Political Desk, Taj News | Updated: Wednesday, 11 March 2026, 10:38 PM IST
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के दौरान की तस्वीर।
पिछले एक दशक से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे हैं। 2014 में सत्ता में आने के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को लगातार चुनावी जीत दिलाई और देश की राजनीति में एक मजबूत नेतृत्व की छवि बनाई। लेकिन पिछले एक वर्ष में कुछ घटनाक्रमों ने प्रधानमंत्री की छवि को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। ऑपरेशन सिंदूर, अमेरिका के साथ हुआ व्यापार समझौता, अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत की प्रतिक्रिया और वैश्विक राजनीति में बदलते समीकरणों को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।
सोशल मीडिया पर भी इन घटनाओं को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे प्रधानमंत्री की छवि को प्रभावित करने वाला मानते हैं, जबकि कई राजनीतिक विश्लेषक इसे सामान्य राजनीतिक बहस का हिस्सा बताते हैं। इन सवालों को समझने के लिए उन घटनाओं पर नजर डालना जरूरी है जिनके कारण यह चर्चा शुरू हुई।
भारतीय राजनीति में ‘ब्रांड मोदी’
2014 के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति के केंद्र में रहे हैं। उनके नेतृत्व में भाजपा ने लगातार चुनावी सफलताएं हासिल कीं और कई राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत की। यही वजह है कि राजनीतिक विश्लेषकों ने ‘ब्रांड मोदी’ शब्द का इस्तेमाल शुरू किया। इसका अर्थ यह था कि प्रधानमंत्री की लोकप्रियता भाजपा के लिए चुनावों में एक महत्वपूर्ण कारक बन गई है।
लोकसभा से लेकर विधानसभा चुनावों तक भाजपा को मिली जीत ने इस ब्रांड को और मजबूत किया। कई राज्यों में भाजपा ने पहली बार सरकार बनाई और कई जगहों पर पहले से बेहतर प्रदर्शन किया। यही कारण है कि प्रधानमंत्री की छवि को लेकर होने वाली हर बहस राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
क्या था ऑपरेशन सिंदूर
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए। इस सैन्य अभियान को ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया और कई प्रशिक्षण शिविरों को नष्ट कर दिया।
इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त नीति के रूप में देखा गया। हालांकि इसके कुछ ही दिनों बाद युद्धविराम की घोषणा ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया।
सीजफायर और राजनीतिक विवाद
भारत की सैन्य कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने भी जवाबी हमले किए। दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया। इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर की घोषणा कर दी।
इस घोषणा के बाद विपक्ष ने सवाल उठाए कि क्या अमेरिका ने इस मामले में मध्यस्थता की भूमिका निभाई। सरकार का कहना था कि यह निर्णय दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद लिया गया।
अमेरिका के साथ ट्रेड डील
फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा की गई। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया। सरकार का कहना है कि इससे भारतीय उद्योगों और निर्यात को फायदा होगा।
हालांकि विपक्ष का आरोप है कि इस समझौते के कारण भारत को कुछ रणनीतिक रियायतें देनी पड़ी हैं, जिनमें रूस से तेल खरीद कम करने का मुद्दा भी शामिल है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कैबिनेट मीटिंग।
इन घटनाओं के बाद प्रधानमंत्री की छवि को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष लगातार सरकार से पारदर्शिता की मांग कर रहा है। हालांकि कई सर्वे बताते हैं कि अभी भी बड़ी संख्या में लोग प्रधानमंत्री मोदी को देश का सबसे लोकप्रिय नेता मानते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का प्रभाव राजनीति पर पड़ता जरूर है, लेकिन इसका असर चुनावी परिणामों में किस तरह दिखाई देगा यह आने वाला समय ही बताएगा।
Chief Editor, Taj News
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