घट गए इंसा, बढ़ गए साए, वैवाहिक बंधनों से छटपटाहट: हमारे बेडरूम बन रहे खूनी युद्ध के मैदान
बृज खंडेलवालक्या हमारे बेडरूम अब ख़ून से सने जंग के मैदान बन रहे हैं? कभी बीवियाँ ईंटों से शौहर का सर कुचल देती हैं, तो कहीं आशिक लाश को सीमेंट के ड्रम में छिपा देता है। हिंदुस्तान की नई मोहब्बत अब धोखे और दरिंदगी की स्क्रिप्ट बन चुकी है। हर मुस्कुराते सेल्फी वाले जोड़े के … Read more