डोर-टू-डोर कूड़ा उठान ठप, ताजगंज, छत्ता और लोहामंडी में जगह-जगह लगे ढेर; नगर निगम पर भुगतान में लापरवाही के आरोप
आगरा डेस्क, 🌐 tajnews.in | बुधवार, 2 सितंबर 2026, 06:48:41 AM IST

tajnews.in | आगरा: शहर की सफाई व्यवस्था पर हर महीने करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद मंगलवार को आगरा में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था ठप हो गई। नगर निगम से चार महीने का भुगतान लंबित रहने کے कारण कूड़ा उठाने वाली कंपनी के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पाया। इसके विरोध में करीब 700 कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया, जिससे शहर के कई इलाकों में घरों से कचरा नहीं उठ सका और जगह-जगह कूड़े के ढेर लग गए।
सबसे ज्यादा असर ताजगंज, छत्ता और लोहामंडी जोन के कई वार्डों में दिखाई दिया। सुबह कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां नहीं पहुंचीं तो लोगों को घरों में कचरा जमा होने की परेशानी झेलनी पड़ी। कई स्थानों पर लोग मजबूरी में कचरा गलियों, सड़क किनारे और खाली स्थानों पर डालते दिखाई दिए।
नगर निगम क्षेत्र में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन पर हर महीने करीब तीन करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद मई से कंपनी का भुगतान लंबित रहने का मामला सामने आने के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि करोड़ों रुपये की व्यवस्था के बावजूद भुगतान संकट आखिर क्यों पैदा हुआ।
चार महीने का भुगतान अटका, कर्मचारियों तक नहीं पहुंचा वेतन
हड़ताल पर गए कर्मचारियों ने नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन किया और अधिकारियों के विरुद्ध नारेबाजी की। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उन्हें वेतन नहीं मिल रहा है।
कंपनी के सुपरवाइजर के अनुसार, नगर निगम ने कूड़ा कलेक्शन करने वाली कंपनी का करीब चार महीने से भुगतान नहीं किया है। कंपनी का कहना है कि भुगतान न मिलने के कारण कर्मचारियों को समय पर वेतन देना मुश्किल हो गया।
बताया गया कि मई से अब तक कंपनी का भुगतान लंबित है। इसी भुगतान संकट का असर अब सीधे सफाईकर्मियों और फिर शहर की जनता पर पड़ा है।
वर्कशॉप से बाहर नहीं निकल सकीं कूड़ा गाड़ियां
हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों को वर्कशॉप से बाहर नहीं निकलने दिया। शहर की डोर-टू-डोर कलेक्शन व्यवस्था में करीब 270 वाहन लगाए जाते हैं।
मंगलवार को बड़ी संख्या में गाड़ियां नहीं निकलने से सुबह का नियमित कूड़ा उठान प्रभावित हुआ। दोपहर तक कई इलाकों में कचरा जमा होने लगा और लोगों को गंदगी तथा बदबू की समस्या का सामना करना पड़ा।
700 कर्मचारी संभालते हैं शहर का डोर-टू-डोर कलेक्शन
शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने की व्यवस्था स्वच्छता कॉर्पोरेशन के करीब 700 कर्मचारियों और 270 गाड़ियों کے जरिए संचालित की जाती है।
एक दिन काम बंद होने का असर भी बड़े स्तर पर दिखाई दिया। जिन घरों में रोज सुबह कूड़ा लेने गाड़ियां पहुंचती थीं, वहां मंगलवार को व्यवस्था नहीं पहुंची। इसके कारण कई मोहल्लों में लोग कचरा घरों के बाहर रखने को मजबूर हो गए।
पार्षदों ने भी उठाए सवाल
सफाई व्यवस्था प्रभावित होने के बाद पार्षदों ने भी नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
पीपलमंडी क्षेत्र के पार्षद रवि माथुर ने कहा कि सुबह कूड़ा उठाने वाले कर्मचारी नहीं पहुंचे, जिससे गलियों में कचरा पड़ा रहा। उनका कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवा के भुगतान में नियमितता बनाए रखना जरूरी है।
आवास विकास क्षेत्र की पार्षद सुषमा जैन ने भी कहा कि रक्षाबंधन के बाद से कई इलाकों में सफाई व्यवस्था प्रभावित रही है। पहले छुट्टियों और फिर कर्मचारियों की हड़ताल के कारण वार्डों में गंदगी की समस्या बढ़ गई है।
एक महीने का भुगतान देकर हड़ताल खत्म कराने की कोशिश
कंपनी ने नगर निगम से चार महीने का लंबित भुगतान जारी करने की मांग की है। मामला बढ़ने के बाद कर्मचारियों को एक महीने का वेतन दिलाने और हड़ताल समाप्त कराने की कोशिश शुरू की गई।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें जल्द वेतन नहीं मिला तो आंदोलन और तेज किया जा सकता है।
नगर निगम बोला—बुधवार को दिया जाएगा चेक
अपर नगर आयुक्त शिशिर कुमार ने कहा कि रक्षाबंधन की छुट्टियों के कारण कंपनी का भुगतान नहीं हो पाया था और बुधवार को चेक दे दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत निगम कर्मचारियों को लगाकर कूड़ा उठवाने का प्रयास किया गया।
वहीं, नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य ने कहा कि कंपनी के कर्मचारियों ने मंगलवार को कूड़ा नहीं उठाया है। कंपनी को नोटिस देने के साथ भुगतान में एक दिन की कटौती की कार्रवाई भी की जाएगी।
स्वच्छता कॉर्पोरेशन के मैनेजर सुशील कुमार के अनुसार, नगर निगम से चार महीने का भुगतान नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों को वेतन देना मुश्किल हो रहा है। कर्मचारियों को समझाने और एक महीने का वेतन दिलाकर हड़ताल समाप्त कराने का प्रयास किया जा रहा है।
करोड़ों खर्च के बाद भी जनता क्यों झेले गंदगी?
आगरा की यह स्थिति केवल कर्मचारियों और नगर निगम के बीच भुगतान विवाद भर नहीं है। इसका सीधा असर लाखों शहरवासियों पर पड़ा है।
जब डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन जैसी बुनियादी व्यवस्था पर हर महीने करीब तीन करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तब चार महीने तक भुगतान लंबित रहने से पूरी व्यवस्था का ठप हो जाना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद यदि भुगतान व्यवस्था समय पर नहीं चलती और उसका खामियाजा शहर की जनता को गलियों में लगे कूड़े के ढेर के रूप में भुगतना पड़ता है, तो जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी? मंगलवार की हड़ताल ने साफ कर दिया कि सिस्टम की एक वित्तीय चूक का असर सीधे पूरे शहर की सफाई और आम जनता की जिंदगी पर पड़ सकता है।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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