प्रतापगढ़: सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या, पेड़ से लटकाया शव

Uttar Pradesh Desk, tajnews.in | Monday, April 27, 2026, 10:45:30 PM IST

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Uttar Pradesh Desk | Crime Investigation

प्रतापगढ़: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली और अमानवीय वारदात सामने आई है, जिसने समाज में रिश्तों और विश्वास की बुनियाद को पूरी तरह से खोखला साबित कर दिया है। रात के घने सन्नाटे में एक बेबस 18 वर्षीय युवती की चीखें खेतों में ही घुटकर रह गईं। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, मानिकपुर थाना क्षेत्र में एक युवती को उसके ही दोस्त ने धोखे से बुलाकर अपने एक अन्य साथी के साथ मिलकर सामूहिक दुष्कर्म (Gang Rape) का शिकार बनाया। जब युवती ने इस दरिंदगी का कड़ा विरोध किया और शोर मचाने की कोशिश की, तो उन दोनों दरिंदों ने मुंह दबाकर उसकी निर्मम हत्या कर दी। हत्यारों की हैवानियत यहीं नहीं रुकी; उन्होंने पुलिस की जांच को भटकाने और इसे आत्महत्या (Suicide) का रूप देने के लिए शव को घसीटते हुए एक बाग में ले जाकर आम के पेड़ से लटका दिया। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत और भारी आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी किशोर को हिरासत में ले लिया है, जबकि उसके दूसरे फरार साथी की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। आइए, इस रूह कंपा देने वाली खौफनाक वारदात, पुलिस की वैज्ञानिक तफ्तीश और एक गरीब परिवार के टूटते सपनों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।

HIGHLIGHTS
  1. विश्वासघात और दरिंदगी: दोस्त ने 18 वर्षीय युवती को रात के अंधेरे में खेत पर बुलाया और अपने साथी के साथ मिलकर किया सामूहिक दुष्कर्म।
  2. विरोध करने पर निर्मम हत्या: युवती के शोर मचाने पर दोनों आरोपियों ने उसका मुंह दबाकर हत्या कर दी और शव को पेड़ से लटका दिया।
  3. पोस्टमार्टम में हुई पुष्टि: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में युवती के शरीर पर खरोंच और चोट के निशान मिले, सामूहिक दुष्कर्म की प्रारंभिक पुष्टि हुई।
  4. कॉल डिटेल से खुला राज: पिता के फोन की कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस ने मुख्य आरोपी किशोर को पकड़ा, दूसरे की तलाश जारी।

आधी रात का विश्वासघात और खौफनाक साजिश

किसी भी इंसान के लिए सबसे खतरनाक वार वह होता है जो किसी करीबी या विश्वासपात्र द्वारा किया जाए। प्रतापगढ़ के मानिकपुर इलाके में रहने वाली इस 18 वर्षीय युवती के साथ भी ठीक ऐसा ही हुआ। पुलिस की प्रारंभिक जांच और आरोपी के कुबूलनामे से इस पूरी खौफनाक रात की जो क्रोनोलॉजी (Chronology) सामने आई है, वह बेहद विचलित करने वाली है। घटना शनिवार और रविवार की मध्य रात्रि की है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, युवती और गांव के ही 17 वर्षीय आरोपी किशोर के बीच पिछले कुछ समय से गहरी दोस्ती और नजदीकी संबंध थे। इसी दोस्ती का फायदा उठाते हुए आरोपी ने शनिवार रात करीब 12 बजे युवती को धोखे से अपने घर से लगभग 450 मीटर दूर एक सुनसान खेत की तरफ बुलाया।

इससे पहले रात करीब 11 बजे युवती अपने दोस्त से मिलने के लिए घर से बाहर बने शौचालय की तरफ निकली थी, लेकिन वहां पहले से मौजूद उसकी भाभी ने उसे डांटकर वापस घर के अंदर भेज दिया था। लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। रात 12 बजे जैसे ही घर के सभी सदस्य गहरी नींद में सो गए, युवती मौका पाकर खेत की तरफ चली गई। उसे इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि वहां उसका दोस्त नहीं, बल्कि मौत उसका इंतजार कर रही है। खेत में पहुंचने पर युवती ने देखा कि वहां उसका दोस्त अकेला नहीं था, बल्कि उसका एक अन्य साथी भी वहां मौजूद था। यहीं से विश्वासघात की उस खौफनाक दास्तान की शुरुआत हुई जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को हमेशा के लिए उजाड़ दिया।

दरिंदगी की इंतहा और आत्महत्या का नाटक

सुनसान खेत में रात के अंधेरे का फायदा उठाते हुए मुख्य आरोपी ने सबसे पहले युवती के साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद उसने इंसानियत की सारी हदें पार करते हुए युवती पर अपने उस दूसरे दोस्त के साथ भी शारीरिक संबंध बनाने का भारी दबाव डाला। जब युवती ने इस घिनौनी और अमानवीय मांग का कड़ा विरोध किया और अपनी आबरू बचाने के लिए चीखना-चिल्लाना शुरू किया, तो दोनों दरिंदे बुरी तरह घबरा गए। पकड़े जाने और समाज में बदनामी के डर से उन्होंने तुरंत युवती को जमीन पर पटक दिया और दोनों ने मिलकर उसका मुंह और गला बुरी तरह से दबा दिया, जिससे दम घुटने से उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। रात के सन्नाटे में उठी उस बेबस की चीख कोई नहीं सुन सका।

युवती की हत्या करने के बाद उन दोनों शातिर किशोरों ने पुलिस और गांव वालों को गुमराह करने की एक खौफनाक साजिश रची। उन्होंने इस नृशंस हत्या को आत्महत्या (Suicide) का रूप देने का फैसला किया। खेत में ही एक धार्मिक स्थल बना हुआ था, जहां एक झंडा लगा था। दोनों ने उस धार्मिक झंडे को वहां से उखाड़ा और उसके कपड़े से युवती का गला कस दिया। इसके बाद वे उस मृत शरीर को जमीन पर घसीटते हुए वहां से करीब 50 मीटर दूर एक आम के बाग में ले गए। वहां उन्होंने उस झंडे के कपड़े का फंदा बनाकर युवती के शव को एक पेड़ से लटका दिया और रात के अंधेरे में वहां से फरार हो गए। अपराधियों ने अपनी तरफ से कोई भी सुराग न छोड़ने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन कहते हैं कि पाप कभी छुपता नहीं है।

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पिता के मोबाइल ने खोला राज, पोस्टमार्टम में दरिंदगी की पुष्टि

रविवार की भोर करीब 4:30 बजे जब युवती के परिजनों ने आम के बाग में पेड़ से लटकता हुआ उसका शव देखा, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। सूचना मिलते ही नवाबगंज, कुंडा और मानिकपुर थानों की भारी पुलिस फोर्स के साथ पुलिस अधीक्षक (SP) दीपक भूकर स्वयं घटनास्थल पर पहुंच गए। फॉरेंसिक टीम ने तुरंत इलाके को सील कर दिया और वहां से फिंगरप्रिंट, पैरों के निशान और अन्य अहम साक्ष्य संकलित किए। शुरुआत में परिजनों को एक पड़ोसी महिला पर शक था, लेकिन पुलिस की वैज्ञानिक जांच ने पूरी कहानी का रुख मोड़ दिया।

एसपी दीपक भूकर ने बताया कि घटना के तुरंत बाद पुलिस ने परिवार के सभी मोबाइल फोन जब्त कर लिए थे। जब मृतका के पिता के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल निकाली गई, तो उसमें एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। रिकॉर्ड के अनुसार, शनिवार रात 9:15 बजे से लेकर 10:47 बजे के बीच युवती ने मुख्य आरोपी किशोर से लगभग 10 बार फोन पर लंबी बातचीत की थी। इसी पुख्ता सुराग के आधार पर पुलिस ने गांव से ही उस 17 वर्षीय आरोपी को हिरासत में ले लिया और कड़ाई से पूछताछ की, जिसके बाद उसने अपना जुर्म कुबूल कर लिया। वहीं, युवती की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी इस दरिंदगी की मुहर लगा दी है। रिपोर्ट में युवती के शरीर पर कई जगह गंभीर चोटों के साथ-साथ दांतों से काटने और नाखूनों से खरोंचने के गहरे निशान मिले हैं, जो उसके संघर्ष की गवाही देते हैं। प्राथमिक रिपोर्ट में सामूहिक दुष्कर्म की स्पष्ट पुष्टि हुई है और आगे की फॉरेंसिक जांच के लिए पुलिस ने विसरा (Viscera) भी सुरक्षित कर लिया है।

टूट गए सपने: 75% अंक लाने वाली बेटी को करनी थी बीएससी

इस हत्याकांड का सबसे दर्दनाक पहलू उस गरीब परिवार के टूटते हुए सपने हैं। मृतका एक बेहद होनहार और होशियार छात्रा थी। उसने इसी वर्ष (2026) यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में 75 फीसदी शानदार अंकों के साथ सफलता हासिल की थी। वह आगे चलकर बीएससी (B.Sc) की पढ़ाई करना चाहती थी और अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी। उसका पिता एक साधारण ई-रिक्शा (E-Rickshaw) चालक है, जो दिन-रात मेहनत करके परिवार का पेट पालता है। घर में चार शादीशुदा बहनें और एक छोटी बहन भी है। मृतका के चारों भाई, जिनमें से दो मुंबई में काम करते हैं, अपनी इस लाडली बहन की पढ़ाई का पूरा खर्च खुशी-खुशी उठा रहे थे।

घटना से ठीक एक दिन पहले, शनिवार को ही भाइयों ने उसे पास के एक डिग्री कॉलेज में बीएससी में दाखिला दिलाने का पक्का आश्वासन दिया था। लेकिन रविवार की सुबह उनके सारे सपने उस आम के पेड़ पर फांसी के फंदे के साथ ही झूल गए। बेटी का शव पेड़ से लटकता देख पिता की बूढ़ी आंखों से आंसुओं की धारा रुकने का नाम नहीं ले रही थी, और मां का रो-रोकर बुरा हाल था। घटना की सूचना मिलते ही मुंबई में काम कर रहे दोनों बड़े भाई अपने घर के लिए रवाना हो गए हैं। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद जब शव गांव पहुंचा, तो क्षेत्राधिकारी (CO) कुंडा अमरनाथ गुप्ता और सीओ लालगंज आशुतोष मिश्रा ने परिजनों से जल्द अंतिम संस्कार करने की अपील की। लेकिन पिता ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक उनके दोनों बड़े बेटे मुंबई से वापस नहीं आ जाते, तब तक उनकी बेटी का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। पुलिस के अनुसार अब सोमवार को कड़ी सुरक्षा के बीच युवती का अंतिम संस्कार संपन्न कराया जाएगा। यह घटना हमारे समाज की उस घिनौनी मानसिकता को उजागर करती है, जहां बेटियों की उड़ान को अक्सर हवस और दरिंदगी के पिंजरे में कैद कर दिया जाता है।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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