ई-पंजीकरण के विरोध में वकीलों का बड़ा आंदोलन: आगरा तहसील बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का जोरदार स्वागत, काले कानून की वापसी पर बनी सहमति

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Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Monday, 06 July, 2026, 08:52:37 PM IST.

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tajnews.in | आगरा: उत्तर प्रदेश में जमीनों और संपत्तियों के ई-पंजीकरण (ऑनलाइन रजिस्ट्री) की नई व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों का आंदोलन अब बेहद उग्र और निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। ताजनगरी के सदर तहसील स्थित आगरा तहसील बार एसोसिएशन के नेतृत्व में वकीलों ने संपूर्ण प्रदेश में चलाए जा रहे इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए न्यायिक कार्यों को पूरी तरह ठप कर दिया है। इसी क्रम में, शासन स्तर पर वकीलों की आवाज मजबूती से बुलंद कर लखनऊ से लौटे बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और महासचिव समेत वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल का सोमवार को आगरा आगमन पर अभूतपूर्व स्वागत किया गया। दस्तावेज लेखक कपिल सिंघल के चैम्बर पर आयोजित एक गरिमामयी समारोह में वकीलों को माला एवं साफा पहनाकर उनके संघर्ष की सराहना की गई। वकीलों का स्पष्ट कहना है कि जब तक रजिस्ट्री से जुड़े इस जनविरोधी काले कानून को सरकार पूर्णतः वापस नहीं लेती, तब तक उनका यह सांगठनिक आंदोलन थमने वाला नहीं है।

HIGHLIGHTS
  1. ऐतिहासिक हुंकार: ई-पंजीकरण के विरोध में आगरा तहसील बार एसोसिएशन सदर के अधिवक्ताओं ने आंदोलन में झोंकी पूरी ताकत।
  2. लखनऊ में वार्ता: स्टाम्प महानिरीक्षक नेहा शर्मा के समक्ष बार एसोसिएशन के अध्यक्ष व महासचिव ने रखी काले कानून को वापस लेने की मांग।
  3. भव्य स्वागत: लखनऊ से सफल वार्ता कर लौटे प्रतिनिधिमंडल का सदर तहसील में साफा और माला पहनाकर किया गया नागरिक अभिनंदन।
  4. एकजुटता का संकल्प: दस्तावेज लेखक कपिल सिंघल के चैम्बर पर स्वल्पाहार कार्यक्रम में सैकड़ों अधिवक्ताओं ने संघर्ष जारी रखने की खाई कसम।

आगरा तहसील बार एसोसिएशन, सदर तहसील आगरा के आधिकारिक पत्राचार (रजि० नं० – AGR-00944/2026) से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह विवाद गत 4 जून 2026 को शासन द्वारा जारी किए गए एक नए वैधानिक आदेश के बाद उपजा है। इस आदेश के तहत संपत्तियों के ई-पंजीकरण की बाध्यता लागू की गई थी, जिसे वकीलों और दस्तावेज लेखकों ने आम जनता और अपने रोजगार के खिलाफ एक दमनकारी काला कानून करार दिया है। इस कानून के विरोध में पूरे उत्तर प्रदेश के दस्तावेज लेखक और अधिवक्ता लामबंद हो चुके हैं। आंदोलन को तार्किक परिणति तक पहुँचाने के लिए आगरा तहसील बार के ही अधिवक्ता अध्यक्ष लाल बहादुर राजपूत और महासचिव इन्द्रपाल सिंह के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय विधिक प्रतिनिधिमंडल गत 29 जून 2026 को देश की राजधानी और प्रदेश के मुख्य प्रशासनिक केंद्र लखनऊ पहुँचा था।

लखनऊ में इस प्रतिनिधिमंडल ने सूबे की स्टाम्प महानिरीक्षक नेहा शर्मा के सम्मुख प्रदेश के अन्य जनपदों से आए अधिवक्ता साथियों के साथ संयुक्त रूप से प्रतिभाग करते हुए अपनी दलीलें अत्यंत मजबूती के साथ रखीं। वकीलों ने स्टाम्प महानिरीक्षक को अवगत कराया कि अव्यावहारिक तकनीकी बाधाओं के कारण ई-पंजीकरण की यह व्यवस्था पूरी तरह से विफल साबित हो रही है, जिससे राजस्व का भी भारी नुकसान हो रहा है। प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से शम्भू नाथ तोमर, विजय कुमार कुलश्रेष्ठ और भगवान सिंह जैसे वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल रहे, जिन्होंने ४ जून २०२६ के विवादित शासनादेश को अविलंब वापस कराने के संदर्भ में शासन पर चौतरफा विधिक दबाव बनाया। इस सफल पैरवी और सकारात्मक आश्वासन के बाद सोमवार ६ जुलाई २०२६ को जैसे ही यह टीम आगरा सदर तहसील परिसर पहुंची, वहाँ का माहौल पूरी तरह से उत्सव में बदल गया।

तहसील सदर आगरा के प्रतिष्ठित दस्तावेज लेखक कपिल सिंघल ने इस विजय अभियान की खुशी में अपने चैम्बर पर एक विशेष स्वल्पाहार एवं अभिनंदन समारोह का आयोजन किया। इस दौरान कपिल सिंघल ने अपने साथी लेखकों के साथ मिलकर लखनऊ में वकीलों की आवाज बुलंद करने वाले अध्यक्ष लाल बहादुर राजपूत, महासचिव इन्द्रपाल सिंह सहित शम्भू नाथ तोमर, विजय कुमार कुलश्रेष्ठ और भगवान सिंह का साफा बांधकर व गगनभेदी नारों के बीच माला पहनाकर जोरदार स्वागत किया। अधिवक्ताओं ने इस अवसर पर मिष्ठान वितरण कर अपनी सांगठनिक जीत का संकल्प दोहराया और कहा कि यह स्वागत उनके व्यक्तिगत आदर का नहीं, बल्कि संपूर्ण अधिवक्ता समाज की एकजुटता का प्रमाण है।

इस ऐतिहासिक सांगठनिक और गरिमामयी आयोजन में बार एसोसिएशन के संरक्षक मण्डल और कार्यकारिणी के दर्जनों वरिष्ठ पदाधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। समारोह में प्रमुख रूप से राजेन्द्र कुमार कुलश्रेष्ठ, अमर नाथ पाठक, देवी सिंह राजपूत, प्रवीन कुमार गुप्ता, नारायण सिंह गौड, उपाध्यक्ष ज्ञानेश कुमार राजपूत, शिव नंदन शर्मा, कोषाध्यक्ष सुबोध कुमार शर्मा, संयुक्त सचिव मौ० निसार अहमद, प्रमोद कुमार यादव और ललित कुमार अग्रवाल ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके अतिरिक्त, कार्यकारिणी सदस्य लाखन कुमार, मोहन तिवारी, अशोक कुमार, लोक प्रताप सिंह के साथ-साथ देवेश कुमार राजपूत, ऋषि कुमार जादौन, संजय भर्तिया, राकेश वर्मा, शुभम कुलश्रेष्ठ, संदीप अग्रवाल, पंकज बघेल, मुकेश रोहतगी, ब्रजमोहन और रानू जैन आदि सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों ने अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। वकीलों ने साफ लहजे में जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस काले कानून को पूर्ण रूप से निरस्त नहीं किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक उग्र करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को विवश होंगे।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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