‘डाकिया डाक लाया’ की घंटी जब मोहब्बत जगाती थी: ख़त, जज़्बात और एक भूला-बिसरा दौर

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Sun, 21 Sep 2025 02:30 PM IST, आगरा, भारत। जब ‘डाकिया डाक लाया’ की घंटी मोहब्बत जगाती थी… “वो ख़त जो ज़िंदगी थे…” बृज खंडेलवाल कभी वो दिन थे जब डाकिए की साइकिल की घंटी पूरे मोहल्ले में उम्मीद जगाती हर घर में कोई न कोई बेसब्री से उस ख़ाकी कपड़ों वाले फ़रिश्ते का इंतज़ार … Read more

भारतीय मीडिया का पतन: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ से सत्ता के सेवक तक का डरावना सफ़र

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Sun, 21 Sep 2025 02:30 PM IST, आगरा, भारत। भारत में पिछले दो दशकों में मीडिया ने जबरदस्त आर्थिक और तकनीकी विस्तार देखा है। 2023 में यह क्षेत्र 2,450 अरब रुपये के राजस्व तक पहुँचा और 2028 तक 3,450 अरब रुपये तक पहुँचने का अनुमान है। देश में 1.55 लाख से अधिक पंजीकृत प्रकाशन, 936 … Read more

भारतीय रसोई का अद्भुत सफ़र: धुएँ से लेकर ‘Alexa, Preheat the Oven’ तक

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Mon, 13 Oct 2025 01:02 PM IST, आगरा, भारत। भारतीय रसोई की कहानी सदियों पुरानी है—एक ऐसी कहानी जिसने चूल्हे के धुएँ से लेकर आज के डिजिटल टच-स्क्रीन उपकरणों तक का लंबा सफर तय किया है। आज भले ही कुछ बुजुर्ग डींगें हाँकते हुए चूल्हे की सिकी रोटी और अंगीठी पर घंटों पकती दाल की … Read more

🎯 भारत का नया इश्क़: प्यार जो तोड़ रहा है जात-पात की दीवारें

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📅 रविवार, 12 अक्टूबर 2025 | सुबह 11:41 बजे | आगरा / दिल्ली / पटना किसी छोटे शहर की गली में जब एक लड़की किसी दूसरी जाति के लड़के का हाथ थाम लेती है, उसके साथ कॉफ़ी पीने चली जाती है — तो समझ लीजिए, यह सिर्फ़ मोहब्बत नहीं, बग़ावत है। यह वो इश्क़ है … Read more

🎯 बलात्कारी व्यवस्था: मरे जमीर की खौफनाक दास्तां

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📅 शनिवार, 11 अक्टूबर 2025 | भारत जब भी किसी मासूम निर्भया की चीख़ हवा में गूंजती है, या किसी लड़की की लाश समाज की शर्म पर आईना रखती है — तब सवाल उठता है: क्या हम अब भी इंसान हैं? क्या आज के भारत में स्त्रियां अपनी मर्जी से जी सकती हैं? क्या फैमिलीज, … Read more

🎯 ताजमहल बनाम डेवलपमेंट: जब आगरा की सांसें धुएं और धरोहर के बीच अटक गईं

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आगरा की हवा में आज सिर्फ़ धूल नहीं, एक सुलगता हुआ सवाल घुला है: क्या जीवनयापन की ज़रूरत, जीवन की गुणवत्ता से ऊपर है? एक तरफ़ वो आवाज़ें हैं जो चीख़-चीख़ कर कहती हैं — “बिना उद्योग के पेट नहीं भरता।” दूसरी ओर वो चिंतित फुसफुसाहट — “बिना ताज के पहचान मिट जाएगी।” यह टकराव … Read more

🎯 आओ परिवार नियोजन अभियान की सफलता का जश्न मनाएं — जनसंख्या संतुलन से भारत को मिली विकास की नई गति

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📅 गुरुवार, 9 अक्टूबर 2025 | दोपहर 02:37 बजे IST | आगरा, उत्तर प्रदेश भारत ने जब 1952 में विश्व का पहला राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू किया, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह पहल एक दिन सामाजिक सुधार का सबसे बड़ा स्तंभ बन जाएगी। आज, जब भारत की जनसंख्या 146 करोड़ … Read more

आईएएस बनाम भारत: जब ‘सेवा’ के नाम पर सत्ता की भूख पलने लगी

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बृज खंडेलवाल आज के भारत में अगर किसी बेरोजगार युवक से पूछो कि “क्या कर रहे हो?”, तो ज्यादातर जवाब आता है — “आईएएस की तैयारी कर रहा हूं।” जैसे दुनिया में समाज सेवा करने का बस एक ही रास्ता बचा है — कलेक्टर बनो!। राजधानी दिल्ली के कुछ इलाकों में ऐसे “उड़ान” के सपने … Read more

बिहार का चुनाव: सियासी दंगल या लोकतंत्र की अग्नि परीक्षा?

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बृज खंडेलवाल“बिहार का रण: सत्ता का संग्राम या जनता का इंतेक़ाम?”सियासत का पारा चढ़ चुका है, हवा में नारे हैं, गलियों में जोश है और दिलों में उबाल! पटना से पूर्णिया तक, हर नुक्कड़ पर एक ही सवाल गूंज रहा है — “अबकी बार कौन?” नवंबर की ठंडी हवाओं के बीच बिहार फिर से एक … Read more

घट गए इंसा, बढ़ गए साए, वैवाहिक बंधनों से छटपटाहट: हमारे बेडरूम बन रहे खूनी युद्ध के मैदान

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बृज खंडेलवालक्या हमारे बेडरूम अब ख़ून से सने जंग के मैदान बन रहे हैं? कभी बीवियाँ ईंटों से शौहर का सर कुचल देती हैं, तो कहीं आशिक लाश को सीमेंट के ड्रम में छिपा देता है। हिंदुस्तान की नई मोहब्बत अब धोखे और दरिंदगी की स्क्रिप्ट बन चुकी है। हर मुस्कुराते सेल्फी वाले जोड़े के … Read more