व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ मुलाकात के दौरान बड़ा ऐलान; शी ने युवा आदान-प्रदान, सैन्य संवाद और चीन-अमेरिका संबंधों में टकराव से बचने पर दिया जोर
विश्व डेस्क | 🌐 tajnews.in | 25 सितंबर 2026 | 04:09 बजे

वॉशिंगटन। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका के साथ लोगों के बीच संपर्क और युवा आदान-प्रदान को बढ़ाने की दिशा में बड़ा ऐलान किया है। 24 सितंबर 2026 को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ आयोजित स्वागत समारोह में शी जिनपिंग ने अगले पांच वर्षों में एक लाख युवा अमेरिकियों को चीन आने, अध्ययन करने और आदान-प्रदान कार्यक्रमों में हिस्सा लेने का निमंत्रण दिया।
शी जिनपिंग ने कहा कि चीन-अमेरिका संबंधों की उम्मीद दोनों देशों के लोगों से जुड़ी है और इसका भविष्य युवाओं के हाथ में है। उन्होंने दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा को संघर्ष में बदलने से रोकने, सैन्य संवाद बनाए रखने और संकट की स्थिति में संचार तंत्र मजबूत करने पर भी जोर दिया।
यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब चीन और अमेरिका के बीच व्यापार, तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ताइवान और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। युवा आदान-प्रदान की नई पहल दोनों देशों के संबंधों में लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने वाले एक अलग आयाम को सामने लाती है।
- शी जिनपिंग ने अगले पांच वर्षों में एक लाख युवा अमेरिकियों को चीन आने का निमंत्रण दिया।
- पहल में अध्ययन और युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम शामिल हैं।
- 2023 में घोषित 50 हजार युवाओं का लक्ष्य तय समय से पहले पूरा होने की बात चीन ने कही थी।
- शी ने चीन-अमेरिका प्रतिस्पर्धा को संघर्ष में बदलने से रोकने और सैन्य संवाद जारी रखने पर जोर दिया।
2023 में 50 हजार युवाओं का लक्ष्य रखा था
यह घोषणा चीन की पहले से चल रही युवा आदान-प्रदान पहल का विस्तार है। नवंबर 2023 में शी जिनपिंग ने पांच वर्षों में 50 हजार युवा अमेरिकियों को चीन बुलाने की पहल की थी। चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, मई 2026 तक यह लक्ष्य निर्धारित समय से लगभग ढाई साल पहले पूरा हो गया और 50 हजार से अधिक अमेरिकी युवा चीन की यात्रा कर चुके थे।
इस पहल के तहत अमेरिकी युवाओं ने चीन के विभिन्न हिस्सों की यात्रा के साथ विश्वविद्यालयों और छात्रों के साथ संवाद तथा संस्कृति और भाषा से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। चीन ने इसे दोनों देशों के युवाओं के बीच आपसी समझ और संपर्क बढ़ाने के माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया है।
अब लक्ष्य दोगुना, एक लाख युवाओं को निमंत्रण
पहले चरण का लक्ष्य समय से पहले पूरा होने के बाद चीन ने अगले पांच वर्षों के लिए यह संख्या दोगुनी कर एक लाख कर दी है। शी जिनपिंग ने व्हाइट हाउस में कहा कि वह एक लाख युवा अमेरिकियों को आने वाले पांच वर्षों में चीन में आदान-प्रदान और अध्ययन के लिए आमंत्रित करने की घोषणा करते हैं।
इस पहल का दायरा केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। इसमें अध्ययन, युवा प्रतिनिधिमंडलों के दौरे, सांस्कृतिक गतिविधियां और लोगों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।
चीन-अमेरिका रिश्तों में युवाओं को क्यों दिया जा रहा महत्व?
शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में कहा कि चीन-अमेरिका संबंधों की उम्मीद लोगों में और उसका भविष्य युवाओं में है। मई 2026 में भी उन्होंने चीन-अमेरिका युवा मैत्री कार्यक्रम से जुड़े छात्रों को लिखे जवाब में युवाओं को दोनों देशों के संबंधों के भविष्य से जोड़ा था।
चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, 50 हजार युवाओं वाली पहल का लक्ष्य तय समय से दो साल से अधिक पहले पूरा हो गया था। इसके बाद युवा आदान-प्रदान को और विस्तार देने की दिशा में नई पहल सामने आई।
द्वितीय विश्व युद्ध की साझेदारी का भी जिक्र
व्हाइट हाउस में अपने संबोधन के दौरान शी जिनपिंग ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौर में चीन और अमेरिका के सहयोग को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उस समय दोनों देशों ने फासीवादी आक्रमण के खिलाफ साथ मिलकर लड़ाई लड़ी थी।
शी जिनपिंग ने इसी ऐतिहासिक संदर्भ को वर्तमान संबंधों से जोड़ते हुए कहा कि चीन और अमेरिका को टकराव से बचना चाहिए और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व तथा सहयोग का रास्ता तलाशना चाहिए।
प्रतिस्पर्धा हो, लेकिन संघर्ष नहीं
शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका के बीच प्रतिस्पर्धा को नकारने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसे स्वस्थ और सीमित दायरे में रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच ऐसी प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए जिसमें दोनों एक-दूसरे से बेहतर करने की कोशिश करें, न कि ऐसी लड़ाई जिसमें एक की जीत और दूसरे की हार ही लक्ष्य हो।
उन्होंने दोनों देशों के बीच संघर्ष और टकराव से बचने, सैन्य संवाद जारी रखने तथा संकट की स्थिति में संचार और रोकथाम के तंत्र को मजबूत करने की बात कही। उन्होंने ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ से बचने की जरूरत का भी उल्लेख किया।
शी जिनपिंग ने यह भी कहा कि चीन के राष्ट्रीय पुनरुत्थान का लक्ष्य और अमेरिका को फिर से महान बनाने की कोशिश साथ-साथ आगे बढ़ सकती है।
ट्रंप ने भी चीन-अमेरिका के पुराने रिश्तों को याद किया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान चीन और अमेरिका के सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने चीन की मदद करने वाले अमेरिकी स्वयंसेवी पायलटों के समूह ‘फ्लाइंग टाइगर्स’ की भूमिका को याद किया।
ट्रंप ने इस ऐतिहासिक सहयोग को दोनों देशों के बीच पुराने संपर्क और साझा हितों के उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया। वहीं उन्होंने शी जिनपिंग के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों और दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं का भी उल्लेख किया।
‘गंग हो’ का भी आया जिक्र
डोनाल्ड ट्रंप ने चीन-अमेरिका के पुराने संपर्क से जुड़े ‘गंग हो’ यानी Gung Ho शब्द का भी उल्लेख किया। उन्होंने अमेरिकी संदर्भ में इसके मिलकर काम करने और उत्साह के भाव से इस्तेमाल होने की बात कही तथा इसे दोनों देशों के पुराने संपर्क से जोड़ा।
इस तरह व्हाइट हाउस में दोनों नेताओं के सार्वजनिक संदेशों में इतिहास, लोगों के बीच संपर्क और सहयोग की भाषा प्रमुख रही।
सिर्फ छात्र आदान-प्रदान नहीं, व्यापक संबंधों का हिस्सा
शी जिनपिंग का एक लाख युवाओं को चीन बुलाने का प्रस्ताव चीन-अमेरिका संबंधों में people-to-people exchanges को आगे बढ़ाने की पहल के रूप में सामने आया है। इसका प्रत्यक्ष उद्देश्य युवाओं के बीच अध्ययन और संपर्क के अवसर बढ़ाना है, जबकि चीन इसे दोनों देशों के बीच आपसी समझ और सामाजिक संपर्क मजबूत करने से जोड़ रहा है।
यह पहल ऐसे समय में हुई है जब चीन और अमेरिका के बीच व्यापार, तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सुरक्षा और अन्य रणनीतिक मुद्दों पर प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। ऐसे में युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम दोनों देशों के व्यापक संबंधों के एक अलग, लोगों-केंद्रित आयाम को सामने लाता है।
पांडा डिप्लोमेसी का भी संकेत
शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में पांडा डिप्लोमेसी का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कुछ ही दिनों में दो विशाल पांडा—पिंग पिंग और फू शुआंग—अटलांटा के चिड़ियाघर में नए घर पहुंचेंगे।
शी जिनपिंग ने पांडा को चीन और अमेरिका के लोगों के बीच दोस्ती का दूत बताया। पांडा भेजे जाने की घोषणा भी ऐसे समय हुई है जब दोनों देश अपने संबंधों में सहयोग और संपर्क के नए रास्तों पर जोर दे रहे हैं।





