देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी में कानून छात्रों को न्यायिक सेवा की तैयारी के गुर, जस्टिस सुभाष चन्द ने बताए सिविल जज बनने के मंत्र

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विधि सेमिनार में न्यायपालिका की भूमिका, मानवाधिकार और न्यायिक सेवा की तैयारी पर मार्गदर्शन; छात्रों से संविधान व न्यायिक निर्णयों के नियमित अध्ययन पर जोर

उत्तराखंड डेस्क | 🌐 tajnews.in | 25 सितंबर 2026 | 01:52 बजे

उत्तराखंड डेस्क

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी में आयोजित विधि सेमिनार में झारखंड हाईकोर्ट के निवर्तमान न्यायाधीश जस्टिस सुभाष चन्द ने विधि छात्रों को न्यायपालिका की भूमिका, मानवाधिकार और न्यायिक सेवा में करियर से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। मुख्य अतिथि के रूप में छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि न्यायपालिका विधि की सर्वोच्च संस्था है और अदालतों द्वारा कानून की व्याख्या समय-समय पर नए न्यायिक निर्णयों के माध्यम से विकसित होती रहती है।

मानवाधिकार विषय पर व्याख्यान देते हुए जस्टिस सुभाष चन्द ने प्रतिष्ठा, समानता और स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ये नागरिकों के लिए बुनियादी अधिकार हैं और व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, नैतिक तथा आध्यात्मिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने विधि छात्रों से कानून की गहरी समझ विकसित करने, न्यायिक निर्णयों का नियमित अध्ययन करने तथा संविधान और विधि के मूल सिद्धांतों को समझने पर जोर दिया। सेमिनार के दौरान छात्रों को न्यायिक सेवा की तैयारी और सिविल जज बनने के लिए आवश्यक दृष्टिकोण तथा अध्ययन से जुड़े मार्गदर्शन भी दिए गए।

HIGHLIGHTS
  • जस्टिस सुभाष चन्द ने विधि छात्रों को न्यायिक सेवा की तैयारी के गुर बताए।
  • न्यायपालिका की भूमिका और कानून की बदलती व्याख्या पर चर्चा हुई।
  • मानवाधिकारों में प्रतिष्ठा, समानता और स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया गया।
  • छात्रों को संविधान और न्यायिक निर्णयों के नियमित अध्ययन की सलाह दी गई।
  • प्रतियोगिता विजेता विधि छात्रों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

दीप प्रज्वलन और गणेश वंदना से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और गणेश वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय कुमार, प्रतिकुलपति प्रो. ऋतिका मेहरा, विधि विभाग के संकायाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार दीक्षित तथा मुख्य अतिथि जस्टिस सुभाष चन्द मौजूद रहे।

मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए प्रो. अनिल कुमार दीक्षित ने उनके न्यायिक जीवन और संघर्ष का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जस्टिस सुभाष चन्द सामान्य परिवार से आने वाले विधि छात्र रहे और अपनी मेहनत के बल पर हाईकोर्ट के न्यायाधीश के पद तक पहुंचे।

प्रो. दीक्षित ने जस्टिस सुभाष चन्द के न्यायिक जीवन से जुड़े एक प्रसंग का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, न्यायमूर्ति ने अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय का सहारा लिया और न्यायिक नजीर के माध्यम से स्वयं के साथ अन्य परिवादियों को भी न्याय मिला। उन्होंने इस प्रसंग को छात्रों के लिए संघर्ष और अपने विधिक अधिकारों के प्रति सजग रहने के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।

प्रतियोगिता विजेता छात्रों को प्रशस्ति पत्र

सेमिनार के दौरान जस्टिस सुभाष चन्द ने विश्वविद्यालय में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता रहे विधि छात्रों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनका उत्साह बढ़ाया। उन्होंने छात्रों को भविष्य में न्यायिक सेवा में जाने और सिविल जज बनने के लिए तैयारी तथा दृष्टिकोण से जुड़े सुझाव दिए।

कार्यक्रम में स्कूल ऑफ लॉ के शिक्षक डॉ. गौरव त्यागी, डॉ. वैशाली शर्मा, सुश्री आकांक्षा भट्ट, हिमांशु जखमोला, ऐश्वर्य गौरव, डॉ. विनोद जोशी, इशिका, डॉ. राजन हांडा और सुश्री स्माइल गोयल सहित विधि विभाग के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

Pawan Singh
Pawan Singh
Editor in chief, Taj News Network
pawansingh@tajnews.in | WhatsApp: 7579990777

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