Vishnu Nagar political satire article on Indian politics, corporate connections and silence on US Iran conflict

राजनैतिक व्यंग्य: नरेन्दर भी गायब, सिलेंडर भी गायब, शर्म भी गायब! सत्ता की खामोशी पर करारा प्रहार

आर्टिकल

Edited by: Pawan Singh | tajnews.in | Agra | 17 Mar 2026, 09:45 PM IST

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Taj News Satire Desk

राजनैतिक व्यंग्य-समागम
Vishnu Nagar Writer
विष्णु नागर
वरिष्ठ व्यंग्यकार एवं लेखक
वरिष्ठ व्यंग्यकार विष्णु नागर ने अपने इस मारक और तीखे राजनैतिक व्यंग्य में सत्ता की खामोशी और जवाबदेही से भागने की आदत पर गहरा कटाक्ष किया है। उन्होंने ईरान-अमेरिका संकट से लेकर घरेलू मुद्दों तक, सत्ताधीशों की ‘गायब’ रहने की कला और उनके कॉरपोरेट प्रेम को बेनकाब किया है। पढ़िए यह शानदार आलेख:

मुख्य बिंदु

  • संसद और देश के ज्वलंत मुद्दों से सत्ताधीश के रहस्यमयी तरीके से ‘गायब’ रहने पर करारा व्यंग्य।
  • कोरोना काल में ऑक्सीजन और नोटबंदी में महिलाओं की बचत ‘गायब’ होने की कड़वी यादों का ज़िक्र।
  • ईरान-अमेरिका युद्ध में भारत के मेहमान ईरानी जहाज पर हमले और मासूम बच्चियों की मौत पर ‘विश्व गुरु’ की चुप्पी पर प्रहार।
  • अडानी-अंबानी जैसे बड़े कॉरपोरेट घरानों के हितों की रक्षा के लिए विदेशी ताकतों के आगे ‘सरेंडर’ की तीखी आलोचना।

मैं आज हाथ जोड़कर आप सबसे एक विनम्र निवेदन करना चाहता हूं। आप कृपया ‘नरेन्दर भी गायब, सिलेंडर भी गायब’ का पुराना और घिसा-पिटा नारा बिल्कुल मत लगाओ मेरे सांसद भाइयों और बहनों! नरेन्दर की सिलेंडर से तुक तो भले ही बहुत अच्छी मिलती है, मगर असल में इससे उसका कोई लेना-देना बिल्कुल नहीं है। सच कहूं तो उसका अपने आप के अलावा दुनिया के किसी भी अन्य बायोलाजिकल प्राणी से कोई सीधा लेना-देना नहीं है। उसका इस देश से भी कोई लेना-देना नहीं है! जिस महान धर्म की पुंगी वह दिन-रात बजाता हुआ घूमता रहता है, उससे भी उसका कोई सच्चा लेना-देना नहीं है। और तो और, इस पूरी दुनिया और उसकी तकलीफों से भी उसका कोई लेना-देना नहीं है। उसे बस खुद से, अपने कैमरे से और अपने इवेंट मैनेजमेंट से प्यार है।

आप नरेन्दर को कितना ही पुकार लो, उसे कितना ही ज़लील कर लो या उससे कितने भी तीखे सवाल पूछ लो। उसने संसद में हमेशा गायब रहने की भारत माता के सामने एक पक्की कसम खाई हुई है। वह हर हाल में अपनी यह कसम निभाकर ही रहेगा। वह कल भी गायब था, वह आज भी गायब है और वह आगे भी पूरी तरह गायब ही रहेगा। अगर वह इधर सत्ता में है, तो भी वह प्रेस कांफ्रेंस से गायब ही रहेगा। और अगर कभी जनता ने गुस्से में आकर उसे उधर विपक्ष में पटक दिया, तो भी वह हमेशा ग़ायब ही रहेगा! यह उसकी फितरत का एक बहुत स्थायी भाव बन चुका है। वह कभी भी जनता के तीखे सवालों का सीधा जवाब देने के लिए सामने नहीं आएगा। जवाबदेही उसके शब्दकोश में है ही नहीं।

वह कभी अकेला ही गायब नहीं रहेगा। बल्कि वह धीरे-धीरे इस देश से सिलेंडर को भी गायब करेगा। आपको याद है न, कोरोना के उस डरावने काल में उसने अपने साथ-साथ आक्सीजन सिलेंडर को भी कैसे गायब करवा दिया था! श्मशानों के बाहर लंबी लाइनें लगी थीं और आक्सीजन की भारी कमी से लोग तड़प रहे थे। और इसके बाद उसने बड़ी चालाकी से इसका जिक्र भी कोरोना के आधिकारिक इतिहास से हमेशा के लिए गायब करवा दिया था! उसने देश से कालाधन खत्म करने के नाम पर घर की औरतों की छोटी-छोटी और मेहनत की बचतें गायब करवा दी थीं। और फिर जो शख्स बड़ी शान से किसी भी चौराहे पर कोई भी कड़ी सज़ा भुगतने को तैयार था, वह शख्स भी 50 दिन बाद रातों-रात गायब हो गया था! बस इस पूरे देश से वह कालाधन कभी गायब नहीं हुआ था, जिसे हमेशा के लिए गायब करने की उसने गंगा किनारे सौगंध खाई थी!

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कुछ दिनों की बात है, आप बस देखते रहना। वह सिलेंडर की तरह देश से कहीं किसानों की खाद भी पूरी तरह गायब न करवा दे! हमारे गरीब किसान खाद की एक बोरी के लिए लंबी लाइनों में खड़े होकर रोएंगे। और नरेंदर बड़े आराम से टीवी पर आकर कहेगा कि विपक्ष सिर्फ अफवाह फैला रहा है। किसान के पास बोने के लिए बीज होगा, आसमान से पानी बरस चुका होगा। मगर उस समय खेत से खाद और नरेन्दर, दोनों ही पूरी तरह गायब होंगे! किसी दिन हमें अचानक पता चलेगा कि होर्मुज की खाड़ी से आयातित होने वाला हमारा अनाज और कीमती मशीनरी सब कुछ गायब है। और इन सब भयानक सवालों का जवाब देने वाला नरेन्दर भी अपनी जगह से गायब है। गायब होना ही नरेन्दर का असली धर्म है। यही उसका कर्म है। और यही उसके रहस्यमयी व्यक्तित्व का असली मर्म है! उसके शरीर पर बहुत मोटा चर्म चढ़ा हुआ है, जिस पर आलोचनाओं का कोई असर नहीं होता। और उसकी आंखों से हर तरह की शर्म पूरी तरह गायब हो चुकी है।

नरेन्दर जब भी देश की नज़रों से गायब होगा, तब वह कहीं चुपचाप और खाली नहीं बैठा होगा। वह कहीं न कहीं ट्रंप के सामने पूरी तरह सरेंडर करने के लिए, ‘मे आई कम इन सर’ की करुण पुकार लगा रहा होगा। अगर ट्रंप ने उसे अंदर आने की अनुमति दी, तो वह उसके आगे नतशिर होकर नए दिशा-निर्देश हासिल कर रहा होगा। वह भारत में ही आयोजित नौ-सैन्य अभ्यास ‘मिलन-26’ में शामिल होकर लौट रहे ईरानी जहाज की हिंद महासागर में स्थिति की पूरी खुफिया खबर अपने अमेरिकी बास को दे रहा होगा। वह इस्राइली प्रधानमंत्री के साथ ‘हा हा ही ही’ वाली अपनी चिर-परिचित शैली में ईरान की बर्बादी का जश्न मना रहा होगा! वह मुकेश अंबानी को अमेरिका की सबसे बड़ी आइल रिफाइनरी में जबरदस्त निवेश करने के लिए अपनी ओर से बधाई दे रहा होगा। ट्रंप ने अंबानी को इसकी बधाई दी है, इस खुशी में वह खुद नाच-गा रहा होगा और अपने ‘मित्रों’ की तरक्की पर तालियां पीट रहा होगा!

वह अपने दूसरे चहेते मित्र अडानी को भी आश्वासन दे रहा होगा। वह कह रहा होगा कि तू इतना घबराता क्यों है मेरे दोस्त? ट्रंप से पहले‌ मैं अपनी फाइल पूरी तरह सेट करवाऊंगा। और फिर तेरा जो भी फंसा हुआ मामला है, वह भी सेट करवा दूंगा! तू अपने मन में क्या समझता है? क्या नरेन्दर ने यूं ही फोकट में अमेरिका के आगे इतना बड़ा सरेंडर किया है! जिसमें तेरा हित है, उसी में मेरा हित है। और वही हमारा ‘राष्ट्रहित’ है, वही हमारा ‘हिंदू हित’ है। वही हमारा युद्ध है और वही हमारी शांति है! तू बिल्कुल घबरा मत। तू मुझे अपना पक्का सारथी जान। तू मुझे अपना असली कृष्ण मान! मैं इस पूरे देश को धोखा दे सकता हूं, लेकिन तुझे कभी धोखा नहीं दे सकता। तू इतनी जल्दी भूल गया क्या? कि वह मैं ही था, जिसने ईरान के सुप्रीम लीडर की हत्या पर ट्रंप और नेतन्याहू को खुश करने के लिए दुखी होने का कोई नाटक तक नहीं किया था! तेरी और मेरी विदेशी हितों की रक्षा के लिए मैंने एक शब्द तक इस पर खर्च नहीं किया था!

ईरान के मिनाब गर्ल्स स्कूल की 165 मासूम बच्चियों की बेरहम हत्या पर भी मैंने अपना मुंह नहीं खोला था। वरना मेरे आंसू तो मेरे अपने बस में हैं। मैं जब चाहूं, जहां चाहूं, वहीं रो दूं! कैमरे का एंगल सेट होते ही मेरे आंसू अपने आप छलक पड़ते हैं। तू बस एक बार मुझे आदेश दे। तो मैं बुक्का फाड़ कर हंसने वाली किसी बात पर भी कैमरे के सामने जार-जार आंसू बहाकर दिखा दूं! मैं बहुत बेशर्म हूं। और मैं इतना अधिक बेशर्म हूं कि भारत के मेहमान बनकर आए ईरान के सैन्य जहाज को नष्ट कर दिया गया। उसके 84 सैनिक अमेरिका ने हमारे ही पड़ोस में मार डाले। तो भी मैं अपनी आंख-कान पूरी तरह बंद किए रहा। मैं अपनी जगह से हिला तक नहीं। मैं कूटनीति के नाम पर ट्रंप की गोद में मस्त लेटा रहा। मैं गहरी नींद का झूठा बहाना करता रहा।

इस दर्दनाक घटना पर श्रीलंका की छोटी सी सरकार को भी शर्म आई। श्रीलंका ने बेधड़क होकर सच बोला। मगर मुझे बिल्कुल शर्म नहीं आई, तो मैं इसमें क्या करता! शर्म ससुरी कहीं बाजार में बिकती भी तो नहीं है। मैं उसे लाता भी तो कहां से? हमारे बजरंग दल वाले अपनी शर्म मुझे उधार देने को तैयार थे। मगर उनकी और मेरी नस्ल चूंकि बिल्कुल एक ही है, तो बताओ मैं उनकी उस बासी शर्म का क्या करता! अब मुझे बस यह डर सता रहा है कि कहीं इस लंबी जंग में अमेरिका का वैश्विक वजन घट न जाए। और कहीं ईरान का वजन अचानक बढ़ न जाए। कहीं पासा उल्टा न पड़ जाए! इसलिए मैंने पूरे बारह दिन बाद बड़ी चालाकी से ईरान के नए राष्ट्रपति से फोन पर कह दिया है कि “भारत हमेशा से ईरान का दोस्त है।” मगर ईरान का राष्ट्रपति भी यह अच्छी तरह जानता है कि मेरे इस मीठे वाक्य का ज़मीनी हकीकत से कोई लेना-देना बिल्कुल नहीं है! मेरी कूटनीति में सिर्फ दिखावा है, सच्चाई नहीं। मैं तो बस उस हवा का रुख भांप रहा हूँ, जिस ओर मेरा और मेरे मित्रों का मुनाफा है!

Pawan Singh

Pawan Singh

Chief Editor, Taj News
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