भरतभूषण तिवारी ‘फर्जी मुठभेड़’ कांड में गरमाई सियासत: आगरा में महामहिम राष्ट्रपति के नाम एडीएम को सौंपा ज्ञापन, उच्च स्तरीय न्यायिक या सीबीआई जांच की उठी मांग

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Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Wednesday, 1 July 2026, 08:42:15 PM IST

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आगरा: प्रख्यात समाजसेवी भरतभूषण तिवारी की पुलिस अभिरक्षा में कथित तौर पर हुई फर्जी मुठभेड़ में दर्दनाक मृत्यु का मामला अब पूरी तरह से गरमा गया है। इस संवेदनशील और संदिग्ध एनकाउंटर को लेकर देश के प्रबुद्ध समाज और मानवाधिकार संगठनों में कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर आक्रोश व्याप्त है। इसी क्रम में, अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा (रा.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं यूपी रत्न राजेंद्र नाथ त्रिपाठी के विशेष दिशा-निर्देशों के अनुपालन में महासभा की आगरा जिला इकाई ने प्रशासनिक स्तर पर जोरदार विरोध दर्ज कराया है। बुधवार को महासभा के वरिष्ठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की एक विशेष टीम ने कलेक्ट्रेट पहुँचकर अतिरिक्त जिला मजिैश्ट्रेट (ADM) यमुनाधर चौहान को भारत गणराज्य की महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक विस्तृत एवं कड़ा ज्ञापन सौंपा। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने घटना की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग को लेकर नारेबाजी भी की।

HIGHLIGHTS
  1. फर्जी मुठभेड़ का आरोप: समाजसेवी भरतभूषण तिवारी की आत्मसमर्पण व पुलिस अभिरक्षा के बाद हुई संदिग्ध मृत्यु पर ब्राह्मण महासभा ने उठाए गंभीर संवैधानिक सवाल.
  2. राष्ट्रपति से गुहार: राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र नाथ त्रिपाठी के निर्देश पर आगरा टीम ने एडीएम यमुनाधर चौहान को सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की।
  3. मुख्य मांगें: उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अथवा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने और साक्ष्य सार्वजनिक करने की मांग.
  4. न्याय की अपील: पीड़ित परिवार के लिए सुरक्षा, भारी आर्थिक मुआवजा, सरकारी नौकरी और दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध हत्या की धाराओं में मुकदमा चलाने की पुरजोर वकालत.
All India Brahmin Mahasabha Agra team submitting memorandum to ADM Yamunadhar Chauhan regarding Bharat Bhushan Tiwari encounter case

महामहिम राष्ट्रपति को भेजे गए आधिकारिक ज्ञापन में अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा (रा.) के जिला अध्यक्ष अनुज कुमार उपाध्याय ने मुख्य रूप से स्पष्ट किया कि समाजसेवी भरतभूषण तिवारी की यह मृत्यु पूरी तरह से संदेहास्पद परिस्थितियों में हुई है, जिसने सूबे की कानून व्यवस्था और बुनियादी मानवाधिकारों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। ज्ञापन के जरिए यह गंभीर मुद्दा उठाया गया है कि जब उक्त व्यक्ति ने पहले ही कानून के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था अथवा उसे पहले ही विधिवत पुलिस अभिरक्षा में ले लिया गया था, तो उसके बाद ऐसी कौन सी परिस्थितिियां उत्पन्न हुईं कि कथित मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई? यह पूरी घटना लोकतंत्र की मूल आत्मा और भारतीय संविधान की मूल भावनाओं के सर्वथा विपरीत है, जिसकी बिना किसी पक्षपात के त्वरित जांच होना बेहद आवश्यक है।

Official memorandum document submitted by All India Brahmin Mahasabha to President of India via Agra administration

महासभा ने इस पूरे प्रकरण को लेकर महामहिम के समक्ष कुल सात सूत्रीय कड़ी मांगें रखी हैं। प्रार्थी अनुज कुमार उपाध्याय के नेतृत्व में सौंपी गई इस प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पहली मुख्य मांग यह है कि समूचे घटनाक्रम की किसी माननीय उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में अथवा सीधे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से स्वतंत्र व व्यापक न्यायिक जांच कराई जाए। इसके साथ ही, एनकाउंटर से संबंधित बनाई गई संपूर्ण वीडियो रिकॉर्डिंग, पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट और मौके की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट को तत्काल प्रभाव से सार्वजनिक किया जाए, ताकि जनता और परिवार के सामने मौत की वास्तविक परिस्थितियां शीशे की तरह साफ हो सकें।

प्रशासनिक तंत्र पर दबाव बनाते हुए ज्ञापन में यह भी चेतावनी दी गई है कि इस संवेदनशील घटना से जुड़े जितने भी प्रत्यक्षदर्शी और चश्मदीद गवाह हैं, उन्हें तत्काल पुख्ता सुरक्षा मुहैया कराई जाए। यदि प्रशासनिक या विभागीय जांच के दौरान कोई भी छोटा या बड़ा पुलिस अधिकारी साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने, तथ्यों को छिपाने, झूठे सबूत गढ़ने अथवा जांच एजेंसियों को भ्रमित करने का दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध अत्यंत कठोर विभागीय एवं दंडात्मक विधिक कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, पीड़ित परिवार को मानसिक व सामाजिक आघात से उबारने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता राशि, पूर्ण सरकारी सुरक्षा और मृतक के आश्रितों में से किसी एक पात्र सदस्य को योग्यता के आधार पर सरकारी सेवा प्रदान करने की मांग की गई है।

अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा ने साफ तौर पर कहा है कि आरोपी और दागी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के नियमों के तहत सीधे हत्या (मर्डर) और अन्य सुसंगत एवं प्रासंगिक धाराओं में तत्काल मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष अभियोजन की शुरुआत की जाए। इस पूरी विधिक प्रक्रिया को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तथा अन्य सक्षम संवैधानिक संस्थाओं की सीधी और पैनी निगरानी में संपन्न कराया जाना चाहिए, ताकि आम जनमानस का देश की न्यायिक व्यवस्था और खाकी पर डगमगा रहा विश्वास पुनः बहाल हो सके।

प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम को सौंपे गए पत्र के अंत में पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय संविधान की सर्वोच्च संरक्षक होने के नाते महामहिम राष्ट्रपति महोदया इस अति गंभीर और अमानवीय विषय पर अपनी गहरी संवेदनशीलता और अटूट निष्पक्षता दिखाते हुए व्यक्तिगत रूप से आवश्यक हस्तक्षेप करेंगी। इससे न केवल बिलखते हुए पीड़ित परिवार को समय पर उचित न्याय मिल सकेगा, बल्कि भविष्य में उत्तर प्रदेश या देश के किसी अन्य कोने में ऐसी बर्बर और फर्जी प्रशासनिक घटनाओं की पुनरावृत्ति पर भी हमेशा के लिए पूर्ण विराम लग सकेगा।

इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक और राजनैतिक हलचल के दौरान आगरा जिला इकाई के प्रमुख पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। ज्ञापन सौंपने वाली टीम में जिला अध्यक्ष अनुज कुमार उपाध्याय के साथ मुख्य रूप से जिला प्रभारी Sanjay Sharma, महानगर उपाध्यक्ष राजीव शर्मा, जिला मीडिया प्रभारी अन्नु दुबे, जिला उपाध्यक्ष लोकेंद्र शर्मा, वरिष्ठ नेता संदेश शर्मा जी, विधानसभा अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश शर्मा, प्रबुद्ध सदस्य सुनील देवराती, रिन्कु पचौरी, निखिल लावनिया, भगवती शर्मा, श्याम तिवारी जी और भूपेंद्र शर्मा जी समेत भारी संख्या में समाज के गणमान्य लोग और युवा कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद रहे।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

Thakur Pawan Singh

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