अल्ट्रासाउंड से सीटी स्कैन तक तारीखों का इंतजार, पांच घंटे स्ट्रेचर पर पड़ी रही 65 वर्षीय महिला; परिजनों का आरोप—गरीबों को इलाज नहीं, सिर्फ तारीखें मिल रही हैं
आगरा डेस्क, 🌐 tajnews.in | बुधवार, 2 सितंबर 2026, 05:20:03 AM IST

tajnews.in | आगरा: सरकार सरकारी अस्पतालों की सुविधाएं बेहतर बनाने पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन आगरा के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसएन मेडिकल कॉलेज में मरीजों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। जांच और इलाज के इंतजार में मरीजों को तारीखों पर तारीखें मिल रही हैं। ताजा मामला 65 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला का है, जो 14 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहने के बावजूद अपनी बीमारी की सही वजह जानने के लिए जरूरी जांच का इंतजार करती रहीं।
सादाबाद निवासी किरण देवी को पेट में पानी भरने की शिकायत के बाद 19 अगस्त को एसएन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि भर्ती होने के बाद भी जरूरी जांचें समय पर नहीं हो सकीं। नतीजा यह रहा कि 14 दिन बीतने के बाद भी बीमारी का सही कारण स्पष्ट नहीं हो सका।
मंगलवार को हालत यह रही कि किरण देवी को जांच के लिए सुबह से रेडियोलॉजी विभाग में स्ट्रेचर पर रखा गया, लेकिन करीब पांच घंटे इंतजार के बाद भी उनका नंबर नहीं आया। परिजनों का कहना है कि मरीज की हालत बिगड़ रही है, लेकिन सरकारी अस्पताल में जांच के लिए लगातार इंतजार करना पड़ रहा है।
पहले अल्ट्रासाउंड की तारीख, फिर नहीं हुई जांच; अब सीटी स्कैन का इंतजार
किरण देवी के बेटे फौजदार सिंह के अनुसार, मां को 19 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद 25 अगस्त को अल्ट्रासाउंड की तारीख दी गई थी।
परिजनों का कहना है कि जब जांच का समय आया तो पेट में पानी भरा होने के कारण अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका। इसके बाद उन्हें 1 सितंबर को सीटी स्कैन कराने की तारीख दी गई।
परिवार का आरोप है कि एक के बाद एक जांच के इंतजार में कई दिन निकल गए, जबकि मरीज अस्पताल में भर्ती रही। जरूरी जांच समय पर नहीं होने से बीमारी की सही स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी और इलाज की दिशा भी तय नहीं हो पाई।
सुबह 9 बजे पहुंचे, दोपहर 2 बजे तक स्ट्रेचर पर इंतजार
मंगलवार को फौजदार सिंह अपनी बीमार मां को लेकर सुबह करीब 9 बजे रेडियोलॉजी विभाग पहुंच गए थे। बुजुर्ग महिला को स्ट्रेचर पर रखा गया और परिवार जांच के लिए नंबर आने का इंतजार करता रहा।
परिजनों के मुताबिक, दोपहर करीब 2 बजे तक भी उनका नंबर नहीं आया। इस दौरान किरण देवी करीब पांच घंटे तक स्ट्रेचर पर पड़ी रहीं।
फौजदार सिंह का कहना है कि मां की हालत लगातार बिगड़ रही है, लेकिन समय पर जांच नहीं हो पा रही। उन्होंने अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि गरीब मरीजों को इलाज के बजाय सिर्फ जांच की तारीखें मिल रही हैं।
परिजनों का दर्द साफ है—जब मरीज अस्पताल में भर्ती है और उसकी हालत गंभीर है, तो जरूरी जांच के लिए कई दिनों और फिर घंटों का इंतजार आखिर क्यों?
एमआरआई के लिए इंतजार कर रहे मरीज ने डॉक्टर पर अभद्रता का आरोप लगाया
रेडियोलॉजी विभाग में इंतजार को लेकर यह अकेला मामला नहीं है। एमआरआई जांच के लिए पहुंचे शमशाबाद निवासी माता प्रसाद ने भी अस्पताल में अपने साथ अभद्र व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया।
माता प्रसाद के अनुसार, वह सुबह करीब 8 बजे ही जांच के लिए पहुंच गए थे। करीब चार घंटे तक इंतजार करने के बाद भी नंबर नहीं आया तो वह जानकारी लेने के लिए अंदर गए।
उनका आरोप है कि वहां मौजूद डॉक्टर ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। हालांकि इस आरोप की अलग से जांच और तथ्यों की पुष्टि होना बाकी है।
प्राचार्य बोले—गंभीर मरीजों की जांच को दी जाती है प्राथमिकता
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि अस्पताल में इमरजेंसी और गंभीर मरीजों की जांच प्राथमिकता के आधार पर कराई जाती है।
उन्होंने कहा कि चिकित्सकों और अस्पताल कर्मियों को मरीजों तथा तीमारदारों के साथ संवेदनशीलता और नरमी से पेश आने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी डॉक्टर या कर्मचारी द्वारा अभद्र व्यवहार की शिकायत सही पाई जाती है तो जांच के बाद संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
करोड़ों की सुविधाओं के बावजूद आम मरीज क्यों भटक रहा है?
यह मामला केवल किरण देवी के इलाज में देरी का नहीं है। यह उस बड़ी समस्या की तस्वीर भी पेश करता है, जिससे सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले हजारों मरीज और उनके परिवार रोज जूझते हैं।
सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं, आधुनिक मशीनों और चिकित्सा ढांचे पर करोड़ों रुपये खर्च करती है। लेकिन यदि एक बुजुर्ग और बीमार महिला को अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन जैसी जरूरी जांचों के लिए तारीखों का इंतजार करना पड़े, तो सवाल केवल संसाधनों का नहीं बल्कि उनकी उपलब्धता, प्रबंधन और मरीजों तक पहुंच का भी उठता है।
निजी अस्पतालों का महंगा खर्च उठाने में असमर्थ आम और गरीब परिवार बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं। लेकिन जब वहां भी मरीजों को घंटों स्ट्रेचर पर इंतजार करना पड़े और जांच के लिए कई दिनों तक भटकना पड़े, तो सबसे ज्यादा मार उसी आम आदमी पर पड़ती है जिसके पास इलाज का दूसरा विकल्प नहीं है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आम मरीज को समय पर जांच और इलाज कब मिलेगा? किरण देवी का मामला केवल एक परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से जूझ रही उस आम जनता की आवाज है, जो अस्पताल पहुंचने के बाद भी इलाज से पहले तारीखों का इंतजार करने को मजबूर है।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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