अमेरिकी ड्रग सूची में भारत का नाम, फिर भी मोदी सरकार के प्रयासों का अमेरिका ने किया स्वागत

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23 देशों की सूची में भारत, चीन और पाकिस्तान भी शामिल; सूची में नाम होना सरकार की नाकामी का प्रमाण नहीं

अंतरराष्ट्रीय डेस्क, 🌐 tajnews.in | गुरुवार, 17 सितंबर 2026, 12:03:06 AM IST

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अंतरराष्ट्रीय डेस्क

tajnews.in | नई दिल्ली। अमेरिका ने वित्त वर्ष 2027 के लिए उन देशों की सूची जारी की है, जिन्हें प्रमुख ड्रग ट्रांजिट या प्रमुख अवैध ड्रग उत्पादन वाले देशों के रूप में चिन्हित किया गया है। इस सूची में भारत समेत 23 देश शामिल हैं। हालांकि, भारत का नाम सूची में होने के बावजूद अमेरिकी निर्धारण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार की अवैध अफीम की खेती पर अंकुश लगाने तथा सप्लाई चेन की विश्वसनीयता मजबूत करने के प्रयासों का उल्लेख किया गया है।

अमेरिकी निर्धारण में भारत के साथ नशीली दवाओं के नियंत्रण के क्षेत्र में सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की गई है। अमेरिका ने भारत के साथ ड्रग नीति और कानून प्रवर्तन के क्षेत्र में सहयोग आगे बढ़ाने की बात कही है।

HIGHLIGHTS
  • अमेरिका ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जारी की 23 प्रमुख ड्रग ट्रांजिट व उत्पादक देशों की सूची।
  • भारत का नाम शामिल, लेकिन मोदी सरकार के सख्त कदमों और सप्लाई चेन सुधारों की अमेरिका ने की तारीफ।
  • अफगानिस्तान, बोलीविया, म्यांमार और कोलंबिया को रखा गया ‘विफल’ देशों की अलग श्रेणी में।
  • अमेरिका ने भारत के साथ नशीली दवाओं की रोकथाम और कानून प्रवर्तन सहयोग बढ़ाने की जताई प्रतिबद्धता।

भारत का नाम सूची में क्यों आया?

अमेरिका की यह सूची किसी देश की सरकार को सीधे तौर पर ड्रग नियंत्रण में विफल घोषित करने वाली सूची नहीं है। किसी देश का इस सूची में शामिल होना उसकी भौगोलिक, वाणिज्यिक और आर्थिक परिस्थितियों से भी जुड़ा हो सकता है।

यदि किसी देश के क्षेत्र से नशीले पदार्थों या उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की आवाजाही होती है अथवा वहां अवैध उत्पादन की परिस्थितियां मौजूद हैं, तो उसे इस श्रेणी में रखा जा सकता है। यह स्थिति उस देश की सरकार द्वारा नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के बावजूद भी हो सकती है। इसलिए भारत का इस सूची में शामिल होना अपने आप में यह निष्कर्ष नहीं है कि अमेरिका ने भारत सरकार को नशीली दवाओं के खिलाफ कार्रवाई में विफल माना है।

भारत के प्रयासों का भी अमेरिकी दस्तावेज में उल्लेख

भारत के संदर्भ में अमेरिकी निर्धारण का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें अवैध अफीम की खेती से निपटने और सप्लाई चेन की निगरानी तथा विश्वसनीयता मजबूत करने के भारत के प्रयासों का उल्लेख किया गया है।

इससे मामले के दो पहलू सामने आते हैं। एक तरफ भारत को प्रमुख ड्रग ट्रांजिट या अवैध ड्रग उत्पादन से जुड़े देशों की सूची में रखा गया है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका भारत के साथ नशीली दवाओं के खिलाफ सहयोग को आगे बढ़ाने की बात कर रहा है। अर्थात सूची में शामिल किए जाने और भारत के साथ सहयोग जारी रखने की बात—दोनों बातें अमेरिकी निर्धारण में एक साथ मौजूद हैं।

23 देशों में भारत के साथ चीन और पाकिस्तान भी

वित्त वर्ष 2027 के लिए अमेरिकी सूची में भारत के अलावा चीन और पाकिस्तान समेत कुल 23 देशों को शामिल किया गया है।

इन देशों में अफगानिस्तान, बहामास, बेलीज, बोलीविया, म्यांमार, चीन, कोलंबिया, कोस्टा रिका, डोमिनिकन रिपब्लिक, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला, हैती, होंडुरास, भारत, जमैका, लाओस, मैक्सिको, निकारागुआ, पाकिस्तान, पनामा, पेरू और वेनेजुएला शामिल हैं।

चीन के संदर्भ में अमेरिकी दस्तावेज में उन रसायनों की आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं का भी उल्लेख किया गया है, जिनका इस्तेमाल अवैध सिंथेटिक ड्रग्स के निर्माण में किया जा सकता है।

पाकिस्तान भी सूची में, लेकिन अलग है ‘विफल’ देशों की श्रेणी

पाकिस्तान को भी प्रमुख ड्रग ट्रांजिट या अवैध ड्रग उत्पादन वाले देशों की सूची में रखा गया है। हालांकि, इस सूची में शामिल सभी देशों को अमेरिकी निर्धारण ने समान रूप से ड्रग नियंत्रण में विफल घोषित नहीं किया है।

अमेरिकी निर्धारण में अलग से उन देशों की पहचान की गई है जिन्हें पिछले 12 महीनों के दौरान अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण दायित्वों को पूरा करने और आवश्यक कदम उठाने में ‘स्पष्ट रूप से विफल’ माना गया। यह अलग श्रेणी है और इसमें अफगानिस्तान, बोलीविया, म्यांमार और कोलंबिया को रखा गया है। इस अंतर को समझना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ‘प्रमुख ड्रग ट्रांजिट या उत्पादन वाला देश’ और ‘ड्रग नियंत्रण दायित्वों को पूरा करने में स्पष्ट रूप से विफल देश’ एक ही श्रेणी नहीं हैं।

भारत के लिए इसका क्या अर्थ है?

भारत के लिए अमेरिकी सूची का अर्थ समझने के लिए दोनों पहलुओं को एक साथ देखना जरूरी है। पहला, अमेरिका ने भारत को उन देशों की सूची में रखा है जहां भौगोलिक, आर्थिक या कारोबारी परिस्थितियों के कारण नशीले पदार्थों अथवा उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की आवाजाही और अवैध गतिविधियों की चुनौती मौजूद है।

दूसरा, उसी निर्धारण में भारत सरकार द्वारा अवैध अफीम की खेती रोकने और सप्लाई चेन की निगरानी मजबूत करने के प्रयासों का उल्लेख किया गया है। इसलिए केवल सूची में भारत का नाम देखकर इसे भारत सरकार के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई के रूप में देखना पूरे दस्तावेज की तस्वीर पेश नहीं करता। सूची का उद्देश्य उन देशों की पहचान करना है जो अमेरिकी कानून के तहत अंतरराष्ट्रीय ड्रग उत्पादन या ट्रांजिट की दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

भारत में भी नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई जारी

भारत में नशीली दवाओं की तस्करी और अवैध खेती पर रोक लगाने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस की ओर से कार्रवाई की जाती रही है। नशीली दवाओं की तस्करी रोकने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग भी इस प्रयास का हिस्सा है।

भारत के सामने चुनौती केवल देश के भीतर होने वाली गतिविधियों तक सीमित नहीं है। देश की भौगोलिक स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय ड्रग ट्रांजिट नेटवर्क से जुड़ी चुनौतियां भी मौजूद हैं। इसके अलावा रसायनों और वैध दवाओं की सप्लाई चेन के दुरुपयोग को रोकना भी एक महत्वपूर्ण विषय है।

असली सवाल कार्रवाई की निरंतरता का

अमेरिकी सूची में भारत का नाम आना निश्चित रूप से ऐसा तथ्य है जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। लेकिन अमेरिकी निर्धारण में भारत के साथ सहयोग जारी रखने और भारत सरकार के प्रयासों का उल्लेख भी महत्वपूर्ण है।

इस पूरे मामले को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर नशीली दवाओं की तस्करी, अवैध अफीम की खेती, सिंथेटिक ड्रग्स और उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की सप्लाई चेन की निगरानी के संदर्भ में देखना अधिक महत्वपूर्ण है। नशीले पदार्थों की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है। इसका संबंध सार्वजनिक स्वास्थ्य, सीमा सुरक्षा, संगठित अपराध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से भी है। भारत के लिए चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि देश की जमीन और सप्लाई चेन अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क के लिए सुरक्षित रास्ता न बनें।

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Thakur Pawan Singh

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