Agra Desk, tajnews.in | Wednesday, April 15, 2026, 01:33:30 PM IST

आगरा: भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर आगरा के सरोजिनी नायडू (एस.एन.) मेडिकल कॉलेज में एक बेहद भव्य और गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में संकाय सदस्यों, मेडिकल विद्यार्थियों और अस्पताल के कर्मचारियों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ अपनी भागीदारी दर्ज कराई। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्वलन और डॉ. अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर वक्ताओं ने बाबा साहेब के अदम्य संघर्षों और समाज को दी गई उनकी अमूल्य देन पर गहराई से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय के जो आदर्श डॉ. अंबेडकर ने स्थापित किए थे, वे आज के समय में भी पूरी तरह से प्रासंगिक हैं। हमें उनके सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का निरंतर प्रयास करना चाहिए।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति और वैचारिक विमर्श
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में चिकित्सा जगत के कई वरिष्ठ अधिकारी और चिकित्सक शामिल हुए। मंच पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में उप-प्राचार्य डॉ. टी.पी. सिंह, एसआईसी डॉ. ब्रजेश शर्मा, डॉ. एस.के. कठेरिया और सांस्कृतिक समिति की अध्यक्ष डॉ. दिव्या श्रीवास्तव मुख्य रूप से मौजूद रहे। इस कार्यक्रम का उत्कृष्ट आयोजन एसोसिएट प्रोफेसर (अस्थि रोग विभाग) डॉ. के.एस. दिनकर और प्रोफेसर (मेडिसिन विभाग) डॉ. आशीष गौतम द्वारा सांस्कृतिक समिति के विशेष सहयोग से किया गया था।
आयोजन के दौरान कई ज्ञानवर्धक सत्र चले, जिनमें बाबा साहेब के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। डॉ. एस.के. कठेरिया ने उपस्थित लोगों के सामने डॉ. अंबेडकर के जीवन का एक बहुत ही प्रेरणादायक और संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया। वहीं दूसरी ओर, नेत्र विज्ञान विभाग की अध्यक्षा डॉ. स्निग्धा सेन ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में डॉ. अंबेडकर के दृष्टिकोण और उनके अहम योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। शिशु रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. नीरज यादव ने संविधान के अनुच्छेद 340 के ऐतिहासिक महत्व को बहुत ही सरल शब्दों में समझाया। इसके अलावा, रेडियोथेरेपी विभागाध्यक्ष डॉ. आर्या ने भी बाबा साहेब के जीवन मूल्यों पर अपना सारगर्भित वक्तव्य दिया।
महिला सशक्तिकरण और संघर्षपूर्ण जीवन पर डाला गया प्रकाश
डॉ. अंबेडकर ने हमेशा महिलाओं को समाज में समान अधिकार दिलाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था। इसी संदर्भ में, डॉ. दिव्या श्रीवास्तव ने महिला सशक्तिकरण में बाबा साहेब की ऐतिहासिक भूमिका को बहुत ही प्रमुखता से रेखांकित किया। एसआईसी डॉ. ब्रजेश शर्मा ने उनके संघर्षपूर्ण जीवन की कहानी साझा की और बताया कि कैसे उन्होंने तमाम बाधाओं को पार करके देश का संविधान रचा। उप-प्राचार्य डॉ. टी.पी. सिंह ने एक बहुत ही व्यावहारिक बात कहते हुए जोर दिया कि ‘कर्म हमेशा शब्दों से अधिक प्रभावी होते हैं।’ उन्होंने सभी मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों को बाबा साहेब के आदर्शों को केवल पढ़ने के बजाय अपने पेशेवर जीवन में उतारने का कड़ा संदेश दिया।
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सफल संचालन और समानता का अंतिम संकल्प
कार्यक्रम को और भी अधिक रोचक बनाने के लिए डॉ. के.एस. दिनकर ने डॉ. अंबेडकर की प्रसिद्ध आत्मकथात्मक पुस्तक “वेटिंग फॉर ए वीजा” (Waiting for a Visa) से कुछ बेहद प्रेरणादायक प्रसंग साझा किए। इन प्रसंगों ने उपस्थित सभी लोगों के दिलों को गहराई से छू लिया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में डॉ. आशीष गौतम ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। गौरतलब है कि, इस पूरे शानदार कार्यक्रम का सुचारू संचालन एमबीबीएस 2023 बैच के प्रतिभावान विद्यार्थियों द्वारा किया गया।
इस गरिमामय अवसर पर चिकित्सा महाविद्यालय के कई अन्य प्रमुख संकाय सदस्य भी मौजूद रहे। इनमें डॉ. सांगार, डॉ. कामना, डॉ. उर्वशी, डॉ. सूर्यकमल, डॉ. हरेंद्र, डॉ. रेखा और डॉ. राजीव पुरी प्रमुख रूप से उपस्थित थे। इसके साथ ही, बड़ी संख्या में स्नातक और स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं तथा अस्पताल के स्टाफ ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अंततः, यह कार्यक्रम डॉ. अंबेडकर के मूल आदर्शों— समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय— को समाज में और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाने के एक बहुत ही दृढ़ संकल्प के साथ संपन्न हुआ।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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