टेम्स के किनारे गूंजेगी गंगा आरती, आगरा से स्वागत का संदेश
यमुना से टेम्स तक नदियों के सम्मान का संदेश | लंदन, 13 सितंबर
प्रमुख अंश (Highlights):
- लंदन में ऐतिहासिक संगम: ग्रीनविच के ओल्ड रॉयल नेवल कॉलेज में चिन्मय मिशन यूके और टोटली टेम्स के सहयोग से टेम्स नदी के किनारे पहली बार भव्य गंगा आरती का आयोजन।
- यमुना से टेम्स तक का संदेश: आगरा के रिवर कनेक्ट कैंपेन ने किया स्वागत; नदियां केवल जल की धारा नहीं बल्कि सभ्यताओं की जीवन-रेखाएं हैं।
- आस्था के साथ कर्तव्य की पुकार: दीप जलाना आस्था है, लेकिन प्रदूषण और घटते प्रवाह के बीच नदियों को अविरल व स्वच्छ रखना समाज की प्राथमिक जिम्मेदारी।
- नदियों की साझा वैश्विक चुनौतियां: गंगा, यमुना या टेम्स—प्रदूषण, अतिक्रमण और मानवीय दबाव से लड़कर ही मानव सभ्यता का अस्तित्व सुरक्षित रह सकता है।

बृज खंडेलवाल
संयोजक, River Connect Campaign, Agra | वरिष्ठ पत्रकार व पर्यावरणविद्
नदी संरक्षण, यमुना पुनर्जीवन, प्राकृतिक जलस्रोतों और वैश्विक पर्यावरण चेतना पर दशकों से निरंतर जमीनी संघर्षरत व मुखर लेखक।
क्या गंगा की आरती टेम्स के किनारे हो सकती है? रविवार को लंदन में इसका सुंदर जवाब देखने को मिलेगा। Greenwich के ऐतिहासिक Old Royal Naval College में गंगा आरती का विशेष आयोजन किया जा रहा है।
Chinmaya Mission UK द्वारा Totally Thames के सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम रविवार को शाम चार बजे से रात आठ बजे तक चलेगा। इसका मुख्य आकर्षण शाम 7:15 बजे Royal Steps पर होने वाली गंगा आरती होगी।
आगरा के River Connect Campaign के संयोजक बृज खंडेलवाल ने इस आयोजन का स्वागत करते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि दुनिया की नदियों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का संदेश भी है।
उन्होंने कहा कि “गंगा की आरती टेम्स के किनारे होना भारतीय नदी संस्कृति और ब्रिटेन की ऐतिहासिक नदी संस्कृति का सुंदर संगम है। यमुना से टेम्स तक हमारा संदेश एक ही है—नदियां केवल पानी की धाराएं नहीं, बल्कि जीवन की रेखाएं हैं।”
नदी को जीवित पारिस्थितिकी तंत्र मानने का संकल्प
River Connect Campaign पिछले एक दशक से यमुना को स्वच्छ, अविरल और जीवंत बनाने की मुहिम चला रहा है। अभियान का मानना है कि नदी को केवल पूजा की वस्तु नहीं, बल्कि जीवित पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में देखना होगा।
बृज खंडेलवाल ने कहा कि भारत में गंगा और यमुना के किनारे आरती की परंपरा सदियों पुरानी है। अब टेम्स के किनारे यह परंपरा पहुंचना दुनिया को यह याद दिलाने का अवसर है कि नदियों की सीमाएं नहीं होतीं।
“दीप जलाना आस्था है, लेकिन नदी को स्वच्छ और अविरल रखना हमारी जिम्मेदारी है। अगर नदी में गंदा पानी गिरता रहे और हम केवल आरती करते रहें, तो नदी एक दिन हमसे सवाल जरूर पूछेगी,” उन्होंने कहा।
यमुना से टेम्स तक साझा पर्यावरणीय सरोकार
River Connect Campaign इस अवसर को अपने संदेश “Caring for Life Lines — From Yamuna to Thames” से जोड़ता है। अभियान का कहना है कि दुनिया की नदियां अलग-अलग नामों से जानी जाती हैं, लेकिन उनकी चुनौतियां लगभग एक जैसी हैं—प्रदूषण, अतिक्रमण, घटता प्रवाह और बढ़ता मानवीय दबाव।
टेम्स के किनारे जब दीप जलेंगे और गंगा आरती की धुन गूंजेगी, तब यह दृश्य केवल भारतीय संस्कृति का प्रदर्शन नहीं होगा। यह उस साझा जिम्मेदारी की याद भी दिलाएगा, जो हर समाज की अपनी नदी के प्रति है।
गंगा से टेम्स और यमुना से दुनिया तक संदेश साफ है—नदियां बचेंगी, तभी सभ्यताएं बचेंगी।
— बृज खंडेलवाल
संयोजक, River Connect Campaign, Agra
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