Opinion: धुंधली होती स्याही; हिक्की के ‘बंगाल गजट’ की विरासत और आज की पत्रकारिता का पतन!

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Opinion Desk, Taj News Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Thu, 12 Feb 2026 आगरा (एक नजरिया): जब हम जेम्स ऑगस्टस हिक्की, उस जांबाज़ आयरिश शख़्स की भावना को याद करते हैं, जिसने 29 जनवरी 1780 को भारत का पहला अख़बार ‘हिक्कीज़ बंगाल गज़ट’ (Hicky’s Bengal Gazette) शुरू किया था, तो आज की पत्रकारिता … Read more

Opinion: अमेरिकी बुद्धिजीवी वर्ग की डरावनी खामोशी चिंतनीय; भारत-EU डील से बढ़ी अमेरिका की बौखलाहट

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Opinion Desk, Taj News Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Thu, 12 Feb 2026 01:30 PM IST आगरा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बौखलाहट अब साफ झलक रही है। यूरोपीय संघ पर उनकी कैप्स-लॉक वाली, बचकानी और अपमानजनक टिप्पणियाँ कोई साधारण बयान नहीं हैं। ये भारत-यूरोपीय संघ के ऐतिहासिक “मदर ऑफ ऑल डील्स” पर … Read more

Opinion: भारत-EU डील से बौखलाए ट्रंप; अमेरिकी बुद्धिजीवियों की ‘डरावनी खामोशी’ पर बृज खंडेलवाल का प्रहार

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Opinion Desk, Taj News Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Thu, 12 Feb 2026 09:50 AM IST आगरा: “क्या चीखने-चिल्लाने से इतिहास बदल जाता है?” यह सवाल आज वरिष्ठ पत्रकार बृज खंडेलवाल अमेरिका की मौजूदा स्थिति पर पूछ रहे हैं। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुई ऐतिहासिक डील (Mother of all Deals) … Read more

Opinion: ‘शिफ्टिंग सिंड्रोम’ से जूझ रहा आगरा; मुगलों से लेकर आज तक… बस बदल रहे हैं ठिकाने, नहीं बदल रही तकदीर!

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Opinion Desk, Taj News Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Thursday, 12 Feb 2026 08:30 AM IST आगरा: “क्या शहर सिर्फ इमारतों को यहाँ से वहाँ करने से बदल जाते हैं?” यह सवाल आज हर आगरावासी के मन में है। आगरा हमेशा से एक परिवर्तनशील शहर रहा है, लेकिन वरिष्ठ पत्रकार बृज खंडेलवाल का … Read more

Opinion: ‘ताली दो हाथों से बजती है’… संसद के शोर में क्यों दम तोड़ रहा लोकतंत्र? वरिष्ठ पत्रकार बृज खंडेलवाल का विश्लेषण

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Opinion Desk, Taj News Written by: Brij Khandelwal | Published: Wed, 11 Feb 2026 आगरा/नई दिल्ली: “लोकतांत्रिक व्यवस्था सत्ता और विपक्ष, दोनों की समझ, संयम और संवाद से ही चलती है।” यह कहना है देश के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार और चिंतक बृज खंडेलवाल (Brij Khandelwal) का। अपने इस विशेष लेख में उन्होंने संसद के शोर … Read more

स्पीड के दीवाने? अगर मंज़िल यमराज दर्शन ही है, तो सड़कों पर अरबों क्यों खर्च करें?

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Political Desk, Taj News | Updated: Tuesday, 11 February 2026, 09:39 PM IST बृज खंडेलवाल लिखते हैं कि भारत में तेज़ रफ्तार और एक्सप्रेसवे को तरक़्क़ी का प्रतीक मान लिया गया है, लेकिन हक़ीक़त यह है कि हर साल करीब 1.7 लाख लोग सड़क हादसों में जान गंवा रहे हैं। लेखक सवाल उठाते हैं कि … Read more

आगरा: जहाँ पत्थरों ने बोलना सीखा, पर अब खांस रहे हैं!!

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Political Desk, Taj News | Updated: Monday, 09 February 2026, 12:39 PM IST आगरा की इमारतें सिर्फ़ ईंट और पत्थर नहीं, बल्कि सदियों की तहज़ीब, प्रकृति से तालमेल और स्थापत्य समझ की जीवित गवाही हैं। बृज खंडेलवाल अपने इस लेख में बताते हैं कि कैसे बाबर से लेकर शाहजहाँ और अंग्रेज़ों तक, आगरा ने बाग़ों, … Read more

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भारतीय ज्ञान परंपरा: क्या तकनीक नैतिकता का स्थान ले सकती है?

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Political Desk, Taj News | Updated: Sunday, 08 February 2026, 07:39 PM IST डॉ प्रमोद कुमार के इस विचारोत्तेजक लेख में इक्कीसवीं सदी की सबसे प्रभावशाली शक्ति कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा के बीच संवाद, नैतिकता और सामूहिक प्रज्ञा के संबंधों की गहन पड़ताल की गई है। लेखक बताता है कि … Read more

घुसपैठिया मंत्र जपता भस्मासुर: असम से देश तक फैलता ज़हर और लोकतंत्र पर खतरा

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Political Desk, Taj News | Updated: Sunday, 08 February 2026, 07:39 PM IST लेखक: बादल सरोज — भारत में आम तौर से तीन दिन कुछ विशेष माने जाते हैं और ये सभी भारतीयों के होते हैं; 26 जनवरी, 15 अगस्त और 2 अक्टूबर जैसे अवसरों पर देश मेल-मिलाप, शांति, एकजुटता और संविधान की ताकत की … Read more

क्या भारत की छोटी नदियाँ और धाराएँ यूँ ही मरने दी जाएँगी?

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Political Desk, Taj News | Updated: Monday, 08 February 2026, 09:39 PM IST बृज खंडेलवाल लिखते हैं कि भारत की हजारों छोटी नदियाँ और धाराएँ आज अपनी पहचान खोकर कूड़े, सीवर और अतिक्रमण के नीचे दबती जा रही हैं, और यह संकट अब केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि देश की जल-सुरक्षा, भूजल भविष्य और सभ्यतागत … Read more

अखण्ड और विकसित भारत की परिकल्पना में सामाजिक समरसता: आंबेडकर और आरएसएस के साझा वैचारिक आधार

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Political Desk, Taj News | Updated: Thursday, 29 January 2026, 08:10 PM IST “अखण्ड और विकसित भारत” की परिकल्पना केवल आर्थिक प्रगति या भौगोलिक एकता तक सीमित नहीं है, और लेखक डॉ प्रमोद कुमार इस लेख में तर्क देते हैं कि सामाजिक समरसता, समानता और न्याय के बिना राष्ट्र-निर्माण अधूरा है, क्योंकि आंबेडकर के सामाजिक … Read more

UGC अधिनियम: शिक्षा सुधार का रास्ता गरीब-केंद्रित क्यों होना चाहिए

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Political Desk, Taj News | Updated: Wednesday, 28 January 2026, 09:20 PM IST भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित नए UGC अधिनियम को उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और नियमन के सुधार के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन लेखक देवेंद्र गौतम अपने इस विचारात्मक लेख में स्पष्ट करते हैं कि किसी भी शिक्षा कानून की असली … Read more