SEM अदालत ने जमानतदार स्वीकार कर दोनों नेताओं को रिहा करने का निर्देश दिया; जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद सात दिन से हिरासत में थे, हाई कोर्ट से याचिका वापस ली थी
नई दिल्ली डेस्क | 🌐 tajnews.in | बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 | शाम 7:31 बजे

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार, 21 अक्टूबर को SEM अदालत से जमानत मिल गई। अदालत ने पुलिस की ओर से तीन दिन की अतिरिक्त हिरासत मांगे जाने की मांग स्वीकार नहीं की और जमानतदार स्वीकार करने के बाद दोनों को रिहा करने का निर्देश दिया।
दोनों नेताओं को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। वे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और निर्वाचन आयोग से जुड़े मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों करीब सात दिन से हिरासत में थे। अदालत के जमानत आदेश के बाद उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी किए जाने का रास्ता साफ हुआ।
- SEM अदालत ने CJP सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को जमानत दी।
- पुलिस ने तीन दिन की अतिरिक्त हिरासत मांगी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया।
- दोनों को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था।
- दिल्ली हाई कोर्ट में हिरासत बढ़ाने को चुनौती देने वाली याचिका बाद में वापस ले ली गई थी।
पुलिस ने मांगी थी तीन दिन की अतिरिक्त हिरासत
मामले में उपलब्ध विवरण के मुताबिक, 14 अक्टूबर को दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। इसके बाद 19 अक्टूबर को हिरासत की अवधि 21 अक्टूबर तक बढ़ाई गई। बुधवार को पुलिस ने आगे की जांच और अपनी कार्रवाई के लिए तीन दिन की अतिरिक्त हिरासत मांगी, लेकिन SEM अदालत ने यह मांग मंजूर नहीं की।
पुलिस का आरोप था कि प्रदर्शन के दौरान प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया गया, बैरिकेड पार किए गए और नारेबाजी हुई। प्रदर्शनकारियों की ओर से तिरंगा लहराए जाने की बात भी मामले के विवरण में सामने आई थी। ये पुलिस की ओर से लगाए गए आरोप हैं; इन्हें अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
SIR के मुद्दे पर हुआ था प्रदर्शन
CJP का प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और निर्वाचन आयोग की भूमिका से जुड़े सवालों के बीच हुआ था। इस मुद्दे पर मतदाता सूची, नागरिकों के मताधिकार और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक तथा सार्वजनिक बहस जारी है।
प्रदर्शन के बाद हुई पुलिस कार्रवाई के चलते सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत का मामला अदालत तक पहुंचा। पुलिस ने शांति-व्यवस्था और कथित नियम उल्लंघन से जुड़े आधारों पर अपनी कार्रवाई का पक्ष रखा था।
हाई कोर्ट में याचिका वापस ली गई
हिरासत बढ़ाए जाने के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई थी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने याचिकाकर्ता पक्ष को SEM की कार्यवाही का इंतजार करने की सलाह दी। इसके बाद वकील अभिक चिमिनी ने याचिका वापस ले ली। हाई कोर्ट ने इस तरह याचिका वापस लिए जाने के बाद हिरासत के मुद्दे पर गुण-दोष के आधार पर कोई फैसला नहीं दिया।
इसलिए दोनों नेताओं को राहत मिलने का आधार SEM अदालत का जमानत आदेश है। जमानत का आदेश और जेल से वास्तविक रिहाई अलग प्रक्रियाएं हैं; रिहाई जमानतदारों की स्वीकृति और जेल की आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने पर निर्भर करती है।
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CJP की चर्चा और सोशल मीडिया पर पार्टी से जुड़ा विवाददिल्ली में मतदाता सूची के नोटिस और मताधिकार पर उठे सवालSIR को लेकर विरोध प्रदर्शन और सार्वजनिक मर्यादा पर बहसचुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर उठते सवालमतदाता सूची, फॉर्म-6 और SIR प्रक्रिया से जुड़े सवालSEM अदालत के जमानत आदेश से सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत से बाहर आने का रास्ता मिला है। मामले में पुलिस के आरोप, हिरासत की अवधि और अदालतों में हुई कार्यवाही को अलग-अलग समझना जरूरी है। दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका वापस लिए जाने को हिरासत की वैधता पर फैसला नहीं माना जा सकता।





