International Desk, tajnews.in | Sunday, May 3, 2026, 09:30:15 PM IST

अबुजा: आधुनिक युग में जहाँ दुनिया महिला सशक्तिकरण और समानता की बातें कर रही है, वहीं नाइजीरिया से आई एक खबर ने पूरी मानवता के सिर को शर्म से झुका दिया है। नाइजीरिया के कुछ हिस्सों में ‘Alue-Do Festival’ (जिसे वैश्विक मीडिया ‘रेप फेस्टिवल’ के रूप में रिपोर्ट कर रहा है) के दौरान महिलाओं के साथ हुई बर्बरता और बदसलूकी की घटनाओं ने दुनिया भर को हिलाकर रख दिया है। कथित परंपरा के नाम पर सड़कों पर महिलाओं को दौड़ाना, उनके साथ मारपीट करना और यौन हिंसा को अंजाम देने वाली इन तस्वीरों ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के कान खड़े कर दिए हैं। यह शर्मनाक घटना केवल नाइजीरिया की कानून व्यवस्था की विफलता नहीं है, बल्कि सदियों पुरानी उन कुप्रथाओं की ओर इशारा करती है जो आज भी महिलाओं को केवल उपभोग की वस्तु समझती हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियोज में साफ देखा जा सकता है कि कैसे बेबस महिलाएं अपनी जान और इज्जत बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं, जबकि भीड़ तमाशबीन बनी हुई है।
परंपरा की आड़ में अपराध का खेल – क्या है ‘Alue-Do’?
नाइजीरिया के कुछ पारंपरिक समुदायों में आयोजित होने वाला ‘Alue-Do’ उत्सव ऐतिहासिक रूप से फसलों की कटाई या स्थानीय मान्यताओं से जुड़ा रहा है। हालांकि, हाल के वर्षों में इस उत्सव का स्वरूप बेहद हिंसक और महिला विरोधी हो गया है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान पुरुषों के झुंड सड़कों पर निकलते हैं और उनके सामने आने वाली किसी भी महिला के साथ दुर्व्यवहार करना अपना ‘अधिकार’ समझते हैं। महिलाओं के कपड़े फाड़ना, उन्हें लाठियों से पीटना और उनके साथ जबरदस्ती करना इस तथाकथित उत्सव का काला हिस्सा बन चुका है।
वायरल वीडियो में दर्जनों युवाओं को महिलाओं को घेरते और उन्हें निर्वस्त्र करने का प्रयास करते देखा गया है। कई पीड़ित महिलाओं को गंभीर चोटें आई हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
हैरानी की बात यह है कि ये घटनाएँ दिनदहाड़े और सार्वजनिक स्थानों पर होती हैं। स्थानीय पुलिस कई बार मूकदर्शक बनी रहती है क्योंकि इसे ‘धार्मिक भावना’ और ‘सांस्कृतिक धरोहर’ से जोड़ दिया जाता है। लेकिन इस बार, जब ये वीडियो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित हुए, तो नाइजीरिया की वैश्विक छवि पर बड़ा दाग लगा है। दुनिया भर के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे ‘कानूनी बलात्कार’ और ‘संस्थागत हिंसा’ करार दिया है।
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अंतरराष्ट्रीय दबाव और नाइजीरिया सरकार की सफाई
सोशल मीडिया पर बढ़ते आक्रोश और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया घरानों जैसे **NDTV World** द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद, नाइजीरिया सरकार बचाव की मुद्रा में आ गई है। सरकार के प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर कहा है कि ये घटनाएँ पूरे देश का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं और ये कुछ विशिष्ट ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ‘उत्सव’ के नाम पर किसी भी प्रकार की हिंसा या बदसलूकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
संयुक्त राष्ट्र महिला आयोग (UN Women) ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए नाइजीरियाई प्रशासन से उन सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है जो इन वीडियोज में महिलाओं पर हमला करते दिख रहे हैं। वैश्विक नेताओं और प्रमुख हस्तियों ने नाइजीरिया से इस ‘बर्बर’ परंपरा को तुरंत समाप्त करने और महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने का आह्वान किया है। कई देशों ने अपने नागरिकों, विशेषकर महिलाओं को नाइजीरिया के उन इलाकों की यात्रा न करने की चेतावनी दी है जहाँ ये उत्सव आयोजित किए जा रहे हैं।
सभ्य समाज के चेहरे पर तमाचा
नाइजीरिया की यह घटना केवल एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि यह उन पितृसत्तात्मक और विकृत मानसिकता का आईना है जो दुनिया के कई हिस्सों में आज भी मौजूद है। ‘रेप फेस्टिवल’ जैसे शब्द ही अपने आप में इतने घृणित हैं कि वे किसी भी सभ्य समाज की नींव को हिला सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सांस्कृतिक पहचान के नाम पर हिंसा को महिमामंडित किया जाता रहेगा, तब तक महिलाओं के विरुद्ध अपराध कम नहीं होंगे।
पूरी दुनिया अब नाइजीरियाई न्याय व्यवस्था की ओर देख रही है कि वह इन पीड़ितों को न्याय दिला पाती है या नहीं। क्या नाइजीरिया अपने कड़े कानूनों के जरिए ऐसी आदिम और हिंसक परंपराओं को हमेशा के लिए दफन कर पाएगा? यह सवाल इस समय अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गूँज रहा है। ‘ताज न्यूज़’ इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी नजर बनाए हुए है और हम अपने पाठकों से अपील करते हैं कि वे ऐसी किसी भी विचारधारा या परंपरा का विरोध करें जो किसी भी मनुष्य, विशेषकर महिलाओं के सम्मान और मानवाधिकारों का हनन करती हो।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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