आगरा नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव में भगवा परचम: 3 घंटे के हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद BJP का महा-दबदबा, 6 में से 5 सीटों पर कब्जा, बसपा को मिली महज 1 सीट

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Agra Desk, 🌐 [tajnews.in] | Saturday, 18 July, 2026, 05:21:00 PM IST.

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tajnews.in | आगरा: ताजनगरी के स्थानीय निकाय विन्यास में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बार फिर अपना प्रचंड राजनीतिक वर्चस्व और रणनीतिक लोहा साबित कर दिया है। आगरा नगर निगम की अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यकारिणी समिति के चुनाव में भाजपा ने छह में से पांच सीटें जीतकर विपक्षी खेमे को पूरी तरह पस्त कर दिया। शनिवार को नगर निगम सदन में करीब तीन घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे, रणनीतिक बैठकों और भारी राजनीतिक खींचतान के बाद आखिरकार बिना मतदान के ही आम सहमति बन गई। भाजपा के पांच और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की एक प्रत्याशी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। इस शानदार जीत के बाद भाजपाइयों ने सदन से लेकर सड़क तक जमकर जश्न मनाया और इसे संगठन की एकजुटता की बड़ी जीत बताया।

HIGHLIGHTS
  1. भगवा वर्चस्व: आगरा नगर निगम कार्यकारिणी के विशेष विन्यास चुनाव में भाजपा ने छह में से पांच सीटों पर ऐतिहासिक विजय पताका फहराई।
  2. निर्विरोध निर्वाचन: भाजपा और बसपा के बीच अंतिम क्षणों में बनी विधिक सहमति के बाद 3 प्रत्याशियों ने नाम वापस लिए, टला मतदान।
  3. दिग्गजों की मौजूदगी: केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, सांसद राजकुमार चाहर और विधायक डॉ. जीएस धर्मेश ने खुद संभाली कमान।
  4. नवनिर्वाचित सदस्य: प्रवीना राजावत, हेमंत प्रजापति, अतुल अवस्थी, रवि करोतिया, गुड्डू राठौर (भाजपा) और निधि सिंह (बसपा) बनीं सदस्य।

महापौर हेमलता दिवाकर की अध्यक्षता में सदन की बैठक, 9 दिग्गजों ने ठोकी थी ताल

विधिक व प्रशासनिक नियमों के अनुसार, आगरा नगर निगम की इस शक्तिशाली कार्यकारिणी समिति में कुल 12 सदस्य होते हैं, जिनका चयन सीधे निर्वाचित पार्षदों के आंतरिक विन्यास में से किया जाता है। इनमें से ठीक छह सम्मानित सदस्यों का विधिक कार्यकाल पिछले महीने समाप्त हो चुका था, जिसके चलते रिक्त हुए पदों को भरने के लिए महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा की अध्यक्षता में शनिवार सुबह 11 बजे नगर निगम सदन की एक विशेष और अनिवार्य बैठक बुलाई गई। समिति में अपना दबदबा कायम करने के लिए कुल 9 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल कर चुनावी सरगर्मी को चरम पर पहुंचा दिया था। भाजपा की ओर से प्रवीना राजावत, हेमंत प्रजापति, अतुल अवस्थी, रवि करोतिया, गुड्डू राठौर और वेद प्रकाश गोस्वामी ने पर्चा भरा था, जबकि बहुजन समाज पार्टी ने रणनीतिक काउंटर करते हुए निधि सिंह, माता प्रसाद और पुष्पा कुमारी को चुनावी समर में उतारा था।

शुरुआती घंटों में यह चुनाव पूरी तरह शह-मात के खेल में बदल गया था। भाजपा जहां अपने सभी छह प्रत्याशियों को जिताने के लिए कड़े संख्या बल का गणित बिठा रही थी, वहीं बसपा भी सदन में अपनी हिस्सेदारी दोगुनी करने के लिए निर्दलीय पार्षदों के विन्यास को साधने में जुटी थी। मतदान की प्रबल संभावना को भांपते हुए भाजपा हाईकमान ने अपनी पूरी राजनीतिक ताकत सदन के भीतर झोंक दी। आगरा के सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, फतेहपुर सीकरी के लोकप्रिय सांसद राजकुमार चाहर और कद्दावर विधायक डॉ. जीएस धर्मेश लाव-लश्कर के साथ सदन में मुस्तैद हो गए। नियमों के मुताबिक क्षेत्र के सांसदों और विधायकों को भी सदन में विधिक मतदान का अधिकार प्राप्त होता है, जिसके चलते भाजपा ने अपने एक-एक जनप्रतिनिधि को पहले ही व्हिप जारी कर सदन में उपस्थित रहने का कड़ा निर्देश दे रखा था।

3 घंटे की रणनीतिक खींचतान के बाद टला मतदान, जानें क्यों अहम है यह कार्यकारिणी

सदन के भीतर लगभग तीन घंटे तक बंद कमरों में वरिष्ठ नेताओं और दोनों दलों के रणनीतिकारों के बीच तीखी राजनीतिक चर्चा और नफा-नुकसान का विन्यास तौला गया। दोपहर ठीक दो बजे भाजपा और बसपा के शीर्ष नेतृत्व के बीच एक विधिक और सम्मानजनक सहमति बन गई। इस विन्यास के तहत भाजपा के प्रत्याशी वेद प्रकाश गोस्वामी और बहुजन समाज पार्टी की ओर से पुष्पा कुमारी तथा माता प्रसाद ने गरिमा के साथ अपने-अपने नामांकन पत्र वापस ले लिए। तीन उम्मीदवारों के नाम वापसी के बाद मैदान में ठीक छह प्रत्याशी बचे और चुनाव पूरी तरह निर्विरोध संपन्न हो गया, जिससे प्रशासन को मतदान कराने की आवश्यकता नहीं पड़ी। नवनिर्वाचित सदस्यों में भाजपा की प्रवीना राजावत, हेमंत प्रजापति, अतुल अवस्थी, रवि करोतिया, गुड्डू राठौर और बसपा की निधि सिंह के नामों पर विधिक मुहर लग गई।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नगर निगम की इस कार्यकारिणी समिति को असल में ‘नगर सरकार’ का सबसे शक्तिशाली और महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाला सर्वोच्च मंच माना जाता है। ताजनगरी के समस्त बड़े विकास कार्यों की प्रशासनिक वित्तीय स्वीकृति, सालाना बजट का विन्यास, नई जनहितैषी योजनाओं की रूपरेखा और विभिन्न प्रकार के प्रशासनिक व राजस्व प्रस्तावों को अंतिम विधिक मंजूरी देने में इसी कार्यकारिणी की भूमिका निर्णायक होती है। यही मुख्य कारण है कि इस समिति में पूर्ण बहुमत और नियंत्रण हासिल करना सभी राजनीतिक दलों के लिए अत्यंत प्रतिष्ठा और रसूख का विषय माना जाता है, जिसमें भाजपा ने पांच सीटें जीतकर आगामी समय के लिए अपनी राह पूरी तरह निष्कंटक कर ली है।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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