय कृत्य करने की हिम्मत न कर सके।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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