278 पृष्ठों की पुस्तक में जीवन के संघर्ष, अकेलेपन, रिश्तों, उम्मीद और बाइपोलर डिसऑर्डर से जुड़े अनुभवों को मानवीय दृष्टि से किया गया प्रस्तुत
Mysuru Desk, 🌐 tajnews.in | Monday, 17 August, 2026, 6:53:00 PM IST.

tajnews.in | मैसूरु: दिवंगत संतोष (सैम) नायर की आत्मकथा ‘Silver Linings in the Dark Sky’ का रविवार शाम होटल रॉयल इन में विमोचन किया गया। पुस्तक के लोकार्पण समारोह में संतोष नायर के मित्रों, प्रशंसकों, लेखकों, पूर्व सहयोगियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने पुस्तक को संतोष नायर के जीवन, संघर्ष और लेखन प्रतिभा को समझने का माध्यम बताते हुए मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में संवेदनशीलता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
278 पृष्ठों की इस आत्मकथा का संपादन डॉ. अलोक गुप्ता, पीएचडी ने किया है और इसका प्रकाशन पिंक लोटस, वाराणसी ने किया है। विमोचन के अवसर पर डॉ. अलोक गुप्ता ने घोषणा की कि पुस्तक की बिक्री से प्राप्त राशि PM CARES Fund में दान की जाएगी।

जीवन के उजले और अंधेरे दोनों पक्षों को सामने लाती है पुस्तक
पुस्तक में संतोष नायर के जीवन के विभिन्न अनुभवों को उनकी महत्वाकांक्षा, अकेलेपन, रिश्तों, गलतियों, पीड़ा और उम्मीद जैसे पहलुओं के साथ सामने रखा गया है। वक्ताओं के अनुसार, आत्मकथा का महत्व इस बात में भी है कि इसमें जीवन के केवल सफल और सकारात्मक पक्षों को नहीं, बल्कि कठिन दौर और व्यक्तिगत संघर्षों को भी जगह दी गई है।
वरिष्ठ पत्रकार बृज खंडेलवाल ने कहा कि यह पुस्तक संतोष नायर की लेखन प्रतिभा को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य, विशेष रूप से बाइपोलर डिसऑर्डर, को समझने और इससे जूझ रहे लोगों के प्रति संवेदनशील होने का संदेश देती है।
मुक्ता गुप्ता ने संतोष नायर की लेखनी को ईमानदार और बेबाक बताते हुए कहा कि पुस्तक में उनके जीवन के उजले और अंधेरे दोनों पहलुओं को संवेदनशीलता के साथ सामने रखा गया है। उनके अनुसार, पुस्तक पाठकों को संतोष नायर के व्यक्तित्व और उनके अनुभवों के करीब ले जाती है।
संपादक डॉ. अलोक गुप्ता ने कहा कि संतोष नायर को केवल उनकी बीमारी के संदर्भ में देखना उनके व्यक्तित्व को सीमित करना होगा। वे पेशेवर, यात्री, लेखक, मित्र और संवेदनशील इंसान भी थे। उन्होंने कहा कि उनकी कहानी यह समझने में मदद करती है कि मानसिक स्वास्थ्य की चुनौती से जूझ रहे व्यक्ति की पहचान केवल उसकी बीमारी से नहीं होती, बल्कि उसके भीतर एक पूरा व्यक्तित्व और जीवन अनुभव मौजूद होता है।
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चुप्पी और कलंक तोड़ने की जरूरत
विमोचन समारोह में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में मौजूद चुप्पी और कलंक का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। जगन बेंजामिन ने कहा कि संतोष नायर की आत्मकथा व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी से आगे बढ़कर समाज के लिए एक संदेश देती है।
उन्होंने मानसिक बीमारी को लेकर मौजूद सामाजिक धारणाओं और झिझक को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को समय पर समझ, सहयोग और उपचार मिल सके।
पुस्तक में बाइपोलर डिसऑर्डर से जुड़े संतोष नायर के अनुभवों और उससे पैदा हुई जटिल परिस्थितियों को भी मानवीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। उनके जीवन के अनुभवों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य को केवल चिकित्सकीय विषय के रूप में नहीं, बल्कि व्यक्ति, परिवार और समाज से जुड़े व्यापक मानवीय विषय के रूप में देखने की जरूरत सामने आती है।
बीमारी के पीछे भी एक पूरा इंसान होता है
पुस्तक के विमोचन के दौरान सामने आए विचारों में एक महत्वपूर्ण बात यह रही कि किसी व्यक्ति को उसकी बीमारी तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।
डॉ. अलोक गुप्ता ने संतोष नायर के विभिन्न व्यक्तित्व पक्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे केवल एक मरीज नहीं थे। उनके जीवन में पेशेवर उपलब्धियां थीं, यात्राओं के अनुभव थे, लेखन था, मित्रताएं थीं और संवेदनशील मानवीय पक्ष भी था।
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर चर्चा करते समय यह दृष्टिकोण महत्वपूर्ण हो जाता है। किसी व्यक्ति की बीमारी उसके व्यक्तित्व का केवल एक हिस्सा हो सकती है। उसके सपने, संबंध, क्षमताएं, संघर्ष और उपलब्धियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती हैं।
‘Silver Linings in the Dark Sky’ इसी मानवीय पक्ष को सामने लाने वाली पुस्तक के रूप में समारोह में चर्चा का केंद्र बनी।
चार्टर्ड अकाउंटेंट थे संतोष नायर
संतोष नायर चार्टर्ड अकाउंटेंट रहे और उन्होंने विभिन्न देशों में काम करने के साथ वहां जीवन भी बिताया। उनके जीवन में पेशेवर अनुभवों के साथ यात्राएं, लेखन और व्यक्तिगत संघर्ष भी जुड़े रहे।
उनका निधन 4 मई 2024 को हुआ था। उनके मित्रों और सहयोगियों ने उनके जीवन तथा अनुभवों को पुस्तक के माध्यम से सहेजने का प्रयास किया है।
आत्मकथा के माध्यम से उनके जीवन के ऐसे पक्षों को सामने लाया गया है जो सामान्य परिचय से आगे जाकर उनके व्यक्तित्व को समझने में मदद करते हैं। पुस्तक में उपलब्धियों के साथ कमजोरियों, रिश्तों, अकेलेपन, पीड़ा और उम्मीद को भी स्थान दिया गया है।
कठिन दौर में उम्मीद की तलाश का संदेश
‘Silver Linings in the Dark Sky’ शीर्षक अपने आप में भी उम्मीद और कठिन परिस्थितियों के बीच सकारात्मक पक्ष तलाशने की ओर संकेत करता है। समारोह में वक्ताओं ने पुस्तक को इसी व्यापक मानवीय संदर्भ से जोड़कर देखा।
जीवन में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां कई बार व्यक्ति को अकेलेपन और सामाजिक दूरी की ओर ले जा सकती हैं। ऐसे समय में परिवार, मित्रों और समाज की संवेदनशील भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बातचीत करना, समस्या को समझना और जरूरत पड़ने पर उपचार तथा सहयोग उपलब्ध कराना जागरूक समाज की जिम्मेदारी का हिस्सा है।
संतोष नायर की आत्मकथा इस विषय पर संवाद का एक माध्यम बन सकती है। व्यक्तिगत अनुभवों को सार्वजनिक रूप से साझा करने वाली ऐसी रचनाएं मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को केवल आंकड़ों या चिकित्सकीय शब्दावली तक सीमित रखने के बजाय उन्हें मानवीय अनुभवों से जोड़ती हैं।
पुस्तक के माध्यम से स्मृति और संवाद को आगे बढ़ाने की कोशिश
किसी दिवंगत व्यक्ति के जीवन पर आधारित पुस्तक केवल स्मृतियों का संग्रह नहीं होती। वह उस व्यक्ति के अनुभवों, विचारों और जीवन के विभिन्न पक्षों को आगे की पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी बन सकती है।
संतोष नायर की आत्मकथा के विमोचन में उनके मित्रों, लेखकों, पूर्व सहयोगियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने भी उनके जीवन से जुड़े संबंधों और स्मृतियों को सामने रखा। वक्ताओं ने उनके लेखन और व्यक्तित्व को याद करते हुए पुस्तक को उनके जीवन को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
पुस्तक की बिक्री से प्राप्त राशि PM CARES Fund में दान करने की घोषणा ने विमोचन को एक सामाजिक पहल से भी जोड़ा। डॉ. अलोक गुप्ता की ओर से की गई इस घोषणा के अनुसार, पुस्तक से होने वाली आय को इस उद्देश्य के लिए दान किया जाएगा।
विमोचन समारोह का समग्र संदेश यही रहा कि संतोष नायर के जीवन और लेखन को याद करने के साथ मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषय पर समाज में अधिक संवेदनशील और खुला संवाद भी आवश्यक है।
‘Silver Linings in the Dark Sky’ के माध्यम से संतोष नायर के जीवन के संघर्ष, अनुभव और उम्मीद को शब्दों में सहेजने की कोशिश की गई है। यह पुस्तक उनके मित्रों और परिचितों के लिए स्मृति का दस्तावेज होने के साथ उन पाठकों के लिए भी संवाद का माध्यम बन सकती है, जो मानसिक स्वास्थ्य और मानवीय संवेदनाओं को अधिक गहराई से समझना चाहते हैं।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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