विश्व एनेस्थीसिया दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने मरीजों की निगरानी और दर्द प्रबंधन में विशेषज्ञों के योगदान को बताया महत्वपूर्ण
आगरा डेस्क | 🌐 tajnews.in | शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 | रात 8:27 बजे

आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएन मेडिकल कॉलेज) के एनेस्थीसिया विभाग में विश्व एनेस्थीसिया दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें सुरक्षित सर्जरी, ऑपरेशन के दौरान मरीजों की निगरानी, दर्द प्रबंधन और सर्जरी के बाद सुरक्षित रिकवरी में एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की भूमिका पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में विभाग की सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. उमा श्रीवास्तव और डॉ. आदित्य को चिकित्सा शिक्षा एवं विभाग के विकास में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि आधुनिक सर्जरी में एनेस्थीसिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की जिम्मेदारी केवल मरीज को बेहोश करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि ऑपरेशन के दौरान रक्तचाप, नाड़ी, ऑक्सीजन स्तर और अन्य महत्वपूर्ण शारीरिक संकेतों की लगातार निगरानी करना भी इसमें शामिल है।

- एसएन मेडिकल कॉलेज में विश्व एनेस्थीसिया दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ।
- प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने सुरक्षित सर्जरी में एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की भूमिका बताई।
- डॉ. उमा श्रीवास्तव और डॉ. आदित्य को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
- सर्जरी से पहले मरीज का आकलन, ऑपरेशन के दौरान निगरानी और बाद में दर्द प्रबंधन पर जोर दिया गया।
सर्जरी से पहले और बाद तक अहम भूमिका
कार्यक्रम में बताया गया कि एनेस्थीसिया विशेषज्ञ सर्जरी से पहले मरीज की शारीरिक स्थिति का आकलन करते हैं। इससे मरीज की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और संभावित जोखिमों को समझने में मदद मिलती है। ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाती है। सर्जरी के बाद दर्द नियंत्रित करने और सुरक्षित रिकवरी में भी एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की सेवाएं ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं हैं। गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू), ट्रॉमा केयर, आपातकालीन चिकित्सा और प्रसव के दौरान दर्द नियंत्रण जैसी सेवाओं में भी उनकी विशेषज्ञता महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में एनेस्थीसिया से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और आम लोगों को इसकी वास्तविक भूमिका के बारे में जागरूक करने पर जोर दिया गया।
सेवानिवृत्त प्रोफेसरों को किया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान डॉ. उमा श्रीवास्तव और डॉ. आदित्य को शॉल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने चिकित्सा शिक्षा और विभाग के विकास में उनके योगदान को याद किया तथा उनके अनुभव और मार्गदर्शन के प्रति आभार जताया।

कार्यक्रम में डॉ. योगिता द्विवेदी, डॉ. अर्चना अग्रवाल, डॉ. अमृता गुप्ता, डॉ. राजीव पुरी, डॉ. अपूर्वा मित्तल, डॉ. दीपिका, डॉ. सुप्रिया, डॉ. रजनी, डॉ. पालिका, डॉ. कौस्तुभ, डॉ. अंकिता, डॉ. राहुल, डॉ. विनीता और डॉ. उमा सहित विभाग के चिकित्सकों, रेजिडेंट डॉक्टरों तथा मेडिकल विद्यार्थियों ने भाग लिया।
मरीज की सुरक्षा के लिए जागरूकता जरूरी
कार्यक्रम में सुरक्षित सर्जरी और बेहतर उपचार के लिए एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की भूमिका को समझने की जरूरत पर जोर दिया गया। सर्जरी से पहले मरीज का उचित मूल्यांकन, ऑपरेशन के दौरान सतत निगरानी और सर्जरी के बाद दर्द का प्रभावी प्रबंधन मरीज की सुरक्षा और देखभाल के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
विश्व एनेस्थीसिया दिवस हर वर्ष 16 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिन 16 अक्टूबर 1846 को बोस्टन के मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल में ईथर एनेस्थीसिया के सार्वजनिक प्रदर्शन की ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है। इस प्रदर्शन ने सर्जरी के दौरान दर्द से राहत देने वाली आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।






