Edited by: Pawan Singh | tajnews.in | Agra | 19 Mar 2026, 06:15 PM IST
Taj News Opinion Desk
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा
मुख्य बिंदु
- उत्तर प्रदेश का ‘समरसता से समृद्धि तक’ का मॉडल ‘विकसित भारत’ के लिए एक बड़ा मील का पत्थर।
- अपराध पर लगाम और सुदृढ़ कानून-व्यवस्था से राज्य में बढ़ा भारी निवेश और औद्योगिक विकास।
- ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) और नई कौशल विकास योजनाओं ने ग्रामीण रोजगार को दी नई गति।
- पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘अंत्योदय’ दर्शन को साकार करती राज्य की पारदर्शी नीतियां और योजनाएं।
समकालीन समय में “विकसित भारत” का लक्ष्य केवल आर्थिक प्रगति का कोई सामान्य संकेतक नहीं है। बल्कि यह देश की सामाजिक समरसता और राजनीतिक स्थिरता का एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। इसके अलावा, यह सांस्कृतिक संतुलन और मानवीय गरिमा के विकास को भी स्पष्ट रूप से दिखाता है। इस व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में उत्तर प्रदेश का विकास मॉडल अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। क्योंकि यह राज्य जनसंख्या की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा प्रदेश है। इसके साथ ही, इसकी विशाल सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक विविधता इसे भारत के समग्र विकास का एक सच्चा प्रतिनिधि भी बनाती है। इसलिए, उत्तर प्रदेश आज समरसता, शांति, सुरक्षा और रोजगारपरक नीतियों के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार आज विकास का एक बहुत संतुलित मॉडल प्रस्तुत कर रही है। नतीजतन, यह पूरे देश के लिए एक बेहतरीन और अनुकरणीय उदाहरण बन सकता है।
हमें उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा को गहराई से समझना होगा। इसके लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि हम इसके सामाजिक और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को पूरी तरह ध्यान में रखें। बहुत लंबे समय तक यह विशाल राज्य कई गंभीर समस्याओं से जूझता रहा था। यहाँ के लोग जातीय विभाजन और भारी सामाजिक असमानता का शिकार थे। इसके अलावा, बेरोजगारी, अपराध और प्रशासनिक शिथिलता ने इस राज्य को विकास की दौड़ में बहुत पीछे धकेल दिया था। इन विपरीत परिस्थितियों ने राज्य के आर्थिक विकास को बहुत बाधित किया। साथ ही, इन्होंने समाज की समरसता को भी बुरी तरह प्रभावित किया। इस कठिन संदर्भ में “समरसता से समृद्धि तक” का नया विचार सामने आता है। यह केवल एक लोकलुभावन और राजनीतिक नारा बिल्कुल नहीं है। बल्कि यह एक बहुत गहरा और सच्चा सामाजिक दर्शन है। यह दर्शन स्पष्ट रूप से मानता है कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच हमें समानता और सम्मान सुनिश्चित करना होगा। इसके बिना समाज में कोई भी वास्तविक विकास कभी संभव नहीं है।
समरसता का अर्थ केवल सामाजिक सद्भाव तक ही सीमित नहीं है। बल्कि यह आर्थिक, शैक्षिक और राजनीतिक समानता को भी अपने अंदर पूरी तरह समाहित करता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कई शानदार और लाभकारी योजनाएं शुरू की हैं। इन नई नीतियों के माध्यम से सरकार ने समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाने का एक बहुत सफल प्रयास किया है। सबसे पहले, शिक्षा के क्षेत्र में गरीब छात्रों को भारी छात्रवृत्तियां दी गई हैं। सरकार ने युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों और डिजिटल शिक्षा का बहुत भारी विस्तार किया है। इससे राज्य के युवाओं को रोजगार के नए और बेहतर अवसर मिले हैं। इसी प्रकार, सरकार ने महिला सशक्तिकरण के लिए स्वयं सहायता समूहों (SHG) का भी गठन किया है। ‘मिशन शक्ति’ और अन्य कल्याणकारी योजनाओं ने महिलाओं को आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाया है। यह समावेशी दृष्टिकोण राज्य में सामाजिक समरसता को बहुत अधिक मजबूत करता है। दरअसल, यही समरसता किसी भी राज्य के सतत विकास की असली और मजबूत आधारशिला होती है。
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शांति और सुरक्षा हमेशा किसी भी विकास के दो सबसे अहम और बुनियादी स्तंभ होते हैं। हम इनके बिना किसी भी प्रकार की आर्थिक या सामाजिक प्रगति की कल्पना बिल्कुल नहीं कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति में बहुत भारी सुधार किया है। पुलिस ने संगठित अपराधियों और माफियाओं पर बहुत सख्ती से नकेल कसी है। नतीजतन, आज पूरे राज्य में भारी निवेश के लिए एक बहुत ही अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। जब किसी राज्य में अपराध की दर कम होती है, तो वहां के नागरिकों को सुरक्षा का पक्का भरोसा मिलता है। इसके तुरंत बाद उद्योग, व्यापार और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में स्वाभाविक रूप से बहुत भारी वृद्धि होती है। यह सुरक्षित और भयमुक्त माहौल राज्य की आय में रिकॉर्ड वृद्धि करता है। इसके अलावा, यह लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए और शानदार अवसर भी सृजित करता है। इस प्रकार, हम पूरे विश्वास के साथ कह सकते हैं कि शांति और सुरक्षा सीधे-सीधे आर्थिक समृद्धि से मजबूती से जुड़े हुए हैं。
रोजगार सृजन किसी भी विकासशील समाज के लिए सबसे बड़ी चुनौती और प्राथमिक जरूरत होती है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाया है। उत्तर प्रदेश में कुल जनसंख्या का एक बहुत बड़ा हिस्सा युवा है। यदि सरकार इस विशाल युवा शक्ति को सही दिशा और अवसर दे, तो यह राज्य की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है। इसके लिए सरकार ने कई विभिन्न औद्योगिक नीतियां और नियम लागू किए हैं। युवाओं के लिए कई नई स्टार्टअप योजनाएं और कौशल विकास कार्यक्रम आज सुचारू रूप से चल रहे हैं। सरकार ने कई अहम स्वरोजगार योजनाओं को भी सफलतापूर्वक लागू किया है। “एक जिला एक उत्पाद” (ODOP) जैसी शानदार और अभिनव पहल ने स्थानीय उद्योगों को एक नया जीवन दिया है। प्रदेश के कारीगरों ने अपनी खोई हुई पारंपरिक कारीगरी को फिर से पुनर्जीवित किया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर काफी ज्यादा बढ़े हैं। साथ ही, राज्य की पूरी स्थानीय अर्थव्यवस्था भी बहुत अधिक मजबूत हुई है。
औद्योगिक विकास के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने बहुत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। राज्य सरकार ने विभिन्न औद्योगिक गलियारों (जैसे डिफेंस कॉरिडोर) का तेजी से निर्माण किया है। सरकार ने कई बहुत सफल ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (निवेश सम्मेलनों) का शानदार आयोजन किया है। इस बुनियादी ढांचे के तीव्र और सुव्यवस्थित विकास के माध्यम से राज्य ने देश-विदेश के निवेशकों को भारी संख्या में आकर्षित किया है। सरकार ने सड़क, रेल, हवाई अड्डों और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक और बड़े सुधार किए हैं। एक्सप्रेसवे के शानदार जाल ने पूरे राज्य में व्यापार को बहुत सुगम और तेज़ बनाया है। यह समग्र विकास मॉडल रोजगार सृजन के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को भी बहुत तेज़ गति प्रदान करता है। विशेष रूप से, सरकार ने छोटे और सूक्ष्म (MSME) उद्योगों को भारी आर्थिक प्रोत्साहन दिया है। इसके जरिए राज्य सरकार ने रोजगार के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक बहुत सकारात्मक और दूरगामी कदम उठाया है。
हम यदि व्यवहारिक दृष्टिकोण से गहराई से देखें तो उत्तर प्रदेश का विकास मॉडल बहुत अलग है। यह मॉडल केवल हवा-हवाई नीतियों के निर्माण तक ही सीमित नहीं है। बल्कि सरकार ने उनके प्रभावी और ज़मीनी क्रियान्वयन पर भी बहुत विशेष ध्यान दिया है। मुख्यमंत्री ने राज्य में बड़े प्रशासनिक सुधार, डिजिटल गवर्नेंस और पूर्ण कार्य-पारदर्शिता को सख्ती से लागू किया है। इससे सभी सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में भारी मदद मिली है। यह महान विचारक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की “अंत्योदय” की बहुत ही महान अवधारणा है। सरकार इसे पूरी तरह साकार करने की दिशा में एक बहुत महत्वपूर्ण प्रयास कर रही है। इस मॉडल में समाज के सबसे कमजोर और गरीब वर्ग को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। जब विकास का मीठा लाभ समाज के हर गरीब वर्ग तक आसानी से पहुंचता है, तब ही समृद्धि का वास्तविक अर्थ पूरी तरह साकार होता है। सरकार का यह ईमानदार प्रयास उत्तर प्रदेश का विकास मॉडल पूरी दुनिया के सामने एक मिसाल बनाता है。
सामाजिक समरसता को हमेशा बनाए रखने के लिए सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करना भी अत्यंत आवश्यक है। उत्तर प्रदेश हमेशा से विभिन्न धर्मों, भाषाओं और विविध संस्कृतियों का एक बहुत पवित्र संगम रहा है। ऐसे विशाल और विविधतापूर्ण राज्य में समरसता बनाए रखना हमेशा एक बहुत चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। इसके लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि राज्य की नीतियां सभी समुदायों के प्रति एक समान व्यवहार सुनिश्चित करें। सरकार को समाज में आपसी संवाद को लगातार और मजबूती से प्रोत्साहित करना चाहिए। इस अहम संदर्भ में शिक्षा, मीडिया और सामाजिक संस्थाओं की सकारात्मक भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। जब हमारे समाज में खुले संवाद और सहिष्णुता का एक बहुत अच्छा वातावरण होता है, तब ही राज्य में स्थायी शांति आती है। और उसी शांति और भाईचारे से समाज का सच्चा और तेज़ विकास संभव होता है। उत्तर प्रदेश सरकार इसी दिशा में लगातार काम कर रही है。
विकसित भारत के महान राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उत्तर प्रदेश को बहुत मेहनत करनी होगी। सरकार को केवल आर्थिक विकास के आंकड़ों पर ही नहीं, बल्कि मानव विकास सूचकांकों पर भी पूरा ध्यान देना होगा। समाज में स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और स्वच्छता जैसे अहम क्षेत्रों में भारी सुधार करना होगा। इन ज़मीनी सुधारों के बिना समृद्धि का कोई भी विकास मॉडल हमेशा अधूरा ही रहेगा। हाल के कुछ वर्षों में सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं का बहुत भारी विस्तार किया है। राज्य के लगभग हर जिले में नए मेडिकल कॉलेजों की तेजी से स्थापना हुई है। सरकार ने ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का भारी सुदृढ़ीकरण किया है। इन सभी ठोस कदमों ने इस दिशा में बहुत सकारात्मक और उम्मीद भरे संकेत दिए हैं। इसी प्रकार, शिक्षा के क्षेत्र में भी बुनियादी ढांचे का बहुत तेजी से विकास हुआ है। स्कूलों में गुणवत्ता सुधार के गंभीर प्रयासों ने भविष्य की नई पीढ़ी को पूरी तरह सशक्त बनाने का नया मार्ग प्रशस्त किया है।
पर्यावरणीय संतुलन भी किसी भी सतत विकास का एक बहुत महत्वपूर्ण और अनिवार्य आयाम होता है। हम इसे किसी भी कीमत पर बिल्कुल नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश में तेज औद्योगिक विकास के साथ-साथ कड़े पर्यावरण संरक्षण के प्रयास भी बहुत ज्यादा आवश्यक हैं। सरकार ने जल संरक्षण, व्यापक वृक्षारोपण और प्रदूषण नियंत्रण जैसी कई अहम और बड़ी पहलें की हैं। ये सभी महत्वपूर्ण कदम राज्य के दीर्घकालिक और सुरक्षित विकास के लिए पूरी तरह अनिवार्य हैं। यदि हम विकास और पर्यावरण के बीच एक सही और प्राकृतिक संतुलन नहीं बनाएंगे, तो यह बहुत खतरनाक होगा। यह असंतुलन हमारे सुरक्षित भविष्य के लिए एक बहुत गंभीर और जानलेवा संकट उत्पन्न कर सकता है। इसलिए सरकार पर्यावरण को पूरी तरह बचाने के लिए बहुत ही कड़े और प्रभावी कदम उठा रही है। भविष्य की पीढ़ियों के लिए यह काम बहुत ज़रूरी है。
हम यदि आलोचनात्मक दृष्टि से गहराई से देखें तो उत्तर प्रदेश के विकास मॉडल के सामने अभी कई बड़ी चुनौतियां भी मौजूद हैं। राज्य में क्षेत्रीय असमानता और शहरी-ग्रामीण अंतर अभी भी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को हमें और भी बेहतर करना होगा। इसके अलावा, ग्रामीण और शहरी बेरोजगारी की जटिल समस्या को भी पूरी तरह खत्म करना होगा। सामाजिक समरसता को बनाए रखना भी एक बहुत लंबी और सतत चलने वाली प्रक्रिया है। इसके लिए सरकार और समाज को निरंतर प्रयासों की भारी आवश्यकता होती है। हम इन कठिन चुनौतियों का स्थायी समाधान केवल कागजी नीतिगत स्तर पर बिल्कुल नहीं कर सकते हैं। बल्कि हमें सामाजिक चेतना और व्यापक जनसहभागिता के माध्यम से इन्हें पूरी तरह सुलझाना होगा। व्यावहारिक स्तर पर यह बहुत आवश्यक है कि हम विकास की सभी योजनाओं को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार ही तैयार करें।
अंततः, सत्ता का विकेंद्रीकरण और स्थानीय स्वशासन की सुदृढ़ता इस दिशा में एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सरकार को अपनी ग्राम पंचायतों, नगर निकायों और स्थानीय संस्थाओं को अधिक वित्तीय अधिकार देने ही होंगे। उन्हें पर्याप्त संसाधन देकर विकास को बिल्कुल जमीनी स्तर तक बहुत आसानी से पहुंचाया जा सकता है। इससे न केवल सभी सरकारी योजनाओं का बहुत प्रभावी क्रियान्वयन होगा, बल्कि आम लोगों की सीधी सहभागिता भी काफी बढ़ेगी। यह जन-सहभागिता समाज की समरसता और आर्थिक समृद्धि के लिए बेहद आवश्यक है। उत्तर प्रदेश का यह समग्र विकास मॉडल वास्तव में “विकसित भारत” की महान परिकल्पना को पूरी तरह साकार कर रहा है। यह मॉडल स्पष्ट करता है कि विकास केवल पैसे की अंधी वृद्धि का नाम नहीं है। बल्कि यह सामाजिक न्याय, मानवीय गरिमा और समान अवसरों का एक बहुत ही समग्र और सुंदर परिणाम है। यदि हम इस मॉडल को निरंतर आगे बढ़ाएंगे, तो यह पूरे भारत के लिए एक महान प्रेरणास्रोत बनेगा। और यह भारत को दुनिया का सिरमौर बनाएगा。
Pawan Singh
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