अयोध्या चढ़ावा चोरी कांड में एक और महाधमाका: राम मंदिर ट्रस्ट के 400 निजी सुरक्षाकर्मी रडार पर, सालाना 12 करोड़ रुपये के सुरक्षा तंत्र पर उठ रहे बड़े सवाल

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Uttar Pradesh Desk, 🌐 tajnews.in | Wednesday, 1 July 2026, 06:05:30 PM IST

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अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हुए बहुचर्चित चढ़ावा चोरी कांड का दायरा अब केवल छोटे कर्मचारियों या गिनती कक्ष तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने एक बेहद पेचीदा और सुनियोजित बड़ी साजिश का रूप ले लिया है। अंदरूनी सूत्रों से मिली बेहद चौंकाने वाली जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसियों के रडार पर अब मंदिर परिसर में तैनात करीब 400 निजी सुरक्षाकर्मी आ गए हैं। इस पूरे तंत्र को एक समानांतर संगठित आपराधिक गिरोह की तरह संचालित किया जा रहा था। केंद्रीय और प्रांतीय सुरक्षा बलों के कड़े पहरे के बीच, मंदिर के पूर्व महासचिव चंपत राय के कार्यकाल में खड़ी की गई इस ‘निजी सेना’ के ऊपर ट्रस्ट द्वारा हर महीने लगभग एक करोड़ रुपये, यानी सालाना 12 करोड़ रुपये का भारी-भरकम भुगतान सीधे बैंक खातों के माध्यम से ‘नंबर एक’ में किया जा रहा था। अब एसआईटी इन सभी कर्मियों के रोस्टर, ड्यूटी चार्ट, सीसीटीवी फुटेज और एंट्री-एग्जिट रिकॉर्ड्स को खंगाल रही है।

HIGHLIGHTS
  1. जांच का महा-दायरा: राम मंदिर में तैनात करीब 400 निजी सुरक्षाकर्मियों की संदिग्ध भूमिका की जांच में जुटी प्रवर्तन निदेशालय (ED) और पुलिस टीमें।
  2. सालाना 12 करोड़ का खर्च: ट्रस्ट द्वारा प्रति माह 1 करोड़ रुपये का भारी भुगतान पाने वाली निजी सुरक्षा कंपनी के बड़े राजनीतिक संबंधों का हुआ सनसनीखेज खुलासा।
  3. लूट का विशेष रूट: दान-पात्रों से लेकर चढ़ावा आवागमन के मार्ग और काउंटिंग रूम तक तैनात थे निजी गार्ड, कड़े नियमों की अनदेखी पर उठ रहे सवाल।
  4. सिस्टम पर गंभीर शिकंजा: बैंक नियमों के बड़े उल्लंघन और ट्रस्ट की आंतरिक निगरानी प्रणाली के पूरी तरह ध्वस्त होने पर जांच एजेंसियों ने कसना शुरू किया शिकंजा।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा प्रशासनिक सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जब केंद्र और राज्य सरकार की अत्यधिक आधुनिक और वीवीआईपी सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही राम मंदिर परिसर की कमान संभाल रही थी, तो किस नियम के तहत इतनी भारी संख्या में निजी सुरक्षा बल की तैनाती की गई? सूत्रों का दावा है कि जिस विशिष्ट निजी सुरक्षा एजेंसी को यह ठेका दिया गया था, उसके तार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े बिहार के एक बेहद रसूखदार पदाधिकारी और पूर्व सांसद से सीधे जुड़े हुए हैं। इसी सुरक्षा कंपनी के जवानों को मंदिर के मुख्य दान-पात्रों, गिनती कक्ष और चढ़ावे के सबसे संवेदनशील आवागमन मार्गों (रूट) पर रणनीतिक रूप से तैनात किया गया था, जो अब वित्तीय हेरफेर के मुख्य गवाह और संदिग्ध बनते जा रहे हैं।

एसआईटी और जांच एजेंसियां अब इस मुख्य बिंदु पर गहराई से ध्यान केंद्रित कर रही हैं कि क्या चढ़ावे के सुरक्षित परिवहन के दौरान तय मानकों और कड़े नियमों का जानबूझकर उल्लंघन किया गया था? क्या इस निजी सुरक्षा बल के कुछ चुनिंदा अधिकारियों या जवानों को बिना किसी सघन सुरक्षा जांच के परिसर में आने-जाने और नकदी के रूट पर दखल देने की विशेष छूट दी गई थी? अगर गर्भगृह से लेकर काउंटिंग रूम तक चप्पे-चप्पे पर करोड़ों रुपये की लागत वाली यह सुरक्षा प्रणाली मुस्तैद थी, तो इतने महीनों तक इतनी बड़ी चोरी और वित्तीय गड़बड़ी कैसे बेखौफ अंदाज में चलती रही, इसने पूरे प्रबंधन तंत्र को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

अब यह तफ्तीश महज एक साधारण चोरी की घटना से कहीं आगे निकलकर बैंक नियमों के गंभीर उल्लंघन, राम मंदिर ट्रस्ट की आंतरिक वित्तीय निगरानी की भारी नाकामी और सुरक्षा मद में खर्च हुए करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन की तरफ मुड़ गई है। जांच अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे इन 400 निजी सुरक्षाकर्मियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और पूर्व महासचिव चंपत राय के प्रशासनिक आदेशों की कड़ियाँ आपस में जुड़ेंगी, इस संगठित आपराधिक गठजोड़ के पीछे छिपे कई बड़े सफेदपोश चेहरों से पूरी तरह पर्दा उठना तय है। उत्तर प्रदेश पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई के सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी इस मामले के लीक होते ही हड़कंप मच गया है।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

Thakur Pawan Singh

Chief Editor, Taj News


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