सिकंदरा के अकबरा रोड पर चार खसरों में पेड़ उखाड़ने का मामला; वन विभाग ने मौके से जुटाए साक्ष्य, वृक्ष संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा
आगरा डेस्क, 🌐 tajnews.in | रविवार, 6 सितंबर 2026, 02:31:44 AM IST

tajnews.in | आगरा। ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में पेड़ों की सुरक्षा को लेकर सख्त नियमों के बीच सिकंदरा क्षेत्र में जेसीबी से 43 पेड़ों को जड़ समेत उखाड़ने का मामला सामने आया है। अकबरा रोड स्थित चार खसरों में पेड़ हटाए जाने की जानकारी पर वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और साक्ष्य जुटाए। विभाग की शिकायत पर सिकंदरा थाने में बिल्डर महेंद्र सिंघानिया के खिलाफ वृक्ष संरक्षण अधिनियम की धारा 4/10 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है।
मामले में टीटीजेड क्षेत्र में लागू सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया गया है। अब पुलिस यह जांच करेगी कि पेड़ों को हटाने से पहले किसी सक्षम प्राधिकारी से अनुमति ली गई थी या नहीं। जमीन से जुड़े दस्तावेज, मौके पर चल रही गतिविधियों और पेड़ों को हटाने में इस्तेमाल जेसीबी से संबंधित जानकारी भी जुटाई जाएगी।
चार खसरों में 43 पेड़ उखाड़ने का आरोप
मामला अकबरा रोड स्थित खसरा संख्या 1612, 1619, 1621 और 1622 से जुड़ा है। आरोप है कि संबंधित जमीन पर पेड़ों को काटने के बजाय जेसीबी की मदद से उन्हें जड़ समेत उखाड़ दिया गया। पेड़ों के हटाए जाने की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थल का निरीक्षण किया।
जांच के दौरान उखड़े हुए पेड़ों और मौके की परिस्थितियों से जुड़े साक्ष्य जुटाए गए। वन विभाग की पड़ताल में 43 पेड़ों के हटाए जाने की बात सामने आने के बाद विभाग की ओर से पुलिस को तहरीर दी गई।
बिल्डर को आरोपी बनाकर मुकदमा
वन विभाग की शिकायत के आधार पर सिकंदरा थाने में बिल्डर महेंद्र सिंघानिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। एफआईआर वृक्ष संरक्षण अधिनियम की धारा 4/10 के तहत दर्ज हुई है।
पुलिस अब वन विभाग की रिपोर्ट और मौके से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर जांच करेगी। यह भी पता लगाया जाएगा कि संबंधित जमीन पर किस तरह की गतिविधि चल रही थी और पेड़ों को हटाने के लिए कोई अनुमति ली गई थी या नहीं।
दस्तावेज और अनुमति की जांच होगी
जांच का प्रमुख बिंदु यह रहेगा कि 43 पेड़ों को हटाने से पहले संबंधित विभाग से वैधानिक अनुमति ली गई थी या नहीं। पुलिस जमीन के स्वामित्व और उपयोग से जुड़े दस्तावेजों के साथ पेड़ हटाने की अनुमति तथा मौके पर चल रही गतिविधियों से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच करेगी।
इसके अलावा जेसीबी किसकी थी, उसे मौके पर किसने मंगाया और पेड़ों को उखाड़ने की कार्रवाई में कौन-कौन लोग शामिल थे, इसकी भी पड़ताल की जाएगी।
टीटीजेड में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी सवाल
आगरा का बड़ा हिस्सा ताज ट्रेपेजियम जोन के अंतर्गत आता है, जहां पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विशेष प्रावधान लागू हैं। ऐसे क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ों को जड़ से उखाड़े जाने के मामले ने नियमों के पालन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
वन विभाग की शिकायत में टीटीजेड में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि इस आरोप की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस यह देखेगी कि पेड़ हटाने के लिए किसी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति थी या नहीं और संबंधित गतिविधि में लागू पर्यावरणीय नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
43 पेड़ों का मामला, निगरानी पर भी सवाल
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक-दो नहीं, बल्कि 43 पेड़ों को जेसीबी से जड़ समेत उखाड़े जाने की स्थिति कैसे बनी। यदि मौके पर निर्माण या अन्य गतिविधि चल रही थी तो पेड़ों को हटाने से पहले अनुमति और पर्यावरणीय नियमों की जांच की गई थी या नहीं, यह भी जांच का हिस्सा होगा।
एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस जांच से यह स्पष्ट होगा कि पेड़ों को कब और किस उद्देश्य से हटाया गया, कार्रवाई में किन लोगों की भूमिका थी और क्या इसके लिए कोई वैधानिक अनुमति ली गई थी।
43 पेड़ों का मामला अब सिर्फ पेड़ उखाड़ने की कार्रवाई तक सीमित नहीं है। यह टीटीजेड में पर्यावरणीय नियमों की निगरानी और उनके पालन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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