एच1एन1 के साथ इन्फ्लूएंजा, डेंगू और मलेरिया की चुनौती भी बढ़ी; स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की
राष्ट्रीय डेस्क, 🌐 tajnews.in | मंगलवार, 1 सितंबर 2026, 08:58:17 AM IST

tajnews.in | नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 30 अगस्त को एक ही दिन में 48 नए मामले सामने आए। इसके साथ ही इस वर्ष अब तक एच1एन1 संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 3,629 पहुंच गई है।
इन मामलों में 3,054 मरीज दिल्ली के निवासी हैं, जबकि 575 संक्रमित दिल्ली के बाहर के बताए गए हैं। राजधानी में संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य तंत्र को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं और अस्पतालों में इलाज से जुड़ी तैयारियों की समीक्षा की जा रही है।
इन्फ्लूएंजा ए और बी के 5 हजार से अधिक मामले
दिल्ली में केवल एच1एन1 ही नहीं, बल्कि अन्य इन्फ्लूएंजा संक्रमण के मामले भी बढ़े हैं। उपलब्ध स्वास्थ्य आंकड़ों के अनुसार, इन्फ्लूएंजा ए और बी के कुल मामलों की संख्या 5,029 तक पहुंच चुकी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए सतर्क रहने की जरूरत है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर फिलहाल किसी नए या असाधारण रूप से अधिक खतरनाक स्ट्रेन के व्यापक प्रसार की पुष्टि नहीं हुई है।
बढ़ते मामलों के बीच केंद्र और दिल्ली सरकार स्तर पर भी एच1एन1 की स्थिति तथा अस्पतालों की तैयारियों کی समीक्षा की गई है। अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन, दवाओं और जांच सुविधाओं की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी को नजरअंदाज न करें
विशेषज्ञों ने लोगों को घबराने के बजाय लक्षणों को गंभीरता से लेने की सलाह दी है। सामान्य सर्दी-जुकाम, हल्की खांसी या मामूली बुखार کے हर मामले में घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन कुछ लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, ठंड लगना, सांस लेने में परेशानी या हालत तेजी से बिगड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बुजुर्गों, छोटे बच्चों और गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को फ्लू जैसे लक्षणों के मामले में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
स्वाइन फ्लू के साथ डेंगू-मलेरिया की भी चुनौती
दिल्ली में संक्रमण की चुनौती केवल एच1एन1 तक सीमित नहीं है। बारिश और उसके बाद के मौसम में मच्छर जनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है।
इस वर्ष डेंगू के 311 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें अगस्त में 90 मामले दर्ज किए गए। जुलाई में डेंगू के 40 मामले सामने आए थे।
मलेरिया के कुल 119 मामलों में से 53 मामले अगस्त में दर्ज किए गए। चिकनगुनिया के भी 22 मामलों में से आठ अगस्त में सामने आए हैं।
इस तरह राजधानी के सामने इस समय दोहरी स्वास्थ्य चुनौती है—एक ओर श्वसन संक्रमण के बढ़ते मामले और दूसरी ओर बारिश के बाद तेजी से सक्रिय हुईं मच्छर जनित बीमारियां।
स्कूलों और संस्थानों को भी सतर्क रहने के निर्देश
मॉनसून और पोस्ट-मॉनसून का मौसम मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल माना जाता है। ऐसे में स्थानीय निकायों ने सरकारी और निजी स्कूलों समेत विभिन्न संस्थानों को परिसर में पानी जमा न होने देने और मच्छर नियंत्रण के उपाय मजबूत करने को कहा है।
कूलर, गमले, खुले बर्तन, पुराने टायर, बोतल और अन्य स्थानों पर जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का कारण बन सकता है। इसलिए घरों और आसपास के क्षेत्रों में पानी जमा न होने देना रोकथाम का सबसे महत्वपूर्ण उपाय माना जा रहा है।
लापरवाही नहीं, समय पर सतर्कता जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लू जैसे लक्षण होने पर खांसते और छींकते समय मुंह और नाक ढकना, हाथों की स्वच्छता बनाए रखना और तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
वहीं डेंगू और मलेरिया से बचाव के लिए घर और आसपास पानी जमा न होने देना, कूलर व पानी के बर्तनों की नियमित सफाई करना और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाना आवश्यक है।
दिल्ली इस समय संक्रमण की दोहरी चुनौती का सामना कर रही है। एक तरफ एच1एन1 और अन्य फ्लू संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ बारिश के बाद डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया का खतरा भी बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की अपील साफ है—घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन लक्षणों और बचाव को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही भी नहीं होनी चाहिए। समय पर पहचान, सतर्कता और जरूरी चिकित्सा सलाह ही इस बढ़ती चुनौती से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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