किस्सा कहानी-8 में कथाकार शक्ति प्रकाश ने ‘सो एंड सो’ का किया पाठ, ‘कहानी और समाज का सच’ पर हुआ विमर्श
Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Sunday, 16 August, 2026, 10:13:00 PM IST.

tajnews.in | आगरा: “पहले दरोगा ने सिपाहियों की तरफ मुस्कुराकर देखा, फिर एक के बाद एक पांच गोलियों की आवाज आई। जो पांच किलोमीटर तक सबने सुनी…” वरिष्ठ कथाकार शक्ति प्रकाश की कहानी ‘सो एंड सो’ के इस अंश ने श्रोताओं का ध्यान खींचा। कहानी में कथित एनकाउंटर के बाद आम लोगों की प्रतिक्रिया और बदलते सामाजिक माहौल को कथाकार ने कहानी के माध्यम से सामने रखा।
मौका था किस्सा कहानी-8 का, जिसका आयोजन रंगलीला और नई दिल्ली की कहानी पत्रिका कथादेश की ओर से शीरोज़ हैंग आउट में किया गया। कार्यक्रम में शक्ति प्रकाश ने अपनी कहानी ‘सो एंड सो’ का पाठ किया। कहानी पाठ के बाद साहित्यप्रेमियों और श्रोताओं ने कथाकार से कहानी के कथ्य, पात्रों और सामाजिक सरोकारों को लेकर सवाल किए। इसके माध्यम से कहानी के विभिन्न पहलुओं पर संवाद हुआ।

कहानी से पहले ‘कहानी और समाज का सच’ पर हुआ विमर्श
कथा पाठ से पहले ‘कहानी और समाज का सच’ विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। विषय प्रवर्तन करते हुए केंद्रीय हिंदी संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. रामवीर सिंह ने कहा कि भारतीय कहानी में समाज के सच को सामने लाने की शुरुआत मुंशी प्रेमचंद ने की। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने आम लोगों के जीवन की कहानियां सामने रखीं और बाद में अनेक कहानीकारों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया।
उन्होंने कहानी को समाज के जीवन और आम आदमी की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने वाली विधा के रूप में रेखांकित किया।

कहानी में यथार्थ मौजूद है : रामनाथ शर्मा
कार्यक्रम की अध्यक्षता कथाकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता रामनाथ शर्मा ने की। उन्होंने शक्ति प्रकाश की कहानी ‘सो एंड सो’ पर विचार रखते हुए कहा कि कहानी में यथार्थ मौजूद है।
उन्होंने कहा कि अस्सी के दशक में लेखक राजनीति से दूरी बनाए रखता था, लेकिन आज का लेखक राजनीति और अपने आसपास घट रही घटनाओं पर प्रतिक्रिया देता है। उनके अनुसार समकालीन कहानी समाज में हो रहे बदलावों और राजनीतिक-सामाजिक परिस्थितियों को अभिव्यक्त करने का माध्यम बन रही है।
कहानी में लोकतंत्र की चुनौतियों पर चर्चा
कहानी पाठ के बाद श्रोताओं ने कथाकार शक्ति प्रकाश से संवाद किया और कहानी को लेकर अपनी जिज्ञासाएं रखीं। इस दौरान कहानी के कथ्य, भाषा और सामाजिक सरोकारों पर चर्चा हुई।
आरबीएस कॉलेज के प्रो. इंद्र कुमार यादव ने कहा कि कहानी में मौजूदा विषयों को उठाया गया है। श्री कृष्ण ने कहा कि कहानी मौजूदा लोकतंत्र की चुनौतियों को रेखांकित करती है। वहीं सीमान्त साहू ने कहानी में आम लोगों की आवाज को अभिव्यक्ति देने के प्रयास की सराहना की।
ब्रिगेडियर विनोद दत्ता ने कहा कि उपभोक्तावादी संस्कृति ने सब कुछ तुरंत हासिल करने की चाह बढ़ा दी है। उन्होंने समकालीन सामाजिक परिस्थितियों के संदर्भ में कहानी के प्रभाव पर अपनी बात रखी।

देसज भाषा आम आदमी तक साहित्य पहुंचाने में मददगार
रमेश पंडित ने कहानी की भाषा को लेकर कहा कि इसे सुनने के बाद लगा कि इसकी भाषा देसज है। उन्होंने कहा कि आम आदमी तक साहित्य को पहुंचाने के लिए ऐसी भाषा महत्वपूर्ण है।
विशाल रियाज ने कहा कि आवाज दबाए जाने के दौर में यह कहानी आम आदमी की आवाज को उठाती हुई दिखाई देती है। उन्होंने कहानी के सामाजिक सरोकार और उसके प्रभाव को रेखांकित किया।
कहानी पाठ के बाद कथाकार से सीधा संवाद
कथाकार शक्ति प्रकाश द्वारा कहानी का पाठ पूरा किए जाने के बाद कार्यक्रम में मौजूद साहित्यप्रेमियों ने उनसे सीधे सवाल किए। श्रोताओं ने कहानी की पृष्ठभूमि, कथानक और उसमें उभरने वाले सामाजिक-राजनीतिक संकेतों को लेकर चर्चा की।
कथाकार ने सवालों के जवाब देते हुए कहानी की रचना प्रक्रिया और उसके संदर्भों पर भी बातचीत की। संवाद के दौरान कहानी को समाज में हो रहे बदलावों, तनावों और आम आदमी की परिस्थितियों को सामने रखने वाली साहित्यिक विधा के रूप में भी देखा गया।

रंगलीला ने आयोजन के उद्देश्य बताए
कार्यक्रम की शुरुआत में रंगलीला के निर्देशक अनिल शुक्ल ने किस्सा कहानी आयोजन की प्रगति और उसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने ऐसे आयोजनों के माध्यम से कहानी और साहित्य को पाठकों एवं श्रोताओं तक सीधे पहुंचाने की पहल के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन अर्जुन सवेदिया ने किया, जबकि रमेश पंडित ने आभार व्यक्त किया।
साहित्य और संस्कृति से जुड़े लोग मौजूद रहे
कार्यक्रम में आकाशवाणी आगरा के पूर्व निदेशक नीरज जैन, शीरोज़ हैंग आउट के अजय तोमर, रामभरत उपाध्याय, डॉ. महेश धाकड़, डॉ. मधु भारद्वाज, वंदना तिवारी, मालती कुशवाह, अमरजीत सिंह, ज्योति खंडेलवाल, विशाल झा, मनु भाई पंड्या, दिनेश, सिद्धेश अरोरा, मोहम्मद आरिफ, हिना, शिव नारायण सिंह, अजय पचौरी और रोमी चौहान सहित साहित्य, संस्कृति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक लोग मौजूद रहे।
यह भी पढ़ें

Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
7579990777




