एत्मादपुर के सवाई गांव में ट्रैक्टर मार्च रोकने के लिए बैरियर और जेसीबी तैनात; कालिंदी विहार में भी प्रदर्शन, कई मार्गों पर पुलिस बल और ड्रोन से निगरानी
आगरा डेस्क, 🌐 tajnews.in | शुक्रवार, 18 सितंबर 2026, 03:15:20 PM IST

tajnews.in | आगरा, 18 सितंबर 2026। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 2026 के इक्विटी नियमों को लेकर शुक्रवार को आगरा में विरोध प्रदर्शन हुए। एत्मादपुर क्षेत्र के सवाई गांव से प्रस्तावित ट्रैक्टर मार्च को पुलिस और पीएसी ने गांव से आगे बैरिकेडिंग कर रोक दिया। कलेक्ट्रेट की ओर जाने की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प की स्थिति बनी। मौके पर भारी पुलिस बल के साथ जेसीबी भी तैनात की गई थी।
उधर, कालिंदी विहार में भी यूजीसी के नियमों के विरोध में प्रदर्शन हुआ। करीब डेढ़ घंटे चले प्रदर्शन के बाद प्रदर्शनकारी वापस लौट गए और यातायात सामान्य कराया गया।
सवाई गांव में ट्रैक्टर मार्च रोकने पर झड़प
सवाई गांव से आगरा कलेक्ट्रेट तक ट्रैक्टर मार्च का आह्वान सिस्टम सुधर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंशुमान ठाकुर के नेतृत्व में किया गया था। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार बड़ी संख्या में युवा ट्रैक्टरों के साथ आगरा की ओर बढ़े।
गांव से आगे पुलिस और पीएसी ने बैरियर लगाकर मार्च को रोक दिया। ट्रैक्टरों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए मौके पर जेसीबी भी लगाई गई थी। प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट तक जाने की मांग पर अड़े रहे, जबकि पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी।
इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को पीछे की ओर हटाया। घटनास्थल के आसपास बड़ी संख्या में ट्रैक्टर खड़े रहे और पुलिस बल तैनात रहा।
मार्च से पहले ही बढ़ा दी गई थी पुलिस निगरानी
18 सितंबर के ट्रैक्टर मार्च के ऐलान के बाद पुलिस-प्रशासन ने एत्मादपुर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी। विभिन्न स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया और संगठनों के पदाधिकारियों से बातचीत कर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई।
आंवलखेड़ा, बरहन, एत्मादपुर, कुबेरपुर और रामबाग की ओर आने-जाने वाले प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई। संवेदनशील स्थानों पर पीएसी की तैनाती के साथ ड्रोन से भी निगरानी की गई।
18 सितंबर की स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार कुछ संगठन पदाधिकारियों को उनके घरों पर नजरबंद किए जाने की कार्रवाई भी की गई थी। प्रशासन ने प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने की जानकारी संगठनों को पहले ही दी थी।
कुछ संगठनों ने कार्यक्रम से बनाई दूरी
ट्रैक्टर मार्च से पहले कुछ सामाजिक और किसान संगठनों की ओर से कार्यक्रम से दूरी बनाने या उसे स्थगित करने की बात सामने आई थी। भारतीय किसान यूनियन भानु ने भी कार्यक्रम स्थगित करने की घोषणा की थी।
इसके बावजूद अंशुमान ठाकुर की ओर से ट्रैक्टर मार्च जारी रखने की घोषणा की गई और शुक्रवार सुबह सवाई गांव से प्रदर्शनकारी ट्रैक्टरों के साथ निकल पड़े।
कालिंदी विहार में भी हुआ प्रदर्शन
कालिंदी विहार क्षेत्र में भी शुक्रवार को यूजीसी के 2026 नियमों के विरोध में प्रदर्शन हुआ। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार करणी सेना के प्रदेश महामंत्री दिनेश जादौन के नेतृत्व में सीएनजी पंप के पीछे प्रदर्शनकारी जुटे।
करीब डेढ़ घंटे चले प्रदर्शन के दौरान सड़क पर यातायात प्रभावित हुआ। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर यूजीसी के नियम वापस लेने की मांग से जुड़े नारे लगाए। प्रदर्शन में युवा, महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल रहे।
सूचना मिलने पर ट्रांस यमुना थाना पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। करीब 12 बजे प्रदर्शनकारी वापस लौट गए, जिसके बाद यातायात सामान्य कराया गया।
प्रदर्शन में करणी सेना के युवा प्रदेश अध्यक्ष करण ठाकुर, प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्गेश सिसोदिया, विशाल उपाध्याय, ललित जादौन, मोहित सिकरवार, रोहित सिकरवार, गौरव ठाकुर, उदय ठाकुर, गोलू पंडित, मोहन उपाध्याय और हिमांशु ठाकुर समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
आखिर किन नियमों का विरोध हो रहा है?
विरोध UGC के University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 को लेकर है। यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार ये नियम 13 जनवरी 2026 को प्रकाशित किए गए थे। इनका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और भेदभाव से संबंधित व्यवस्था के लिए नया नियामकीय ढांचा उपलब्ध कराना था।
इन नियमों की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। 29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने 2026 के नियमों को अगले आदेश तक प्रभावी न रखने का निर्देश दिया। अदालत ने साथ ही 2012 के यूजीसी इक्विटी नियमों को अंतरिम रूप से लागू रखने का आदेश दिया। अपने आदेश में अदालत ने 2026 के नियमों के कुछ प्रावधानों में प्रथम दृष्टया अस्पष्टता और संभावित दुरुपयोग की संभावना का उल्लेख करते हुए कई कानूनी सवालों की विस्तृत जांच जरूरी बताई थी।
अगस्त में केंद्र ने कहा था- नियमों पर पुनर्विचार जारी
20 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि 2026 के यूजीसी इक्विटी नियमों पर पुनर्विचार किया जा रहा है। इसके बाद अदालत ने यूजीसी को चुनौती से संबंधित मामले में व्यापक जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था।
इस तरह 18 सितंबर को आगरा में हुआ विरोध ऐसे समय में हुआ है, जब 2026 के नियमों की कानूनी स्थिति सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के अधीन है और केंद्र सरकार भी नियमों पर पुनर्विचार की बात अदालत के समक्ष रख चुकी है।
सितंबर में पहले भी हुए हैं प्रदर्शन
आगरा में इस मुद्दे को लेकर सितंबर की शुरुआत से विरोध गतिविधियां सामने आती रही हैं। 10 सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने 18 सितंबर को बड़े ट्रैक्टर मार्च और कलेक्ट्रेट घेराव का ऐलान किया था। इसके बाद पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई थी।
अब 18 सितंबर को सवाई गांव में ट्रैक्टर मार्च रोके जाने और कालिंदी विहार में प्रदर्शन के बाद संबंधित क्षेत्रों में पुलिस निगरानी बढ़ा दी गई है। फिलहाल प्रशासन की ओर से प्रदर्शन के दौरान किसी बड़ी हिंसक घटना या व्यापक नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है।
यह भी पढ़ें

Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
7579990777




