भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आगाज; 11 सदस्य देशों और साझेदार मुल्कों के नेता जुटे, दोपहर में पहुंचेंगे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, मोदी संग द्विपक्षीय वार्ता पर टिकी निगाहें
नई दिल्ली डेस्क, 🌐 tajnews.in | शनिवार, 12 सितंबर 2026, 07:42:15 AM IST

tajnews.in | नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन शनिवार से नई दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू हो रहा है। दो दिन चलने वाले इस सम्मेलन में 11 सदस्य देशों के नेताओं के साथ साझेदार देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट, अमेरिका-चीन तनाव, व्यापार प्रतिबंध और बदलती वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के बीच हो रहा यह सम्मेलन भारत की कूटनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत 2026 में चौथी बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। इस बार भारत ने सम्मेलन का केंद्रीय विचार रखा है—‘Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability’, यानी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास के आधार पर BRICS को अधिक व्यावहारिक और परिणाम देने वाला मंच बनाना।
आज दोपहर दिल्ली पहुंचेंगे शी जिनपिंग
सम्मेलन में सबसे ज्यादा नजर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने पर है। वह शनिवार दोपहर करीब 12:30 बजे भारत पहुंचेंगे। BRICS बैठक के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी प्रस्तावित है।
चीन के राजदूत जू फेइहोंग के अनुसार, दोनों नेताओं की बैठक की तैयारियां की जा रही हैं। कजान और तियानजिन में हुई मुलाकातों के बाद यह लगातार तीसरा साल होगा, जब मोदी और शी आमने-सामने बातचीत करेंगे। चीनी पक्ष ने बैठक से पहले भारत-चीन संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से संभालने, संवाद बढ़ाने और मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाने पर जोर दिया है। ऐसे में मोदी-शी मुलाकात सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकों में शामिल होगी।
मोदी-पुतिन की मुलाकात में भी बनी अहम सहमति
शी जिनपिंग के आने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अहम बातचीत हो चुकी है। दोनों नेताओं ने भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को करीब 100 अरब डॉलर तक ले जाने की दिशा में काम करने पर जोर दिया।
बातचीत में ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, तकनीक और वैश्विक संकटों के प्रभाव जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। पुतिन ने BRICS को केवल राजनीतिक मंच तक सीमित रखने के बजाय तकनीक, बुनियादी ढांचे, भुगतान प्रणाली और निवेश जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक आर्थिक सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
BRICS में अब 11 सदस्य देश
BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन के साथ हुई थी। दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसका नाम BRICS हुआ। हालिया विस्तार के बाद संगठन में अब 11 सदस्य देश हैं— ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात।
इन देशों की सम्मिलित आबादी दुनिया की करीब 49 प्रतिशत है और क्रय शक्ति समानता के आधार पर इनकी अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक GDP का लगभग 40 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करती हैं। इसके अलावा 10 BRICS साझेदार देशों—बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम—को भी सम्मेलन में शामिल किया जा रहा है।
BRICS के सामने सबसे बड़ा सवाल: सिर्फ बैठक या ठोस परिणाम?
भारत इस बार BRICS को केवल घोषणाओं का मंच बनाने के बजाय व्यावहारिक सहयोग का मंच बनाने पर जोर दे रहा है। सम्मेलन में जिन प्रमुख पहलों को आगे बढ़ाने की उम्मीद है, उनमें BRICS Startup Innovation Fund, BRICS Incubator Network और Logistics and Supply Chain Cooperation Framework शामिल हैं।
स्टार्टअप इनोवेशन फंड का उद्देश्य सदस्य देशों के स्टार्टअप और शुरुआती चरण के नवाचारों को वित्तीय सहयोग देना है। वहीं इनक्यूबेटर नेटवर्क के जरिए अलग-अलग देशों के स्टार्टअप इन्क्यूबेटर और राष्ट्रीय संस्थानों को जोड़ने की योजना है। लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन फ्रेमवर्क का लक्ष्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत, सुरक्षित और टिकाऊ बनाना है। भारत की कोशिश इन पहलों के जरिए व्यापार, तकनीक, निवेश और नवाचार को घोषणाओं से आगे ले जाकर वास्तविक सहयोग में बदलने की है।
स्थानीय मुद्राओं में कारोबार पर भी जोर
BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सीमा-पार भुगतान बढ़ाने का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कारोबार में किसी एक मुद्रा पर अत्यधिक निर्भरता कम करना और सदस्य देशों के बीच भुगतान व्यवस्था को आसान बनाना है।
हालांकि यह आसान लक्ष्य नहीं है। BRICS के सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाएं, वित्तीय व्यवस्थाएं और राजनीतिक प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। इसलिए साझा भुगतान प्रणाली या डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में किसी बड़े कदम के लिए व्यापक सहमति जरूरी होगी।
WTO और वैश्विक व्यापार व्यवस्था में सुधार
भारत BRICS के मंच से विश्व व्यापार संगठन और वैश्विक व्यापार व्यवस्था में सुधार की जरूरत भी उठा रहा है। अगस्त में जयपुर में हुई BRICS व्यापार मंत्रियों की बैठक में BRICS Economic Partnership Strategy 2030 को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रगति हुई थी। छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए व्यापार वित्त की पहुंच बढ़ाने तथा वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक विविध और मजबूत बनाने पर भी सहमति बनी थी। भारत का जोर इस बात पर है कि विकासशील देशों के किसानों, छोटे कारोबारियों और उद्योगों के हितों की रक्षा करते हुए वैश्विक व्यापार व्यवस्था को अधिक संतुलित बनाया जाए।
ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने की कोशिश
भारत BRICS को ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने वाले मंच के रूप में पेश कर रहा है। सम्मेलन में अफ्रीका, कैरेबियन और एशिया के कई देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ASEAN की अध्यक्षता के संदर्भ में सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी दिल्ली पहुंचे हैं। क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज और बुरुंडी के राष्ट्रपति इवरिस्ते नदयीशिमिये भी सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस और WTO की महानिदेशक न्गोजी ओकोंजो-इवेला की मौजूदगी सम्मेलन के वैश्विक संस्थागत महत्व को और बढ़ाती है।
आज क्या होगा?
शनिवार दोपहर करीब 2:35 बजे BRICS सदस्य देशों के नेताओं का बंद कमरे में शिखर सत्र शुरू होगा। इसमें समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करने पर चर्चा होगी। इसके बाद शाम करीब 4:25 बजे नेता ‘भारत इनोवेट्स’ प्रदर्शनी का दौरा करेंगे। शाम 5:05 बजे सामूहिक फोटो और पौधरोपण कार्यक्रम होगा। रात 7:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से राजकीय रात्रिभोज दिया जाएगा।
रविवार को मुख्य खुला सत्र होगा। इसका विषय होगा—‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता: समावेशी वैश्विक विकास के लिए भविष्य को आकार देना।’ सम्मेलन के अंत में ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ जारी किया जाएगा।
युद्ध और तनाव के बीच एकजुटता की परीक्षा
इस बार BRICS के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती उसकी आंतरिक विविधता है। रूस और पश्चिम के बीच यूक्रेन युद्ध को लेकर तनाव है। पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल-अमेरिका से जुड़ा संकट है। वहीं भारत और चीन के बीच सीमा तथा रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद दोनों देश BRICS में एक साथ बैठे हैं।
ऐसे माहौल में सम्मेलन के दौरान सर्वसम्मति बनाना आसान नहीं होगा। BRICS की असली सफलता इस बात से तय होगी कि अलग-अलग राष्ट्रीय हितों के बावजूद सदस्य देश व्यापार, वित्त, तकनीक और वैश्विक शासन जैसे क्षेत्रों में कितने ठोस साझा फैसले ले पाते हैं।
दिल्ली बनी हाई-सिक्योरिटी जोन
BRICS सम्मेलन के चलते दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी की गई है। एयरपोर्ट, प्रमुख होटल, भारत मंडपम और विदेशी नेताओं के आवागमन वाले मार्गों पर भारी सुरक्षा तैनाती की गई है। कई मार्गों पर ट्रैफिक प्रतिबंध और डायवर्जन लागू किए गए हैं, जिसका असर सामान्य जनजीवन पर भी पड़ा है।
विदेशी मेहमानों के लिए भारत की खास मेहमाननवाजी
भारत ने सम्मेलन के जरिए अपनी सांस्कृतिक और क्षेत्रीय विविधता भी प्रदर्शित की है। विदेशी प्रतिनिधियों को दिए जा रहे गुडी बैग में बिहार का सत्तू और मखाना, केले के चिप्स, ओडिशा की कॉफी और गुजरात का स्टोल शामिल हैं। मेहमानों के लिए तैयार विशेष सिल्वर-प्लेटेड टेबलवेयर और कटलरी में जयपुर की पारंपरिक कारीगरी का इस्तेमाल किया गया है। इसे तैयार करने में करीब 300 कारीगरों ने योगदान दिया है।
पुतिन को मोदी ने भेंट की ‘तिरुक्कुरल’
BRICS सम्मेलन में भारत की सभ्यतागत विरासत भी कूटनीति का हिस्सा दिखाई दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तमिल संत और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध कृति ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भेंट किया। ‘तिरुक्कुरल’ में 133 अध्याय और 1,330 दोहे हैं, जिनमें नैतिकता, शासन, अर्थव्यवस्था और मानवीय संबंधों जैसे विषयों पर विचार दिए गए हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह सम्मेलन?
सीधी बात यह है कि BRICS अब केवल पांच देशों का आर्थिक समूह नहीं रहा। विस्तार के बाद यह दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाला मंच बन गया है। लेकिन समूह जितना बड़ा हुआ है, उतनी ही उसकी आंतरिक विविधता और मतभेदों की चुनौती भी बढ़ी है।
भारत के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ चीन और रूस जैसी बड़ी शक्तियों के साथ BRICS को प्रभावी बनाना और दूसरी तरफ अमेरिका तथा पश्चिमी देशों के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों को संतुलित रखना। नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में भारत इसी संतुलन के बीच BRICS को अधिक व्यावहारिक, आर्थिक रूप से उपयोगी और ग्लोबल साउथ के लिए प्रभावशाली मंच बनाने की कोशिश कर रहा है। अब असली परीक्षा ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ की होगी—क्या इसमें बड़े राजनीतिक बयान होंगे या व्यापार, भुगतान, तकनीक, सप्लाई चेन और विकास के क्षेत्र में ऐसे फैसले भी होंगे, जिनका असर आने वाले वर्षों में जमीन पर दिखाई दे?
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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