पीएम मोदी का मंत्रियों से सीधा सवाल- आंकड़े छोड़िए, बताइए विकसित भारत के लिए आपने खुद क्या किया?

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तीन घंटे से ज्यादा चली मैराथन बैठक में करीब 20 राज्यमंत्रियों से व्यक्तिगत कामकाज का हिसाब; आंगनबाड़ी, पीएम स्वनिधि से लेकर सोशल मीडिया तक जमीनी सक्रियता पर सवाल

राष्ट्रीय डेस्क, 🌐 tajnews.in | बुधवार, 9 सितंबर 2026, 10:12:15 AM IST

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tajnews.in | नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को करीब 20 केंद्रीय राज्यमंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के साथ तीन घंटे से अधिक समय तक चली मैराथन बैठक में मंत्रालयों की उपलब्धियों के आंकड़ों से आगे बढ़कर मंत्रियों के व्यक्तिगत कामकाज की समीक्षा की। प्रधानमंत्री ने जानना चाहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मंत्री की अपनी पहल क्या रही, वह कितनी बार जनता और लाभार्थियों के बीच पहुंचे और सरकारी योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने में उन्होंने व्यक्तिगत रूप से क्या भूमिका निभाई।

बैठक में कृषि, ग्रामीण विकास, शिक्षा और सामाजिक न्याय समेत विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े मंत्री शामिल हुए। खास बात यह रही कि समीक्षा के दौरान मंत्रियों से सीधे संवाद किया गया और वरिष्ठ नौकरशाहों को बैठक से अलग रखा गया। इससे मंत्रियों की व्यक्तिगत जवाबदेही पर प्रधानमंत्री के जोर का संकेत मिला।

HIGHLIGHTS
  • पीएम मोदी ने 20 राज्यमंत्रियों के साथ 3 घंटे से अधिक समय तक की मैराथन समीक्षा बैठक।
  • नौकरशाहों को बैठक से रखा बाहर; योजनाओं के आंकड़ों के बजाय व्यक्तिगत योगदान पर हुआ सवाल।
  • आंगनबाड़ी केंद्रों के दौरे, पीएम स्वनिधि लाभार्थियों से संवाद और सोशल मीडिया पर जवाबदेही तय।
  • संभावित कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं के बीच मंत्रियों के परफॉर्मेंस की सीधी पड़ताल।

पीएम ने पूछा- सचिव आंकड़े बता देंगे, आप खुद क्या कर रहे हैं?

बैठक में कुछ मंत्री अपने मंत्रालय की योजनाओं और उपलब्धियों के आंकड़े पेश कर रहे थे। इसी दौरान प्रधानमंत्री ने उन्हें आंकड़ों तक सीमित रहने के बजाय अपने व्यक्तिगत योगदान पर बात करने को कहा।

सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री का जोर इस बात पर था कि मंत्रालय की उपलब्धियों का आकलन केवल अधिकारियों की रिपोर्ट से नहीं होना चाहिए। मंत्री को यह बताना होगा कि उन्होंने स्वयं कौन-सी पहल की, जनता के बीच उनकी पहुंच कितनी रही और योजनाओं के क्रियान्वयन को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने क्या किया।

आंगनबाड़ी पर सवाल- खुद कितने केंद्रों में गए?

समीक्षा के दौरान एक मंत्री से मंत्रालय की उपलब्धियां गिनाने के बजाय प्रधानमंत्री ने पूछा कि मंत्री बनने के बाद उन्होंने कितने आंगनबाड़ी केंद्रों का दौरा किया। उनसे यह भी पूछा गया कि उन्होंने बच्चों के लिए खिलौने जैसी प्रत्यक्ष पहल कितनी जगह की।

इस सवाल के जरिए प्रधानमंत्री यह जानना चाहते थे कि मंत्री अपने मंत्रालय से जुड़ी योजनाओं और संस्थाओं से जमीनी स्तर पर कितना जुड़ रहे हैं। आंगनबाड़ी व्यवस्था पोषण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और बच्चों के विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण व्यवस्था है।

पीएम स्वनिधि के लाभार्थियों से कितनी मुलाकात?

एक अन्य मंत्री से पीएम स्वनिधि योजना को लेकर सवाल किया गया। प्रधानमंत्री ने जानना चाहा कि मंत्री ने रेहड़ी-पटरी वालों से जुड़ी इस योजना के कितने लाभार्थियों से स्वयं मुलाकात की और योजना का लाभ लोगों तक पहुंचाने में उनकी व्यक्तिगत भूमिका क्या रही।

इससे समीक्षा का एक अहम पैमाना सामने आया। योजनाओं की सफलता केवल इस आधार पर नहीं देखी जाएगी कि कितनी राशि जारी हुई या कितने लाभार्थियों का आंकड़ा सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। यह भी देखा जाएगा कि संबंधित मंत्री खुद लाभार्थियों तक कितनी सक्रियता से पहुंचे।

विकसित भारत 2047 में अपना योगदान बताने को कहा

प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के संदर्भ में उनकी व्यक्तिगत प्राथमिकताएं और योगदान बताने को कहा। मंत्रियों को अपने मंत्रालय की सामान्य उपलब्धियां बताने के बजाय यह स्पष्ट करना था कि वे अपनी जिम्मेदारी के क्षेत्र में ऐसी कौन-सी पहल कर रहे हैं, जिससे 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में ठोस योगदान हो।

मंत्रियों से भविष्य के लिए कार्रवाई योग्य विचार और नई पहल रखने को भी कहा गया। योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को बेहतर बनाने और सरकारी नीतियों को लोगों की जरूरतों से जोड़ने पर जोर दिया गया।

सोशल मीडिया पर भी रिपोर्ट कार्ड

मंत्रियों की सोशल मीडिया सक्रियता भी समीक्षा का हिस्सा रही। उनसे X, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर उनकी सक्रियता तथा सरकार की योजनाओं और मंत्रालय के काम को जनता तक पहुंचाने के तरीके के बारे में पूछा गया।

प्रधानमंत्री का जोर केवल पोस्ट करने पर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया को जनसंवाद का माध्यम बनाने पर रहा। जनता के सुझाव सुनने, योजनाओं की जानकारी देने और सरकार के कामकाज की जानकारी लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।

गरीब कल्याण योजनाओं की जमीनी पहुंच पर फोकस

बैठक में गरीब कल्याण से जुड़ी योजनाओं और कार्यक्रमों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि मंत्री मंत्रालय के काम को फाइलों और सरकारी रिपोर्टों तक सीमित न रखें।

मंत्रियों से जनता के बीच जाने, लाभार्थियों से मिलने और योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति समझने की अपेक्षा की गई। यानी समीक्षा का केंद्र सरकारी आंकड़ों के साथ-साथ योजनाओं की जमीनी पहुंच भी रही।

सिर्फ मंत्रालय की उपलब्धि नहीं, मंत्री की व्यक्तिगत जिम्मेदारी

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण संदेश राजनीतिक जवाबदेही से जुड़ा दिखाई देता है। सामान्य तौर पर मंत्रालयों के काम का मूल्यांकन योजनाओं के आंकड़ों, बजट खर्च और प्रशासनिक रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है। लेकिन इस बैठक में प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से यह जानने की कोशिश की कि इन उपलब्धियों के पीछे उनकी अपनी पहल क्या रही।

सीधे शब्दों में कहें तो सवाल सिर्फ यह नहीं था कि मंत्रालय ने क्या किया, बल्कि यह भी था कि मंत्री ने खुद क्या किया।

कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं के बीच बैठक अहम

प्रधानमंत्री की इस समीक्षा बैठक का राजनीतिक महत्व भी है। केंद्रीय मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल की चर्चाओं के बीच राज्यमंत्रियों के कामकाज की इस तरह सीधी समीक्षा को राजनीतिक हलकों में प्रदर्शन के आकलन से जोड़कर देखा जा रहा है।

हालांकि बैठक के आधार पर किसी मंत्री को हटाने, विभाग बदलने या फेरबदल का कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल इसे मंत्रियों के कामकाज और जवाबदेही की समीक्षा की प्रक्रिया के रूप में ही देखा जाना उचित होगा।

दूसरे समूह के मंत्रियों की भी हो सकती है समीक्षा

प्रधानमंत्री आने वाले दिनों में राज्यमंत्रियों के दूसरे समूह के साथ भी इसी तरह की बैठक कर सकते हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह समीक्षा केवल एक बैठक तक सीमित नहीं हो सकती।

इन बैठकों के जरिए सरकार के कामकाज, योजनाओं के क्रियान्वयन और मंत्रियों की व्यक्तिगत सक्रियता का व्यापक आकलन किए जाने की संभावना है।

मोदी का संदेश- मंत्रालय चलाना ही काफी नहीं

पूरी बैठक का सार यही है कि प्रधानमंत्री मंत्रियों से केवल मंत्रालय की फाइलों और आंकड़ों की निगरानी करने की भूमिका नहीं चाहते। उनसे अपेक्षा है कि वे योजनाओं को जमीन तक ले जाएं, लाभार्थियों से मिलें, जनता से संवाद करें और अपने मंत्रालय के काम को विकसित भारत के व्यापक लक्ष्य से जोड़ें।

यानी अब समीक्षा का सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ‘आपके मंत्रालय ने क्या किया?’ बल्कि यह भी है कि ‘आपने मंत्री के तौर पर खुद क्या किया?’

यही व्यक्तिगत जवाबदेही इस मैराथन बैठक को सामान्य समीक्षा बैठकों से अलग बनाती है। साथ ही संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाओं के बीच इस समीक्षा पर राजनीतिक नजर भी बनी हुई है।

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Pawan Kumar Singh Editor in Chief Taj News

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