भारतीय ज्ञान परंपरा पर सेमिनार में मुख्यमंत्री ने कहा- भारत की बौद्धिक विरासत को प्रमाणों के साथ दुनिया के सामने रखने और आधुनिक तकनीक से नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत
उत्तर प्रदेश डेस्क | 🌐 tajnews.in | 25 सितंबर 2026 | 02:58 बजे

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित ‘भारतीय ज्ञान परंपरा का वर्तमान परिप्रेक्ष्य’ विषयक सेमिनार में भारत की प्राचीन ज्ञान, संस्कृति और बौद्धिक विरासत पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत पर हुए विदेशी आक्रमणों का उद्देश्य केवल यहां की संपत्ति और वैभव को लूटना नहीं था, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा और बौद्धिक विरासत को कमजोर करना भी था।
महमूद गजनवी के सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण का उदाहरण देते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब गजनवी मंदिर को गिराने पहुंचा तो पुजारियों ने मंदिर और मूर्ति को नुकसान न पहुंचाने की अपील की तथा इसके बदले सोना और आभूषण देने की पेशकश की। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि गजनवी ने इसे ठुकराते हुए स्पष्ट किया था कि उसका उद्देश्य केवल लूट करना नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा को नष्ट करना था। यह प्रसंग मुख्यमंत्री द्वारा अपने भाषण में प्रस्तुत ऐतिहासिक विवरण के रूप में सामने आया है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की पहचान केवल प्राकृतिक संसाधनों या भौतिक संपदा से नहीं रही, बल्कि उसकी बड़ी शक्ति उसकी ज्ञान परंपरा रही है। उन्होंने भारत की प्राचीन बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत को विश्वगुरु के रूप में स्थापित होने के संदर्भ से जोड़ा।
- योगी आदित्यनाथ ने सोमनाथ मंदिर और महमूद गजनवी के प्रसंग का उल्लेख किया।
- मुख्यमंत्री ने भारत की ज्ञान परंपरा को प्रमाणों के साथ दुनिया के सामने रखने पर जोर दिया।
- आधुनिक तकनीक के जरिए नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान विरासत से जोड़ने की बात कही।
- गोरखनाथ मंदिर में आयोजित सेमिनार पुण्यतिथि समारोह की श्रृंखला का हिस्सा था।
गजनवी के प्रसंग से ज्ञान परंपरा पर जोर
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत के मंदिर और ज्ञान केंद्र केवल धार्मिक आस्था के स्थल नहीं थे, बल्कि वे समाज की सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा से भी जुड़े हुए थे। उनके अनुसार, भारत की ज्ञान धरोहर को कमजोर करने के प्रयास इतिहास के अलग-अलग कालखंडों में हुए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत को उसकी ज्ञान परंपरा के कारण प्राचीन समय में विश्वगुरु के रूप में पहचान मिली। उन्होंने तक्षशिला और नालंदा जैसे प्राचीन ज्ञान केंद्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में ज्ञान को केवल साक्षरता या पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं माना गया था।
रामायण काल से विदेशी आक्रमणों तक का संदर्भ
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में रामायण काल के दंडकारण्य में ऋषियों के आश्रमों पर हमलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा पर संकट अलग-अलग कालखंडों में अलग-अलग रूपों में आया।
इसके बाद उन्होंने मध्यकालीन विदेशी आक्रमणों और सोमनाथ मंदिर का संदर्भ देते हुए कहा कि भारत के मंदिर केवल धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं थे, बल्कि वे सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा से भी जुड़े हुए थे।
ब्रिटिश काल में तरीका बदला: योगी
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान भारत की परंपराओं को कमजोर करने का तरीका अलग था। उनके अनुसार, भारतीयों में अपनी भाषाओं, परंपराओं, मूल्यों और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के प्रति भ्रम पैदा करने का प्रयास किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब अपनी ज्ञान परंपरा को दोबारा पहचानने, उसके प्रमाण जुटाने और उसे आधुनिक तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है। उन्होंने डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल से युवा पीढ़ी को भारत की ज्ञान परंपरा से जोड़ने पर जोर दिया।
प्रमाण और तकनीक के साथ दुनिया के सामने रखने की बात
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की प्राचीन बौद्धिक विरासत को केवल गौरव की बात के रूप में दोहराने के बजाय उसे प्रमाणों, दस्तावेजों और आधुनिक तकनीक के माध्यम से दुनिया के सामने रखा जाना चाहिए।
उन्होंने भारतीय ज्ञान, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण तथा उनके आधुनिक प्रस्तुतीकरण को वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया। मुख्यमंत्री ने शिक्षण संस्थानों से भी भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी धरोहरों के संरक्षण और नई पीढ़ी को उनसे परिचित कराने पर जोर दिया।
सप्तदिवसीय पुण्यतिथि समारोह के तहत हुआ आयोजन
यह कार्यक्रम गोरखनाथ मंदिर में 24 से 30 सितंबर तक आयोजित सप्तदिवसीय पुण्यतिथि समारोह का हिस्सा था। समारोह युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। 24 सितंबर को इसी श्रृंखला के तहत ‘भारतीय ज्ञान परंपरा का वर्तमान परिप्रेक्ष्य’ विषय पर सम्मेलन हुआ।
कार्यक्रम में संतों, धर्माचार्यों, शिक्षाविदों और विभिन्न संस्थानों से जुड़े लोगों ने सहभागिता की। आईआईटी बीएचयू के आचार्य प्रो. वी. रामनाथन ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित अपनी चार पुस्तकों का सेट मुख्यमंत्री को भेंट किया। कार्यक्रम में जगद्गुरु विश्वेश प्रपन्नाचार्य ने भी भारतीय योग परंपरा की व्यापकता पर विचार रखे।
योग को केवल आसन तक सीमित न रखने की बात
जगद्गुरु विश्वेश प्रपन्नाचार्य ने यम, नियम, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, आसन, ध्यान और समाधि का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय योग परंपरा व्यापक है और इसे केवल शारीरिक आसनों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।
कार्यक्रम में वैदिक मंगलाचरण, दिग्विजय स्त्रोत पाठ, महंत अवेद्यनाथ स्त्रोत पाठ और गोरक्ष अष्टक पाठ भी हुआ। विभिन्न राज्यों से आए संतों और धर्माचार्यों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
सोमनाथ प्रसंग को लेकर ऐतिहासिक दावे की स्थिति
महमूद गजनवी और सोमनाथ मंदिर से जुड़े पुजारियों तथा गजनवी के बीच बातचीत का प्रसंग योगी आदित्यनाथ के भाषण में प्रस्तुत ऐतिहासिक विवरण है। उपलब्ध ताजा रिपोर्टिंग में इस विशेष संवाद को स्वतंत्र प्राथमिक ऐतिहासिक दस्तावेज के आधार पर स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसलिए इसे मुख्यमंत्री के कथन के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
सोमनाथ पर महमूद गजनवी के आक्रमण और उसके उद्देश्यों को लेकर इतिहास में अलग-अलग व्याख्याएं मौजूद रही हैं। ऐसे में इस प्रसंग के आधार पर ऐतिहासिक उद्देश्य पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय इसे मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत दृष्टिकोण के रूप में देखना अधिक उचित है।





