Published: Friday, January 09, 2026 | Copenhagen/Washington
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड के अधिग्रहण की इच्छा जताने और सैन्य विकल्प खुले रखने के बयान ने वैश्विक राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अब ट्रंप प्रशासन का ध्यान ग्रीनलैंड की ओर मुड़ने से यूरोप में चिंता बढ़ गई है। इस बीच डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी घुसपैठ का जवाब तुरंत सैन्य बल से दिया जाएगा।

बिना आदेश के युद्ध के लिए तैयार डेनमार्क की सेना
डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय ने अपनी सेना के लिए ‘रूल्स ऑफ एंगेजमेंट’ (Rules of Engagement) स्पष्ट कर दिए हैं। डेनिश प्रकाशन ‘बर्लिंग्सके’ (Berlingske) के अनुसार, सेना को आदेश दिया गया है कि वे किसी भी विदेशी आक्रमण का तुरंत मुकाबला करें और इसके लिए उच्च कमान के आदेशों का इंतज़ार न करें। रक्षा मंत्रालय ने 1952 के उस पुराने कानून का हवाला दिया है जो शीत युद्ध के दौरान बनाया गया था, जिसके तहत हमला होने पर सैनिकों को तुरंत युद्ध में जुटने की स्वायत्तता दी गई है।+1
यूरोप में बढ़ा तनाव: फ्रांस-जर्मनी भी अलर्ट
ट्रंप की इस धमकी के बाद यूरोपीय देशों में हलचल तेज हो गई है। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने कहा है कि वे इस गंभीर मामले पर जर्मनी और पोलैंड के अपने समकक्षों के साथ चर्चा करेंगे। यूरोपीय नेता इस बात पर विचार कर रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की बार-बार मिलने वाली ग्रीनलैंड अधिग्रहण की धमकियों का सामना कैसे किया जाए।
क्यों बढ़ा विवाद?
व्हाइट हाउस के हालिया बयान के बाद यह तनाव चरम पर पहुंचा है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। ट्रंप प्रशासन की इस अनिश्चित और आक्रामक विदेश नीति ने न केवल डेनमार्क बल्कि नाटो (NATO) के अन्य सहयोगी देशों की भी चिंता बढ़ा दी है। डेनमार्क ने साफ कर दिया है कि भले ही आधिकारिक युद्ध की घोषणा न हुई हो, लेकिन उसकी सीमा में घुसपैठ का अंजाम सैन्य कार्रवाई ही होगा।
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