राम मंदिर गबन कांड: SIT रिपोर्ट में 5 बड़े खुलासे, 70 बार हुई चोरी, 6 गिरफ्तार, पढ़ें पूरी इनसाइड स्टोरी

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Uttar Pradesh Desk, 🌐 tajnews.in | Tuesday, July 07, 2026, 01:04:32 AM IST

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सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता – अयोध्या कवरेज

अयोध्या: ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बहुत बड़ा हड़कंप मच गया है। क्योंकि, चढ़ावा गबन और धांधली के मामले में विशेष जांच दल (SIT) की 9 पेज की जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। इस रिपोर्ट ने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था की पूरी पोल खोल दी है। ट्रस्ट की हालिया बैठक में इस रिपोर्ट को विस्तार से रखा गया था। परिणामस्वरूप, यह विस्तृत ब्यौरा मीडिया और जनता के सामने सार्वजनिक हो गया है। SIT ने अपनी गहन जांच में उन सभी धागों को खोल दिया है। जिनसे यह पूरा गबन और भ्रष्टाचार सीधे तौर पर जुड़ा था। इसलिए, पूरे देश के करोड़ों श्रद्धालुओं में आज भारी रोष है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अतः, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। आइए, इस पूरे घोटाले के 5 सबसे बड़े खुलासों पर विस्तार से नजर डालते हैं।

SIT रिपोर्ट के 5 मुख्य HIGHLIGHTS
  • CCTV में 70 बार चोरी: जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में एकदम स्पष्ट किया है। गणना प्रक्रिया के दौरान भेंट की धनराशि की चोरी साबित हो गई है। CCTV फुटेज में लगभग 70 बार कर्मियों को नोट छिपाते पकड़ा गया है।
  • लाखों रुपये का कैश बरामद: SIT ने कार्रवाई करते हुए 78.94 लाख रुपये बरामद किए हैं। इसके अतिरिक्त, गणना कक्ष के पास स्थित एक बाथरूम से 2.25 लाख रुपये मिले हैं।
  • SOP का खुला उल्लंघन: सुरक्षा के लिए बने सभी कड़े नियमों को ताक पर रखा गया। बिना जेब वाले कपड़े पहनने का नियम तोड़ा गया। साथ ही, CCTV फुटेज को 180 दिन के बजाय 45 दिन में डिलीट किया गया।
  • सुप्रीम कोर्ट पहुंची बात: इस महा-घोटाले के बाद राजद सांसद सुधाकर सिंह सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। उन्होंने सीबीआई (CBI) जांच की मांग की है। इसके अलावा, चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है।

खुलासा 1: CCTV में रंगे हाथों पकड़ी गई चोरी

चोरी का पक्का प्रमाण अब जांच एजेंसी के पास मौजूद है। SIT ने अपनी रिपोर्ट में इस बात को पूरी तरह स्पष्ट किया है। गणना प्रक्रिया के दौरान भेंट की धनराशि की चोरी प्रथम दृष्टया साबित हो गई है। यह कोई अफवाह नहीं है। क्योंकि, CCTV फुटेज में लगभग 70 बार गणना कर्मियों को देखा गया है। वे बेशर्मी से नोट छिपाते या हटाते हुए रंगे हाथों पकड़े गए हैं। इसलिए, यह एक बहुत बड़ा और अक्षम्य अपराध है। कर्मचारियों के हौसले इतने बुलंद थे कि वे कैमरे से भी नहीं डरे। परिणामस्वरूप, श्रद्धालुओं की गाढ़ी कमाई लूटी गई।

खुलासा 2: निरंतर और सुनियोजित थी लूट की प्रक्रिया

रिपोर्ट में यह बिल्कुल साफ कहा गया है। यह गबन कोई एक दिन की या आकस्मिक घटना नहीं थी। CCTV साक्ष्यों के आधार पर यह पूरी तरह स्पष्ट है। 27 अप्रैल से लेकर 5 जून 2026 तक यह खेल लगातार चला। अतः, यह चोरी बार-बार दोहराई जाने वाली एक व्यवस्थित गतिविधि थी। चोरों का एक पूरा नेटवर्क वहां काम कर रहा था। वे हर दिन एक तय योजना के तहत नकदी पार करते थे। इसके अतिरिक्त, किसी भी बड़े अधिकारी ने इसे रोकने का प्रयास नहीं किया। वास्तव में, यह लापरवाही नहीं बल्कि एक मिलीभगत थी।

खुलासा 3: जानबूझकर बरती गई सुरक्षा में लापरवाही

ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के बीच एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) मौजूद थी। यह समझौता वर्ष 2025 में ही हो गया था। हालांकि, SIT ने पाया कि नियमों का जानबूझकर उल्लंघन किया गया। हुंडी खोलने से लेकर बैंक में जमा करने तक कोई नियम नहीं माना गया। बिना जेब वाले कपड़े पहनने का कड़ा नियम था। परंतु, इसका पालन बिल्कुल नहीं हुआ। सुरक्षा गार्डों (SIS) ने भी कर्मचारियों की ठीक से तलाशी नहीं ली। इसके अतिरिक्त, CCTV फुटेज को 180 दिन तक सुरक्षित रखना था। लेकिन, उसे 45 दिन में ही नियम विरुद्ध डिलीट कर दिया गया। इसलिए, यह एक बहुत बड़ी और गहरी साजिश है।

खुलासा 4: 6 मुख्य आरोपियों पर कसा कड़ा शिकंजा

जांच के दौरान कई लोगों की भूमिका अत्यंत संदिग्ध पाई गई है। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके अलावा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रमाशंकर मिश्रा भी शक के घेरे में हैं। इनके खिलाफ आपराधिक दुर्विनियोग का केस दर्ज करने की सिफारिश हुई है। षड्यंत्र की गंभीर धाराओं में भी मुकदमा चलेगा। SIT ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 8 लोगों को गिरफ्तार भी किया है। इन सभी से फिलहाल कड़ी पूछताछ चल रही है। अतः, कई और नाम सामने आ सकते हैं।

खुलासा 5: वरिष्ठ स्तर पर पर्यवेक्षण में भारी विफलता

रिपोर्ट में अनिल मिश्रा को वरिष्ठ स्तर पर सीधे जिम्मेदार ठहराया गया है। उनकी भारी पर्यवेक्षणीय विफलता के कारण ही यह चोरी संभव हुई। इसके अलावा, सुभाग श्रीवास्तव की कार्यशैली भी गहरे शक के घेरे में है। रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू की अनौपचारिक नियंत्रण प्रणाली पर बड़े सवाल उठे हैं। टिन्नू के पास बिना अधिकार के ही दानपात्रों (हुंडियों) की चाबियां थीं। उसने अपने भतीजे मनीष को भी वहां गिनती के लिए नौकरी दिलवाई। अतः, यह पूरा नेटवर्क गबन के लिए ही विशेष रूप से बना था।

लाखों की नकदी बरामद, चांदी की ईंटों पर स्थिति साफ

एसआईटी की जांच शुरू होने से ठीक पहले एक बड़ी कार्रवाई हुई थी। संदिग्ध कर्मचारियों के पास से लगभग 78.94 लाख रुपये बरामद किए गए। इसके अतिरिक्त, 4 जून को गिनती वाले कमरे के पास एक बाथरूम से भी नकदी मिली। वहां से 2.25 लाख रुपये का अतिरिक्त कैश बरामद किया गया। इसलिए, यह गबन कई करोड़ों में होने की प्रबल आशंका है। दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर चांदी की ईंटें गायब होने की अफवाहें थीं। हालांकि, SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, चांदी की चोरी का कोई शुरुआती सबूत नहीं मिला है। ट्रस्ट ने बताया है कि चांदी को पिघलाकर बार बना दिया गया है।

चंपत राय का इस्तीफा और सुप्रीम कोर्ट में याचिका

इस रिपोर्ट के आने के बाद ट्रस्ट में भारी भूचाल आ गया है। परिणामस्वरूप, चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से तुरंत इस्तीफा दे दिया है। ट्रस्ट ने नैतिक आधार पर उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया है। इसके अलावा, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण याचिका दायर हुई है। राजद सांसद सुधाकर सिंह ने यह याचिका दायर की है। उन्होंने अदालत से सीबीआई (CBI) जांच की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यह करोड़ों रामभक्तों की आस्था का सवाल है। इसलिए, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक निष्पक्ष कमेटी बननी चाहिए। जो पूरे वित्तीय लेनदेन की गहराई से जांच करे।

योगी आदित्यनाथ हुए सख्त, आगे क्या होगा?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर अत्यंत सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा है कि इस मामले में दोषी कोई भी हो, उसे बिल्कुल बख्शा नहीं जाएगा। SIT की रिपोर्ट मिलते ही तेज कार्रवाई शुरू कर दी गई है। SIT ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह जांच अभी पूरी तरह से प्रचलित है। यह मात्र एक प्रारंभिक और अंतरिम रिपोर्ट है। मामले में आगे की विस्तृत जांच अभी जारी है। अंतिम रिपोर्ट आना अभी बाकी है। इस घटना ने मंदिर प्रबंधन पर बहुत बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अतः, श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखने के लिए कड़ी कार्रवाई नितांत आवश्यक है।

(ताज न्यूज़ स्पष्टीकरण: यह रिपोर्ट पूर्णतः SIT द्वारा जारी की गई प्रारंभिक जांच और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। tajnews.in इस मामले से जुड़े सभी नए अपडेट्स आप तक सबसे पहले पहुंचाता रहेगा।)

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Pawan Singh Editor in Chief Taj News

Pawan Singh

Chief Editor, Taj News
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