Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Monday, 13 July, 2026, 02:45:10 PM IST.

tajnews.in | आगरा: महानगर के व्यस्ततम आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर रविवार सुबह रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवानों द्वारा खाकी की हनक में कानून की धज्जियां उड़ाने का एक अत्यंत शर्मनाक और सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। एक असहाय महिला यात्री को सुरक्षित ट्रेन में चढ़ाने के लिए मानवीय आधार पर गाड़ी रुकवाने वाले स्टेशन उपाधीक्षक (डीएसएस) को आरपीएफ के सुरक्षाकर्मियों ने प्लेटफॉर्म पर ही बेरहमी से पीट दिया। शातिर जवानों ने मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए रेल अधिकारी को जमीन पर गिराया, जमकर लात-घूंसे बरसाए और फिर उन्हें घसीटते हुए आरपीएफ पोस्ट पर ले गए। इस अभूतपूर्व गुंडागर्दी को देखकर स्टेशन पर मौजूद रेल कर्मचारियों और यात्रियों का गुस्सा फूट पड़ा। भारी हंगामे और आक्रोश के बाद रेल प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए दो एएसआई समेत चार दोषी आरपीएफ कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जबकि देर रात जीआरपी ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
रेलवे के आधिकारिक और प्रत्यक्षदर्शी सूत्रों से प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, यह पूरी वीभत्स घटना रविवार की सुबह घटित हुई। अमृतसर से चलकर विशाखापत्तनम को जाने वाली ट्रेन संख्या 20808 हीराकुंड एक्सप्रेस सुबह ठीक 10:51 बजे आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर आकर रुकी थी। इसी दौरान उक्त ट्रेन में यात्रा कर रहीं लुधियाना निवासी एक महिला सहयात्री रंजीता राव प्लेटफॉर्म पर प्रसिद्ध आगरा का पेठा खरीदने के लिए नीचे उतरीं। पेठा विक्रेता से खुले पैसे मिलने में हुई अत्यधिक देरी के कारण ट्रेन अचानक गति पकड़ने लगी। ड्यूटी पर सजगता से मुस्तैद स्टेशन उपाधीक्षक नरेंद्र सिंह चाहर ने जब महिला यात्री को घबराहट की स्थिति में चलती ट्रेन के पीछे जान जोखिम में डालकर दौड़ते हुए देखा, तो उन्होंने मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए तुरंत वॉकी-टॉकी से गार्ड को सूचना देकर ट्रेन को वहीं रुकवा दिया, जिससे महिला सुरक्षित कोच में सवार हो सके।
इसी दौरान मौके पर पहुँचे आरपीएफ के एएसआई और कांस्टेबलों ने इस पूरे वाकये को अवैध रूप से की गई वैक्यूम या चेन पुलिंग का मामला समझ लिया। उन्होंने ट्रेन में सवार हो रही महिला यात्री और उनके साथ मौजूद सहयात्री आशीष कुमार को जबरन नीचे उतारने का प्रयास किया और उन पर एक हजार रुपये का कड़ा आर्थिक जुर्माना ठोक दिया। पीड़ित महिला का आरोप है कि आरपीएफ के जवानों ने उनसे डरा-धमकाकर एक हजार रुपये की नकद राशि तो ऐंठ ली, परंतु उसकी कोई विधिक रसीद प्रदान नहीं की। इस बीच जब स्टेशन उपाधीक्षक नरेंद्र सिंह चाहर ने वहां हस्तक्षेप किया और विधिक रूप से स्पष्ट किया कि ट्रेन किसी यात्री द्वारा चेन पुलिंग से नहीं, बल्कि उनके स्वयं के आधिकारिक निर्देश पर मानवीय आधार पर रोकी गई है, तो आरपीएफ के सुरक्षाकर्मी भड़क गए और रेल अधिकारी से ही अभद्रता करते हुए उलझ गए। विवाद इस कदर बढ़ा कि आरपीएफ के जवानों ने आव देखा न ताव, स्टेशन उपाधीक्षक को प्लेटफॉर्म पर ही सरेआम पीटना शुरू कर दिया।
आरोपी जवान रेल अधिकारी को बर्बरता से पीटते और घसीटते हुए आरपीएफ पोस्ट के भीतर ले गए और वहां भी बंद कमरे में उनके साथ जमकर हाथापाई की गई। इस खूनी तांडव और अफरा-तफरी के माहौल को देखकर कैंट स्टेशन पर यात्रियों के बीच भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई और हीराकुंड एक्सप्रेस भी काफी समय तक स्टेशन पर ही खड़ी रहने को मजबूर हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए आगरा रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार गौतम ने विधिक बयान जारी करते हुए बताया कि अनुशासनहीनता और मर्यादा लांघने के आरोप में आरपीएफ के एएसआई मेघराज मीणा, एएसआई बालकिशन, कांस्टेबल जितेंद्र और कांस्टेबल बदन सिंह को तत्काल प्रभाव से कड़े रूप से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही इस पूरे गंभीर घटनाक्रम की निष्पक्ष एवं विधिक जांच के लिए एएससी आगरा कैंट, एडीईई और एओएम की एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। उधर, राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने चारों निलंबित सुरक्षाकर्मियों व अन्य के खिलाफ बीएनएस की धारा 151(2), 115(2), 351(2) और 352 के तहत कड़ा मुकदमा पंजीकृत कर सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के आधार पर अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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