National Desk, 🌐 tajnews.in | Monday, 13 July, 2026, 07:22:15 PM IST.

tajnews.in | देहरादून/बदरीनाथ: सनातन आस्था के सर्वोच्च केंद्र भू-वैकुंठ श्री बदरीनाथ धाम के पावन खजाने और दान-चढ़ावे में हुई भारी हेराफेरी के सनसनीखेज मामले में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला तकनीकी खुलासा हुआ है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद अब सबसे बड़ा विधिक और प्रशासनिक संकट मंदिर परिसर से 32 दिनों की महत्वपूर्ण सीसीटीवी (CCTV) फुटेज के रहस्यमयी तरीके से डिलीट और गायब होने को लेकर खड़ा हो गया है। पूर्व में बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के आला अधिकारियों द्वारा कड़ा दावा किया गया था कि चढ़ावे की गणना की पूरी 45 दिनों की वीडियो रिकॉर्डिंग पूरी तरह विधिक रूप से सुरक्षित है, परंतु विशेष जांच टीम को धरातल पर केवल 13 दिनों की फुटेज ही उपलब्ध हो सकी है। इस गंभीर तकनीकी गड़बड़ी के बाद अब यह आशंका प्रबल हो गई है कि महाघोटाले के विधिक साक्ष्यों को मिटाने और बड़े रसूखदारों को बचाने के लिए जानबूझकर डिजिटल रिकॉर्डिंग को नष्ट किया गया है।
विशेष विधिक और पुलिस जांच के दौरान प्राप्त हुए विस्तृत आधिकारिक विवरण के अनुसार, बदरीनाथ मंदिर के भीतर श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक अर्पित किए गए दान-चढ़ावे की शासकीय गणना के समय भारी अनियमितताएं की जा रही थीं। कैमरे में कैद हुए विजुअल्स के आधार पर यह पुख्ता साक्ष्य मिला है कि नोटों की गिनती के समय 500-500 रुपये के कड़े करेंसी नोटों के बंडल और बेशकीमती सोने-चांदी के उपहार विधिक सुरक्षा तंत्र को ठेंगा दिखाकर चुपचाप मंदिर परिसर से बाहर ले जाए गए। जांच टीम द्वारा खंगाली गई शुरुआती 13 दिनों की रिकॉर्डिंग में ही मुख्य आरोपी और मंदिर समिति के वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल की संलिप्तता पूरी तरह उजागर हो गई है। वह महज पांच दिनों की अवधि के भीतर आठ बार बहुत ही शातिराना अंदाज में दान-चढ़ावे की पवित्र राशि में हेराफेरी और चोरी करता हुआ साफ दिखाई दे रहा है।
परंतु, अब सबसे बड़ा विधिक सवाल शेष 32 दिनों की रिकॉर्डिंग के गायब होने को लेकर उठ रहा है, जिसने मंदिर प्रशासन की नीयत पर गहरे सवालिया निशान लगा दिए हैं। प्रशासनिक और स्थानीय हलकों में कडी चर्चा है कि यदि बाकी 32 दिनों की पूरी फुटेज सामने आ जाती है, तो मंदिर समिति के कई अन्य बड़े नीतिगत अधिकारियों और प्रभावशाली कर्मचारियों के चेहरे भी इस महाघोटाले में बेनकाब हो जाएंगे। इसी डर के कारण विधिक साक्ष्यों को टेक्निकल रूप से करप्ट या डिलीट किया गया हो सकता है। मामला गंभीर होता देख और चारों तरफ से घिरने के बाद अब बीकेटीसी (BKTC) के शीर्ष अधिकारी बैकफुट पर आ गए हैं और आनन-फानन में मुख्य डीवीआर (DVR) के डिलीटेड डेटा को वैज्ञानिक पद्धति से रिकवर करने के लिए देश के स्वतंत्र तकनीकी और फॉरेंसिक विशेषज्ञों से कड़ा संपर्क साधा जा रहा है। साइबर विशेषज्ञों ने डेटा रिकवरी की विधिक संभावनाओं को लेकर अधिकारियों को जरूरी तकनीकी दिशा-निर्देश और ब्लूप्रिंट सौंप दिया है।
इस बीच, मामले की विधिक विवेचना कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपना कड़ा शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। एसआईटी (SIT) ने मंदिर के गर्भगृह और खजाने से जुड़े उन तमाम अधिकारी-कर्मचारियों और गणना के समय विधिक या प्रशासनिक रूप से मौजूद रहने वाले लोगों की सूची तैयार कर उनकी विधिक पहचान स्थापित कर ली है। वर्तमान में मंदिर से जुड़े करीब एक दर्जन से अधिक अन्य प्रभावशाली लोग भी जांच के कड़े दायरे में आ चुके हैं, जिनमें कुछ नियमित श्रद्धालु और संदिग्ध साधु-संतों की भूमिका की भी विधिक जांच की जा रही है। मंदिर समिति ने एसआईटी द्वारा मांगे गए तमाम विधिक और वित्तीय दस्तावेज, बहीखाते और लॉग बुक जांच टीम को सौंप दिए हैं, जिनका फॉरेंसिक ऑडिटर्स द्वारा गहराई से अध्ययन किया जा रहा है। इसके साथ ही एसआईटी मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल के बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और उसकी दैनिक गतिविधियों को लेकर कड़े इनपुट जुटा चुकी है और सुरक्षा के दृष्टिकोण से उसके बदरीनाथ स्थित निजी आवास पर भी पुलिसिया नजर रखी जा रही है।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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