दिल्ली अग्निकांड: विवेक विहार में मौत का तांडव, बेड पर कंकाल बने 9 लोग; रूह कंपा देगी यह कहानी

National Desk, tajnews.in | Sunday, May 3, 2026, 07:15:10 PM IST

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National Desk | Delhi Fire Tragedy

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के विवेक विहार इलाके से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। रविवार की अलसुबह जब पूरी दुनिया गहरी नींद में थी, तब एक चार मंजिला रिहायशी इमारत साक्षात ‘यमराज’ के घर में तब्दील हो गई। यहाँ हुए भीषण अग्निकांड में एक ही परिवार के मासूम बच्चे सहित कुल नौ लोगों की जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गई। आग इतनी भयावह थी कि कई लोगों को अपने बिस्तर से उठने तक का मौका नहीं मिला और वे वहीं कंकाल बन गए। कुछ लोग अपनी जान बचाने के लिए छत की ओर भागे, लेकिन ऊपर जाने वाले दरवाजे पर लगे ताले ने उनकी मौत की इबारत लिख दी। चश्मदीदों के अनुसार, सुबह 3:30 बजे के करीब शुरू हुई इस तबाही ने महज कुछ ही घंटों में खुशियों भरे घरों को मलबे के ढेर में बदल दिया। शवों की स्थिति इस कदर खराब है कि अब उनकी पहचान केवल डीएनए (DNA) जांच के जरिए ही संभव हो पाएगी।

दिल्ली के विवेक विहार में भीषण आग की चपेट में आई चार मंजिला इमारत
HIGHLIGHTS
  1. भीषण तबाही: विवेक विहार के ब्लॉक B में स्थित इमारत में तड़के लगी आग, 9 लोगों की मौत की पुष्टि।
  2. बंद दरवाजा बना मौत: छत का रास्ता बंद होने के कारण सीढ़ियों पर ही झुलस गए तीन लोग।
  3. कंकाल बने शव: तीन लोग बिस्तर पर ही जलकर कोयला हो गए, शिनाख्त के लिए होगा डीएनए टेस्ट।
  4. संभावित कारण: एसी विस्फोट या शॉर्ट सर्किट को बताया जा रहा है आग लगने की मुख्य वजह।

नींद में ही समा गई नौ जिंदगियां – कैसे शुरू हुई आग?

प्राथमिक जांच और चश्मदीदों के बयानों के अनुसार, आग की शुरुआत इमारत की दूसरी मंजिल के पिछले हिस्से में स्थित एक एयर कंडीशनर (AC) में विस्फोट के कारण हुई। रविवार तड़के करीब 3:30 बजे जब धमाका हुआ, तो इमारत के निवासी कुछ समझ पाते, उससे पहले ही आग की लपटों ने पूरी मंजिल को घेर लिया। एयर कंडीशनर से निकली चिंगारियों ने पर्दे और फर्नीचर को पकड़ लिया, जिससे आग कुछ ही मिनटों में तीसरी और चौथी मंजिल तक पहुँच गई। पूरी बिल्डिंग धुएं और आग के गोले में तब्दील हो चुकी थी।

दमकल विभाग द्वारा आग बुझाने का रेस्क्यू ऑपरेशन

इमारत के आगे के हिस्से में रहने वाले 10 से 15 लोगों को किसी तरह सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन पीछे के फ्लैटों में रहने वाले लोगों के लिए स्थितियां बेहद विकट हो गईं। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तीन लोगों के शव उनके बिस्तर पर ही मिले हैं। इसका मतलब है कि उन्हें अपनी जान बचाने के लिए भागने या बिस्तर से नीचे उतरने तक का समय नहीं मिला। धुएं के कारण वे पहले बेहोश हुए होंगे और फिर आग की लपटों ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।

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छत का ताला बना अभिशाप: सीढ़ियों पर मिलीं लाशें

इस हादसे में सबसे विचलित करने वाला तथ्य सीढ़ियों पर मिला मंजर है। आग लगने के बाद दूसरी और तीसरी मंजिल के लोग जान बचाने के लिए नीचे की बजाय ऊपर की ओर भागे। उन्हें उम्मीद थी कि वे छत पर पहुँचकर सुरक्षित रहेंगे। लेकिन दुर्भाग्यवश, छत के दरवाजे पर ताला लगा हुआ था। अँधेरे और घने धुएं के बीच वे लोग काफी देर तक दरवाजा खोलने का प्रयास करते रहे, लेकिन सफल नहीं हुए।

घटनास्थल पर विलाप करते मृतकों के परिजन

बचाव दल ने बताया कि सीढ़ियों से तीन शव बरामद किए गए हैं। ये लोग वहीं फंसकर दम घुटने और आग की लपटों से झुलसकर मर गए। स्थानीय विधायक संजय गोयल ने इसे प्रशासन और सुरक्षा मानकों की बड़ी लापरवाही बताया है। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग सुरक्षा के लिए छत का दरवाजा बंद रखते हैं, लेकिन आपातकाल में यही सावधानी जानलेवा साबित होती है। यदि दरवाजा खुला होता, तो शायद ये तीन जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।

जैन परिवार के 9 सदस्य खत्म: जन्मदिन की खुशियाँ मातम में बदलीं

इस अग्निकांड ने जैन परिवार को पूरी तरह तबाह कर दिया है। मृतकों में 1.5 वर्ष का मासूम आरू (आकाश जैन), उसके पिता निशांत जैन और माँ आंचल जैन शामिल हैं। परिवार के सबसे बुजुर्ग सदस्य अरविंद जैन और उनकी पत्नी अनीता जैन की भी इस हादसे में मौत हो गई। अरविंद के साले संजय जैन ने रोते हुए बताया कि पूरा परिवार आज अरविंद के बड़े बेटे दीपक के बच्चे का जन्मदिन मनाने के लिए मानेसर जाने वाला था।

जीटीबी अस्पताल की मोर्चरी में ले जाते हुए शव

दीपक जैन पेशे से सीए हैं और वे पहले ही मानेसर पहुँच चुके थे। शनिवार रात को छोटे भाई निशांत की दीपक से वीडियो कॉल पर बात हुई थी और सब बहुत खुश थे। लेकिन कुछ ही घंटों बाद दीपक का पूरा संसार उजड़ गया। इस हादसे में उन्होंने अपने माता-पिता, भाई-भाभी और भतीजे को खो दिया। तीसरी मंजिल पर रहने वाले नितिन जैन, उनकी पत्नी शैले और बेटे सम्यक की भी इस अग्निकांड में मौत हो गई। परिवार के सदस्य नवीन जैन गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं।

शिनाख्त की चुनौती: डीएनए टेस्ट ही एकमात्र रास्ता

विवेक विहार के स्थानीय नगर पार्षद पंकज लूथरा ने बताया कि इमारत के भीतर का दृश्य इतना डरावना था कि उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। आग की तीव्रता के कारण शव इस कदर जल गए हैं कि उनकी पहचान करना नामुमकिन हो गया है। पुलिस ने शवों की तस्वीरें ली हैं, लेकिन जेंडर और उम्र का पता लगाना भी मुश्किल हो रहा है। मृतकों की शिनाख्त के लिए परिजनों के डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं।

पुलिस और फॉरेंसिक टीम जांच करते हुए

दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) के अनुसार, सुबह 8 बजे तक आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया था, लेकिन सर्च ऑपरेशन दोपहर तक जारी रहा। पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीमें घटनास्थल पर आग लगने के सही कारणों की जांच कर रही हैं। हालांकि प्रारंभिक तौर पर एसी ब्लास्ट को वजह माना जा रहा है, लेकिन शॉर्ट सर्किट के कोण से भी इनकार नहीं किया जा सकता। जीटीबी अस्पताल की मोर्चरी के बाहर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरी दिल्ली इस समय इस भीषण त्रासदी के शोक में डूबी हुई है और सुरक्षा मानकों पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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