1952 के विलय समझौते के आर्टिकल 6(2)(सी) का हवाला; जयपुर हाउस की दो कोठियां, मनःकामेश्वर मंदिर और सड़क की पट्टी भी दावे में शामिल
आगरा डेस्क, 🌐 tajnews.in | शुक्रवार, 18 सितंबर 2026, 01:45:10 PM IST

tajnews.in | आगरा, 18 सितंबर 2026। आगरा की जयपुर हाउस कॉलोनी और उससे जुड़ी ऐतिहासिक संपत्तियों को लेकर राजस्थान सरकार के दावे के बाद सात दशक से अधिक पुराने सरकारी रिकॉर्ड फिर खंगाले जा रहे हैं। राजस्थान सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार से आगरा समेत उत्तर प्रदेश के चार शहरों में पूर्व जयपुर रियासत की संपत्तियों की वर्तमान स्थिति और अभिलेखों की जानकारी मांगी है।
राजस्थान सरकार के दावे में आगरा के जयपुर हाउस क्षेत्र की करीब 100 बीघा जमीन, दो ऐतिहासिक कोठियां, सदाशिव मनःकामेश्वर मंदिर से जुड़ा क्षेत्र और सड़क की एक पट्टी शामिल बताई गई है। दावे का आधार 1952 के विलय समझौते के आर्टिकल 6(2)(सी) और 16 फरवरी 1952 के राजपत्र को बताया गया है।
1952 के बाद क्या हुआ, अब रिकॉर्ड से तलाशा जा रहा जवाब
राजस्थान सरकार के पत्र के बाद उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने संबंधित जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। आगरा में जिलाधिकारी स्तर से नगर निगम, आगरा विकास प्राधिकरण और एसडीएम सदर से संबंधित अभिलेख तलाशने को कहा गया है।
जांच का मुख्य सवाल यह है कि 1952 के बाद जयपुर रियासत की बताई जा रही जमीन और भवनों की कानूनी एवं प्रशासनिक स्थिति कैसे बदली। किन हिस्सों का हस्तांतरण या आवंटन हुआ, किस आधार पर कॉलोनी विकसित हुई और मौजूदा राजस्व रिकॉर्ड में इन संपत्तियों का दर्जा क्या है, इसकी जानकारी पुराने दस्तावेजों से जुटाई जा रही है।
जयपुर हाउस में 350 प्लॉट काटे गए थे
उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड और हालिया रिपोर्टों के अनुसार जयपुर हाउस की जमीन पर नगर महापालिका ने वर्ष 1965 में 350 प्लॉट काटे थे। इनमें 110 प्लॉट सहकारी समिति के माध्यम से आवंटित किए गए थे।
यही वजह है कि मौजूदा जांच में केवल मूल जमीन के रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि प्लॉटों के आवंटन और जमीन के हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेज भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। वर्ष 1952 से 1955 के बीच हुए सरकारी पत्राचार में जयपुर हाउस की जमीन और दोनों कोठियों के अधिग्रहण को लेकर तत्कालीन जयपुर सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच पत्राचार का भी उल्लेख सामने आया है।
अधिग्रहण की कोशिश पर भी हुआ था पत्राचार
17 सितंबर को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार 1952 से 1955 के बीच आगरा के तत्कालीन जिलाधिकारी, कमिश्नर, आगरा इंप्रूवमेंट ट्रस्ट और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच जयपुर हाउस को लेकर पत्राचार हुआ था।
रिपोर्ट के मुताबिक आगरा इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने जयपुर हाउस की जमीन को आवासीय योजना में शामिल करने और अधिग्रहण की प्रक्रिया पर विचार किया था, जिस पर राजस्थान सरकार ने आपत्ति दर्ज कराई थी। तत्कालीन पत्राचार में यह भी उल्लेख था कि जयपुर रियासत की संपत्तियों के उपयोग की अनुमति दी गई थी, लेकिन अधिग्रहण को लेकर सहमति नहीं थी।
इस पुराने पत्राचार की वास्तविक कानूनी स्थिति और वर्तमान स्वामित्व पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है, यह अब अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
दो ऐतिहासिक कोठियां भी जांच के दायरे में
जयपुर हाउस की दो ऐतिहासिक कोठियां भी राजस्थान सरकार के दावे में शामिल हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन भवनों के अलग-अलग समय में सरकारी उपयोग का उल्लेख मिलता है। वर्तमान समय में इनसे जुड़े भवनों में एडीए और स्टेट जीएसटी से संबंधित सरकारी कार्यालय संचालित होने की जानकारी सामने आई है।
इन भवनों की स्थापत्य शैली भी उनके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती है। एडीए से जुड़े भवन में राजस्थानी हवेली शैली का प्रभाव बताया गया है, जबकि दूसरे भवन को औपनिवेशिक स्थापत्य से जोड़ा गया है।
खतैना रोड पर आज भी दिखता है जयपुर रियासत का निशान
जयपुर हाउस के इतिहास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण दृश्य प्रमाण खतैना रोड पर लोहामंडी थाने के सामने लगा संगमरमर का शिलापट है। रिपोर्ट के अनुसार इस पर “महाराजा ऑफ जयपुर” का उल्लेख है।
स्थानीय निवासी विजय गोयल के अनुसार क्षेत्र में कभी ककैया ईंटों से बनी लंबी दीवार भी थी, जो जयपुर हाउस और प्रताप नगर के बीच सीमा जैसी संरचना के रूप में मौजूद थी। समय के साथ दीवार का बड़ा हिस्सा समाप्त हो गया, हालांकि कुछ अवशेष अब भी बताए जाते हैं।
दावा सिर्फ आगरा तक सीमित नहीं
राजस्थान सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों में भी पूर्व जयपुर रियासत की संपत्तियों का विवरण दिया गया है।
प्रयागराज में कटरा सवाई जयसिंह क्षेत्र की करीब 35.25 एकड़ जमीन, वाराणसी के मान मंदिर क्षेत्र में 44 मकान और मानमंदिर घाट तथा मथुरा में जसवंतगंज धर्मशाला परिसर की करीब 2.16 एकड़ जमीन और छह कोठरियों का उल्लेख रिपोर्टों में किया गया है।
20 साल पहले भी हुआ था सर्वे
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार राजस्थान सरकार ने वर्ष 2006 में आगरा सहित उत्तर प्रदेश के चार जिलों में जयपुर रियासत से जुड़ी जमीन और संपत्तियों का सर्वे कराया था। अब नए पत्राचार के बाद उन पुराने सर्वे रिकॉर्ड और सात दशक पुराने राजस्व एवं प्रशासनिक दस्तावेजों को फिर देखा जा रहा है।
आगरा प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से रिकॉर्ड जुटाए जाने के बाद शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। फिलहाल यह मामला दावे और अभिलेखीय जांच के चरण में है।
इसलिए आगरा की जयपुर हाउस कॉलोनी या संबंधित संपत्तियों को अभी सीधे “राजस्थान की जमीन” कहना उचित नहीं होगा। अंतिम स्वामित्व की स्थिति पुराने विलय समझौते, राजपत्र, राजस्व अभिलेख, हस्तांतरण दस्तावेजों और बाद की सरकारी कार्रवाई की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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