अंग दान, महा दानबीस हज़ार नई ज़िंदगियाँ: अंगदान ने बदली भारत की तस्वीर

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Article Desk, 🌐 tajnews.in | Wednesday, 5 August, 2026, 04:06:28 AM IST.

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Brij Khandelwal
बृज खंडेलवाल
वरिष्ठ पत्रकार व पर्यावरणविद्
आगरा के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ पत्रकार और प्रतिष्ठित पर्यावरणविद् बृज खंडेलवाल ने वर्ष 1972 में ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC, नई दिल्ली) से पत्रकारिता की शुरुआत की। वे ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’, ‘INDIA TODAY’, ‘इंडिया एब्रॉड’, और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी ‘IANS’ सहित देश-विदेश के कई शीर्ष मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं। ‘ब्रज मंडल हेरिटेज कंवर्जेशन सोसाइटी’ के संस्थापक खंडेलवाल ने स्वास्थ्य व जन-जागरूकता पर कई ऐतिहासिक विश्लेषण लिखे हैं।

अंग दान, महा दान

बीस हज़ार नई ज़िंदगियाँ: अंगदान ने बदली भारत की तस्वीर

ताजनगरी आगरा का प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू (एसएन) मेडिकल कॉलेज अब अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) सेवाओं के अभूतपूर्व विस्तार की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। मेडिकल कॉलेज की नवनिर्मित सुपर स्पेशियलिटी विंग में किडनी ट्रांसप्लांट की सभी प्रमुख चिकित्सीय और प्रशासनिक तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और जल्द ही नियमित प्रत्यारोपण प्रक्रियाएं शुरू होने की उम्मीद है। यहाँ कॉर्निया प्रत्यारोपण की अत्याधुनिक सुविधा पहले से सफलतापूर्वक उपलब्ध है, जबकि निकट भविष्य में लिवर, हृदय (हार्ट) और फेफड़ों (लंग्स) के जटिल प्रत्यारोपण शुरू करने की भी व्यापक दूरदर्शी योजना है। मेडिकल कॉलेज का एनाटॉमी विभाग देहदान (कैडवर डोनेशन) को भी पूरी श्रद्धा के साथ स्वीकार करता है। दान किए गए मानव शरीरों का सम्मानजनक उपयोग एमबीबीएस व पीजी छात्रों के व्यावहारिक शिक्षण, एनाटॉमी अध्ययन तथा उन्नत सर्जिकल शिक्षा में किया जाता है। देहदान के इच्छुक व्यक्ति एनाटॉमी विभाग में सीधे संपर्क कर पंजीकरण करा सकते हैं। विधिक सच को अब और दबाया नहीं जा सकता और इस पुण्य कार्य को समाज की मुख्यधारा में लाना होगा।

हाल ही में गुजरात राज्य में सेमी-हाई-स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के माध्यम से एक विशेष ग्रीन कॉरिडोर बनाकर मानव हृदय को समय पर दूसरे शहर पहुँचाकर भारतीय चिकित्सा इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय रचा गया। यह नजारा अद्भुत था।

एक परिवार अपने प्रियजन को असमय खोकर हमेशा के लिए विदा कर रहा था। ठीक उसी दुखद समय, किसी दूसरे अस्पताल में एक असहाय मरीज नई जिंदगी की आस में उम्मीद की नई धड़कनों के साथ ऑपरेशन थिएटर में ले जाया जा रहा था। एक घर का असहनीय ग़म, दूसरे घर की अपरंपार खुशी में तब्दील हो गया। अंगदान की सबसे बड़ी और पवित्र खूबसूरती यही है कि इंसान इस दुनिया से physically चले जाने के बाद भी कई निर्दोष लोगों की धड़कनों, आँखों और साँसों में हमेशा जीवित रह सकता है।

भारत ने वर्ष 2025 के दौरान अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की। स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार देश के भीतर एक ही वर्ष में 20,138 सफल अंग प्रत्यारोपण किए गए। यह आँकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 6 से 7 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2013 में जहाँ यह राष्ट्रीय संख्या केवल 4,990 थी, वहीं मात्र एक दशक के भीतर अंग प्रत्यारोपण का यह दायरा चार गुना से भी अधिक बढ़कर नया रिकॉर्ड बना चुका है। पूरे देश में दिल्ली-एनसीआर का क्षेत्र सबसे आगे रहा, जहाँ अकेले 4,500 से अधिक जटिल प्रत्यारोपण हुए। इसके बाद तमिलनाडु, महाराष्ट्र, तेलंगाना और केरल राज्यों का अग्रणी स्थान रहा। ब्रेन डेड होने के बाद कैडवर अंगदान करने के मामले में तमिलनाडु ने एक बार फिर पूरे देश में अनुकरणीय मिसाल पेश की है। इसके साथ ही महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक भी इस पुनीत दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।

आज भारत जीवित दाताओं (Living Donors) से अंग प्रत्यारोपण कराने के मामले में विश्व का अग्रणी देश बन चुका है। वार्षिक कुल प्रत्यारोपणों की संख्या के वैश्विक पैमाने पर भारत अब केवल अमेरिका और चीन जैसे विकसित राष्ट्रों से ही पीछे है। यह स्वर्णिम उपलब्धि हमारे देश के कुशल डॉक्टरों, ट्रांसप्लांट सर्जनों, समर्पित नर्सों और पराचिकित्सक स्वास्थ्यकर्मियों की अहोरात्र मेहनत का सुखद परिणाम है। इसके साथ ही, यह उन संवेदनशील दाता परिवारों की सोच को भी दिल से सलाम है, जिन्होंने अपने गहरे व्यक्तिगत दुःख के बीच किसी अनजान व्यक्ति को जीवन का अनमोल उपहार देने का ऐतिहासिक फैसला लिया।

एक अंगदाता परिवार के सदस्य ने भावुक होकर बताया, “हमारा नौजवान बेटा तो हमेशा के लिए चला गया, लेकिन उसकी किडनी और लीवर अब दो अन्य ज़रूरतमंद परिवारों में धड़क रहे हैं। हमें दिल से महसूस होता है कि वह अब भी हमारे बीच कहीं न कहीं जीवित है।” वहीं एक लाभार्थी, जो कई वर्षों से कष्टदायक डायलिसिस की मशीन पर जीवन से जूझ रहा था, भावुक होकर बोला, “जब डॉक्टर ने कहा कि मैचिंग अंग मिल गया है, तो लगा जैसे मौत के मुँह से वापस लौट आया हूँ। अब मैं अपने छोटे बच्चों के साथ खेल सकता हूँ। दाता परिवार का शुक्रिया अदा करने के लिए मेरे पास शब्द कम पड़ रहे हैं।”

चिकित्सा क्षेत्र के जाने-माने विशेषज्ञ भी समाज में आ रहे इस सकारात्मक बदलाव को खुले दिल से सराहते हैं। देश के प्रसिद्ध वरिष्ठ ट्रांसप्लांट सर्जन कहते हैं, “अंगदान मानव सभ्यता का सबसे बड़ा और अनमोल उपहार है। कृपया अपने अंगों को अपने साथ स्वर्ग न ले जाएँ; क्योंकि ईश्वर को भी पता है कि स्वर्ग से ज्यादा धरती पर इंसानों को इनकी सख्त ज़रूरत है।”

भारत सरकार के राष्ट्रीय डिजिटल पोर्टल पर वर्ष 2023 से लेकर अब तक पाँच लाख से अधिक जागरूक नागरिकों ने अंगदान करने का ऑनलाइन संकल्प पत्र (Pledge) भरा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ‘जुग-जुग जियो अभियान’, NOTTO (नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन) मोबाइल ऐप और केंद्र सरकार की ‘वन नेशन, वन पॉलिसी’ की पारदर्शी नीति ने प्रत्यारोपण की पूरी प्रक्रिया को बहुत आसान व निष्पक्ष बना दिया है। देश के विभिन्न राज्यों में खुले नए एम्स (AIIMS) संस्थानों में किडनी और लीवर प्रत्यारोपण की अत्याधुनिक उन्नत सुविधाएं तेज़ी से बढ़ी हैं।

लेकिन इस सकारात्मक तस्वीर के बावजूद हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती अभी भी मुँह बाए खड़ी है। भारत में हर साल लाखों गंभीर मरीज अंगों की प्रतीक्षा सूची में रहते हैं। जनजागरूकता की कमी के कारण बहुत से लाचार लोग समय पर अंग न मिल पाने की वजह से असमय अपनी जान गँवा देते हैं।

अंगों की यही भारी किल्लत और असंतुलन समाज में अवैध ‘ग्रे मार्केट’ यानी कालाबाजारी को बढ़ावा देता है। अत्यंत ग़रीब और बेबस लोगों से बहला-फुसलाकर किडनी चुराने या मजबूरी का फायदा उठाकर जबरन बेचने के संगीन मामले समय-समय पर सामने आते रहते हैं। शातिर दलाल और मेडिकल रैकेट ग़रीब किसानों, असंगठित मजदूरों और कर्ज के दलदल में डूबे लाचार लोगों को चंद पैसों का लालच देकर फुसलाते हैं। कागजों पर नकली रिश्तेदार, फर्जी एनओसी दस्तावेज़ और फर्जी मेडिकल फाइलें बनाकर अवैध रूप से महंगे कॉरपोरेट अस्पतालों में प्रत्यारोपण करा दिए जाते हैं। देश के महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली-एनसीआर से लेकर यहाँ तक कि बांग्लादेश और कम्बोडिया जैसे देशों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय अंग तस्करी रैकेट पकड़े गए हैं। इसमें बेहद ग़रीब दाता को नाममात्र के पैसे दिए जाते हैं, जबकि अमीर मरीज से दलालों द्वारा लाखों-करोड़ों ऐंठ लिए जाते हैं। कई बार भोले-भाले ग्रामीण मरीजों की किडनी अन्य इलाज के नाम पर धोखे से निकाल ली जाती है। यह काला व्यापार मानवीय गरिमा का घोर आपराधिक अपमान है।

यद्यपि भारत में मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम (THOA) का कानून बहुत सख्त है, लेकिन व्यापक सामाजिक जागरूकता और प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बढ़ाकर ही इस अवैध किडनियों के अंतरराष्ट्रीय खेल और ग्रे मार्केट पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। सच से आंखें चुराना अब पूरी तरह बंद होना चाहिए।

जब मृत्यु के बाद स्वैच्छिक अंगदान हमारे समाज की स्वाभाविक दिनचर्या और संस्कृति बनेगा, तभी इस अभियान को असली सफलता मिलेगी। आख़िरकार, इंसान की सबसे बड़ी और टिकाऊ विरासत उसकी भौतिक दौलत नहीं, बल्कि वह अनमोल जीवन है जो वह जाते-जाते दूसरों की साँसों में देकर जाता है। अंगदान सचमुच मृत्यु के बाद भी जीवन का सबसे सुंदर उत्सव है।

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Pawan Singh

Pawan Singh

Chief Editor, Taj News

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